जांच के घेरे में निर्माण कार्य और आपात प्रतिक्रिया
बिहार के मुजफ्फरपुर में सोमवार, 2 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजे अचानक ऐसा धमाका हुआ कि गोबरसही-डुमरी इलाके में अफरातफरी मच गई। सड़क पर नाला निर्माण के लिए खुदाई चल रही थी। इसी दौरान जमीन के नीचे बिछी पीएनजी गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। गैस का रिसाव शुरू हुआ और कुछ देर बाद भीषण विस्फोट हो गया।
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धमाके की चपेट में आसपास के मकान, दुकानें और वाहन आ गए। एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हुए हैं। एक चार मंजिला इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा। कई घरों के शीशे टूट गए। जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल है कि पाइपलाइन टूटने के बाद गैस रिसाव की सूचना मिलने के बावजूद विस्फोट को क्यों नहीं रोका जा सका?
गोबरसही-डुमरी के साहू चौक पर कैसे हुआ हादसा?
घटना सदर थाना क्षेत्र के गोबरसही-डुमरी रोड स्थित साहू चौक के पास हुई। यहां सड़क पर नाला निर्माण का काम चल रहा था। खुदाई के दौरान जेसीबी मशीन भूमिगत पीएनजी पाइपलाइन तक पहुंच गई और पाइप क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद पाइपलाइन से तेजी से गैस निकलने लगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गैस रिसाव और विस्फोट के बीच करीब 25 से 30 मिनट का अंतर था।
इस समय अंतराल ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि रिसाव की सूचना समय पर संबंधित एजेंसी तक पहुंच गई थी, तो पाइपलाइन का वाल्व बंद करने और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने में कितना समय लगा? इसकी जांच अब जरूरी है।
एक की मौत, छह घायल; इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने पीटीआई को बताया कि इस विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हुई और 6 लोग घायल हुए। सभी घायलों को नजदीकी सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, चार घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा था। दो अन्य को एसकेएमसीएच भेजा गया। इनमें एक मरीज 80 प्रतिशत से अधिक झुलसा हुआ बताया गया, जबकि दूसरे को लगभग 20 प्रतिशत जलने की चोटें आई थीं।
विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक चार मंजिला इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास के करीब 100 मीटर के दायरे में कई मकानों के शीशे टूट गए। कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। धमाके के बाद आग लगी, जिसे दमकल और राहत दलों ने नियंत्रित किया।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में घायलों की संख्या 7 या उससे अधिक बताई गई है। शुरुआती रिपोर्टों में आंकड़े अलग-अलग रहे। इसलिए इस समय प्रशासन और जिलाधिकारी के हवाले से पुष्ट आंकड़ा 1 मौत और 6 घायलों का है।
रिसाव के बाद विस्फोट क्यों नहीं रोका जा सका?
इस हादसे में केवल पाइपलाइन टूटना ही जांच का विषय नहीं है। उससे भी महत्वपूर्ण है रिसाव शुरू होने के बाद की कार्रवाई। जिलाधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, रिसाव और धमाके के बीच लगभग 25 से 30 मिनट का अंतर था। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि सूचना मिलने के बाद आपात प्रतिक्रिया में देरी क्यों हुई और गैस की आपूर्ति समय रहते क्यों नहीं रोकी जा सकी।
अमर उजाला की रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आया है कि सूचना मिलने के बावजूद संबंधित कंपनी की त्वरित प्रतिक्रिया टीम समय पर नहीं पहुंची। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसे जांच का विषय माना जाना चाहिए, अंतिम निष्कर्ष नहीं। यदि सूचना समय पर दी गई थी, तो कॉल किस समय दर्ज हुई? संबंधित एजेंसी ने किस समय टीम रवाना की? मुख्य वाल्व कब बंद किया गया और घटनास्थल को खाली कराने में कितना समय लगा? इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने चाहिए।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। प्रभावित क्षेत्र को खाली कराया गया और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने पीटीआई को बताया कि घटना की वजह का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन यह भी पता लगाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां बरती गई थीं या नहीं। टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने जांच समिति गठित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की बात कही है। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है।
पीएनजी पाइपलाइन और निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी
पीएनजी यानी पाइप के जरिए घरों और प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जाने वाली प्राकृतिक गैस। भूमिगत पाइपलाइन के आसपास खुदाई करते समय संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। किसी भी सड़क या नाला निर्माण से पहले यह पता करना आवश्यक है कि जमीन के नीचे बिजली, पानी, गैस या अन्य उपयोगिता की कौन-कौन सी लाइनें मौजूद हैं। खुदाई के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर गैस का रिसाव आग और विस्फोट का जोखिम पैदा कर सकता है।
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि निर्माण एजेंसी को पाइपलाइन के स्थान की जानकारी थी या नहीं। क्या खुदाई से पहले संबंधित गैस कंपनी से अनुमति या तकनीकी मार्गदर्शन लिया गया था? क्या पाइपलाइन का नक्शा निर्माण एजेंसी के पास उपलब्ध था? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
हादसे से उठे सवाल, जवाब का इंतजार
मुजफ्फरपुर की यह घटना शहरी निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा है। एक ओर विकास के लिए सड़क और नाले बनाए जा रहे हैं, दूसरी ओर जमीन के नीचे मौजूद जरूरी सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रशासन की जांच में कम से कम चार बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब आना चाहिए— पाइपलाइन किस वजह से क्षतिग्रस्त हुई, रिसाव की सूचना कब मिली, गैस आपूर्ति बंद करने में कितना समय लगा और आपात प्रतिक्रिया में देरी हुई या नहीं।
गोबरसही-डुमरी का विस्फोट केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं है। यह भूमिगत बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। एक व्यक्ति की जान जा चुकी है और कई परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा है।
अब जरूरत केवल राहत और मुआवजे की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की है। जांच में यदि किसी एजेंसी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि शहर का विकास तभी सुरक्षित माना जाएगा, जब निर्माण की गति के साथ नागरिकों की सुरक्षा भी प्राथमिकता बने।
स्रोत: पीटीआई की रिपोर्ट – द प्रिंट · टाइम्स नाउ नवभारत – जिलाधिकारी का बयान · अमर उजाला – घटनास्थल और नुकसान की रिपोर्ट · द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
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