बिहार में पिछले कुछ हफ्तों से चल रही उमस भरी गर्मी से अब राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक Low Pressure System यानी निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से अगले 24 घंटे में पटना सहित राज्य के कई भागों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है।
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10 जिलों में भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने राज्य के 10 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इनमें बेगूसराय, समस्तीपुर, खगड़िया, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, बांका और जमुई शामिल हैं। इन जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जिससे जलभराव और स्थानीय बाढ़ की स्थिति बन सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सतर्क रहें और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखें।
तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट संभव
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आशीष कुमार के अनुसार, सक्रिय हो रहे मानसून तंत्र के कारण राज्य में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। यह बदलाव अगले 48 घंटों के भीतर महसूस किया जा सकता है। फिलहाल राजधानी सहित कई हिस्सों में पूर्वी हवाएं चल रही हैं, जिन्हें Purwa Winds कहा जाता है। इन हवाओं के चलते उमस में कमी आने लगी है और लोगों को कुछ हद तक राहत मिल रही है।
मानसून अब भी असमान रूप से सक्रिय
इस बार मानसून बिहार के सभी हिस्सों में समान रूप से सक्रिय नहीं रहा है। जहां दक्षिणी जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, वहीं उत्तरी भागों में अब तक बारिश की काफी कमी रही है। राज्य में अब तक सामान्य से 44 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सामान्य स्तर 432.2 मिमी के मुकाबले अब तक केवल 241.9 मिमी बारिश हुई है। इस बारिश की कमी का सीधा असर कृषि पर पड़ा है, खासकर धान की रोपाई पर जो मानसून पर निर्भर होती है।
बीते 24 घंटे में कहां-कहां हुई बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिणी बिहार के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। गया के डुमरिया में सबसे अधिक 85.4 मिमी वर्षा हुई। पटना जिले के धनरूआ में 50.4 मिमी, ओबरा (औरंगाबाद) में 52.2 मिमी और जहानाबाद में 66.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
फतुहा, दनियांवा और कुर्था जैसे इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई है। मोतिहारी, बक्सर, वैशाली और सिवान जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जो मानसून के धीरे-धीरे सक्रिय होने का संकेत है।
मुख्य शहरों में तापमान का हाल
बारिश के बावजूद अधिकतम तापमान अभी भी कई जिलों में ऊंचा बना हुआ है। पटना में अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। गया में अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री और न्यूनतम 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भागलपुर में अधिकतम तापमान 34.1 डिग्री और न्यूनतम 29.6 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं मुजफ्फरपुर में अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री और न्यूनतम 30.5 डिग्री दर्ज किया गया। इन तापमानों से साफ है कि बारिश से पहले तक गर्मी और उमस का असर काफी तीव्र था।
शाम होते-होते मौसम में दिखा बदलाव
दिनभर की तेज धूप और नम हवा के चलते राजधानी सहित कई इलाकों में लोग उमस से परेशान रहे। हालांकि शाम को मौसम में बदलाव शुरू हुआ। आसमान में काले बादल छा गए और हवाओं की रफ्तार भी बढ़ी, जिससे वातावरण में थोड़ी ठंडक आई और लोगों को राहत महसूस हुई। कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा ने तापमान को भी कुछ हद तक कम किया।
अगले 4 से 5 दिन तक हो सकती है अच्छी बारिश
मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना यह Weather System अगले कुछ दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके कारण अगले 4 से 5 दिनों तक राज्य में झमाझम बारिश के आसार हैं। यह बारिश किसानों के लिए काफी राहत भरी हो सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां अब तक धान की रोपाई नहीं हो सकी है।
भारी वर्षा की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है, खासकर निचले इलाकों में जहां जलभराव की स्थिति जल्दी बनती है।
कृषि के लिए महत्वपूर्ण है यह मानसून फेज
बिहार की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है। बारिश की देरी और कमी से कई जिलों में धान की खेती में रुकावट आई है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो किसान फिर से खेती की प्रक्रिया को शुरू कर सकेंगे। सरकार और कृषि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर किसानों को सलाह भी दी जा रही है।
बिहार में लंबे समय से चल रही उमस भरी गर्मी से राहत मिलने के आसार अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा मौसम तंत्र राज्य में मानसून को दोबारा सक्रिय कर सकता है। आने वाले कुछ दिनों में न सिर्फ तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि अच्छी बारिश के भी आसार हैं, जो खेती-बाड़ी के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही, भारी बारिश की संभावना वाले जिलों में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
अब राज्यवासियों की नजरें मौसम पर टिकी हैं, जिससे उन्हें न सिर्फ गर्मी से राहत मिले, बल्कि खेती की उम्मीदें भी फिर से जिंदा हो सकें।
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