पांच ‘Jaychand’ परिवारों का नाम बताने से पीछे हटे तेज प्रताप यादव

Tej Pratap Yadav Backtracks on Promise to Reveal 'Five Jaychand Families'

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री Tej Pratap Yadav एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि पांच ‘Jaychand’ परिवारों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा और वह जल्द ही इनका चेहरा और चरित्र जनता के सामने लाएंगे।

लेकिन अब मीडिया ने जब उनसे इस खुलासे को लेकर सवाल किया, तो तेज प्रताप ने टालते हुए कहा – “इन सब बातों को छोड़िए, इस पर हम टिप्पणी नहीं करना चाहते।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह बेगूसराय में एक कार्यक्रम के लिए जा रहे हैं। उनका यह रुख समर्थकों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

देर रात का सोशल मीडिया पोस्ट

गुरुवार की रात करीब साढ़े दस बजे तेज प्रताप यादव ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि पांच ‘Jaychand’ परिवारों ने उनकी राजनीतिक यात्रा को खत्म करने की कोशिश की है।

उन्होंने दावा किया था कि शुक्रवार को वह इन सभी का चेहरा और चरित्र उजागर करेंगे और षड्यंत्र का पर्दाफाश करेंगे।

लेकिन शुक्रवार बीत गया और न तो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और न ही सोशल मीडिया पर कोई खुलासा आया।

समर्थकों की उम्मीद टूटी

तेज प्रताप के पोस्ट के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि वह बड़े नामों का पर्दाफाश करेंगे। लेकिन जब कुछ सामने नहीं आया, तो लोगों में निराशा दिखी।

कई लोग मान रहे थे कि इस खुलासे से बिहार की राजनीति में नई हलचल मच सकती है। अब उनकी चुप्पी से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस वजह से वह पीछे हट गए।

राजनीति में ‘Jaychand’ का अर्थ

भारतीय राजनीति में ‘Jaychand’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर गद्दारी और विश्वासघात के लिए होता है। तेज प्रताप ने भी जिन परिवारों का जिक्र किया, उन्हें ‘Jaychand’ बताकर यह संकेत दिया कि उन्हें नजदीकी लोगों ने ही धोखा दिया।

लेकिन अब नाम न उजागर करने से उनके दावे की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्यों बदला मन?

विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव ने दबाव में आकर या कानूनी पचड़े से बचने के लिए कदम पीछे खींचे होंगे।

कुछ लोगों का कहना है कि यह महज चुनावी रणनीति थी ताकि मीडिया का ध्यान उनकी ओर बना रहे।

व्यक्तिगत जीवन और विवाद

तेज प्रताप यादव कई बार अपने निजी जीवन को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में अनुष्का यादव संग उनकी तस्वीरें वायरल हुईं और उन्होंने रिश्ते को स्वीकार भी किया।

इसके बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

यही नहीं, तेज प्रताप ने अनुष्का के भाई आकाश यादव को भी ‘Jaychand’ करार दिया था और आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी तस्वीरें वायरल कर राजनीति खत्म करने की साजिश की।

Team Tej Pratap की शुरुआत

आरजेडी से निकाले जाने के बाद भी तेज प्रताप ने राजनीति से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने अपनी अलग टीम बनाई है, जिसका नाम रखा है – Team Tej Pratap

यह टीम युवाओं और बुनियादी मुद्दों पर काम करने का दावा करती है। उन्होंने दो प्रत्याशियों के नाम भी घोषित कर दिए हैं और खुद महुआ (वैशाली) से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

भाई तेजस्वी पर सीधा हमला

तेज प्रताप यादव लगातार अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने तेजस्वी की “Voter Adhikar Yatra” को फ्लॉप करार दिया और कहा कि इससे कोई फायदा नहीं होगा।

उनका कहना है कि तेजस्वी सही रास्ते से भटक गए हैं। यह बयान दोनों भाइयों के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेद को और गहरा करता है।

बिहार की राजनीति पर असर

तेज प्रताप के पांच ‘Jaychand’ परिवारों वाले बयान और फिर उससे पलटने ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दी है।

कई लोग इसे उनकी रणनीति मानते हैं, लेकिन बार-बार बयान बदलने से उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

Tej Pratap Yadav News एक बार फिर यह दिखाता है कि वह अपने बयानों और कदमों से सुर्खियां बटोरने में माहिर हैं।

पांच ‘Jaychand’ परिवारों के नाम उजागर करने का वादा कर पीछे हट जाना उनके विरोधियों को हमला करने का मौका देता है।

जैसे-जैसे Bihar Elections 2025 नजदीक आ रहे हैं, यह साफ है कि तेज प्रताप अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी यह रणनीति उन्हें वोट दिला पाएगी या उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को और कमजोर करेगी।

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