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दरभंगा विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 : एनडीए ने दरभंगा की सभी 10 के 10 सीटों पर किया कब्जा, महागठबंधन को एक भी सीट नहीं

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2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा जिले में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने एक शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की है। महागठबंधन को इस जिले में एक भी सीट नहीं मिल पाई, जो उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी एनडीए का दबदबा था, जहां उसने 10 में से 9 सीटों पर विजय प्राप्त की थी, जबकि महागठबंधन को एक सीट पर जीत मिली थी। इस बार महागठबंधन का पूरी तरह सफाया हो गया है, और एनडीए ने सभी सीटों पर कब्जा कर लिया।

दरभंगा जिले में एनडीए की जीत का विश्लेषण

दरभंगा विधानसभा सीट पर भाजपा के संजय सरावगी ने वीआईपी के उमेश सहनी को 24,593 वोटों से हराया। सरावगी को कुल 97,453 वोट मिले, जबकि उमेश सहनी को 72,860 वोट मिले। केवटी विधानसभा सीट पर भाजपा के मुरारी मोहन झा ने राजद के फराज फातमी को 7,305 वोटों से हराया। मुरारी को 89,123 वोट मिले, जबकि फराज को 81,818 वोट मिले।

हायाघाट विधानसभा सीट पर भाजपा के रामचंद्र प्रसाद ने सीपीआई (एम) के श्याम भारती को 11,839 वोटों से हराया। रामचंद्र प्रसाद को 77,222 वोट मिले, जबकि श्याम भारती को 65,383 वोट मिले। जाले विधानसभा सीट पर भाजपा के जीवेश मिश्रा ने कांग्रेस के ऋषि मिश्रा को 21,862 वोटों से हराया। जीवेश को 100,496 वोट मिले, जबकि ऋषि मिश्रा को 78,634 वोट मिले।

जदयू की भी दरभंगा में शानदार जीत

जदयू के उम्मीदवारों ने भी दरभंगा जिले में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की। दरभंगा ग्रामीण विधानसभा सीट पर जदयू के राजेश कुमार मंडल ने राजद के ललित यादव को 18,392 वोटों से हराया। राजेश कुमार को 80,624 वोट मिले, जबकि ललित यादव को 62,232 वोट मिले। कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीट पर जदयू के अतिरेक कुमार ने निर्दल गणेश भारती को 36,441 वोटों से हराया। अतिरेक को 85,685 वोट मिले, जबकि गणेश को 49,244 वोट मिले।

बेनीपुर विधानसभा सीट पर जदयू के विनय कुमार चौधरी ने कांग्रेस के मिथिलेश कुमार चौधरी को 13,603 वोटों से हराया। विनय कुमार को 84,207 वोट मिले, जबकि मिथिलेश को 70,604 वोट मिले। बहादुरपुर सीट पर जदयू के मदन सहनी ने राजद के भोला यादव को 12,011 वोटों से हराया। मदन को 96,300 वोट मिले, जबकि भोला यादव को 84,289 वोट मिले।

महागठबंधन के लिए बुरी खबर

महागठबंधन के उम्मीदवारों के लिए दरभंगा जिले में बुरी खबर थी। महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वीआईपी ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। अलीनगर सीट पर वीआईपी के मिश्री लाल यादव ने जीत दर्ज की, जबकि दरभंगा ग्रामीण सीट पर राजद के ललित यादव ने जीत हासिल की। लेकिन, इन दोनों सीटों के अलावा महागठबंधन को कोई और सीट नहीं मिली।

इस चुनाव में महागठबंधन को दरभंगा जिले में पूरी तरह से निराशा हाथ लगी है, जो यह दर्शाता है कि विपक्षी दलों को अब बिहार के इस क्षेत्र में अपनी रणनीतियों में सुधार की आवश्यकता है।

मतगणना प्रक्रिया और पारदर्शिता

दरभंगा जिले में मतगणना प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया। ईवीएम के वोटों की गिनती के लिए 14+1 टेबल का प्रबंधन किया गया था। प्रत्येक टेबल पर एक मतगणना सुपरवाइजर, एक सहायक और एक माइक्रो प्रेक्षक तैनात थे। इसके अलावा, उम्मीदवारों के गणना अभिकर्ता (काउंटिंग एजेंट) भी प्रत्येक टेबल पर उपस्थित थे, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सके।

डाक मतपत्रों की अलग से गिनती की गई, और इसकी पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए अलग टेबल लगाए गए थे। निर्वाचन क्षेत्रों में ज्यादा बूथ होने के कारण, वहां 30 या उससे अधिक राउंड में गिनती हुई, जबकि कम बूथ वाले क्षेत्रों में 25 राउंड में गिनती की गई।

एनडीए का मजबूत प्रदर्शन और आगे की चुनौतियाँ

एनडीए का दरभंगा जिले में इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन, यह दिखाता है कि भाजपा और जदयू की गठबंधन सरकार की नीतियाँ राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक मजबूत प्रभाव छोड़ रही हैं। भाजपा और जदयू के उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में अपने प्रभावी प्रचार के साथ जीत दर्ज की। भाजपा और जदयू के उम्मीदवारों ने अपनी चुनावी रणनीतियों और योजनाओं के जरिए जनता के बीच मजबूत संबंध बनाए, जो इस जीत का मुख्य कारण साबित हुआ।

महागठबंधन को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है, और इसे अब अपनी कार्यप्रणाली और चुनावी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। विपक्षी दलों को अब यह समझने की आवश्यकता है कि बिहार की राजनीति में केवल गठबंधन के आधार पर सफलता नहीं मिल सकती, बल्कि मजबूत स्थानीय समर्थन और जनहित की योजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।

2025 के बिहार विधानसभा चुनावों ने दरभंगा जिले में एनडीए की मजबूत पकड़ को और भी स्पष्ट किया। भाजपा और जदयू के नेताओं ने अपनी रणनीतियों से न केवल सीटें जीतीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ी। महागठबंधन के लिए यह एक बड़ा झटका है, जो यह दिखाता है कि विपक्ष को अब अपनी रणनीतियों और चुनावी नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है।

दरभंगा में एनडीए की जीत ने यह साबित कर दिया कि राज्य में उनकी राजनीति अब और भी मजबूत हो गई है। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन अपनी हार से किस तरह उबरता है और अपनी खोई हुई जमीन को फिर से कैसे हासिल करता है।

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