दीपावली की रंगीन रोशनी और आतिशबाजी की गूंज के बाद अब बिहार के कई प्रमुख शहरों में धुएं की मोटी परत छा गई है। त्योहार के बाद, राज्य के अधिकांश हिस्सों में हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पटना, गया, भागलपुर, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों में सुबह के समय लोगों को धुंध और धुएं के बीच सांस लेना मुश्किल हो रहा था। दीपावली की रात की आतिशबाजी अब हवा में जहर घोल चुकी है, जिससे प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।
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बिहार के प्रमुख शहरों में गिरती हवा की गुणवत्ता
मौसम विभाग के अनुसार, दीपावली के बाद हवा की गति काफी धीमी हो गई है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि हवा की गति केवल 2 से 3 किलोमीटर प्रति घंटे तक घट गई है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में फंसे हुए हैं। इससे पटना, गया, दरभंगा, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 150 से 300 के बीच पहुंच गया है, जो “मॉडरेट से पूअर” श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
जब हवा की गति कम हो जाती है, तो वायु में मौजूद धूलकण और धुआं नीचे की परतों में फंसे रहते हैं। यही कारण है कि शहर के कई हिस्सों में सुबह के समय धुंध और धुएं का मिश्रण देखा गया। यह स्थिति सांस लेने के लिए बेहद कठिन हो गई है, खासकर सुबह के समय।
मौसम की स्थिति: अभी राहत की उम्मीद नहीं
20 अक्टूबर के मौसम रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकिनगर में न्यूनतम तापमान 20.4°C, पटना में न्यूनतम तापमान 24.7°C और अधिकतम तापमान 33.8°C दर्ज किया गया। हवा की धीमी गति और हल्की गर्मी के कारण प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं, जिससे हवा भारी महसूस हो रही है और आसमान पर धुंध की परत घनी हो गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक ठंड का असर नहीं दिखेगा और दिन में हल्की गर्मी बनी रहेगी, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।
दीपावली के बाद प्रदूषण स्तर में तेज बढ़ोतरी
बिहार एयर पोल्यूशन मॉनिटरिंग के आंकड़ों के अनुसार, दीपावली की रात आतिशबाजी और पटाखों की वजह से हवा में PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई। पटना के कई इलाकों में AQI 280 के पार पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी के करीब था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो दिनों तक हवा की गुणवत्ता में सुधार की संभावना कम है, क्योंकि हवा की गति में कोई खास बदलाव नहीं आएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रदूषण से बचने के लिए लोगों को कई जरूरी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सुबह की सैर से बचें, बाहर जाते समय मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इस प्रदूषित हवा में सांस लेने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
त्योहारों के बाद प्रदूषण और प्रदूषण से बचाव की जरूरत
दीपावली की रोशनी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन उसका धुआं अभी भी बिहार की हवा में मौजूद है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक हवा की गति तेज नहीं होती, तब तक बिहार के आसमान पर धुंध की चादर यूं ही टंगी रहेगी। इस स्थिति में नागरिकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रदूषण को कम करने के लिए सतर्क रहें और अगली दीपावली को प्रदूषण रहित बनाएं।
नागरिकों की भूमिका और बदलाव की आवश्यकता
यह समय है कि नागरिक अपने कर्तव्यों को समझें और प्रदूषण को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं। दीवाली के दौरान पटाखों के बजाय दीये जलाने की आदत डालें। इस तरह हम अगली दीपावली को केवल रोशनी का पर्व बना सकते हैं, धुएं का नहीं। इस अवसर पर प्रदूषण को कम करने के लिए व्यक्तिगत योगदान बेहद अहम है। खासतौर पर पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसों के बजाय पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले विकल्पों का चयन किया जा सकता है।
बिहार में बढ़ते प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभाव
बिहार में लगातार बढ़ते प्रदूषण का स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। यदि इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह आम लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे श्वसन संबंधित समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों का अधिक मात्रा में हवा में मौजूद रहना सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। इसलिए, यह जरूरी है कि नागरिक और सरकार मिलकर इस समस्या का हल निकाले।
सरकारी कदम और भविष्य में सुधार
सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करना होगा। त्योहारों के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े नियम और बड़े शहरों में वाहनों की संख्या को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, नागरिकों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और त्योहारों के दौरान प्रदूषण को कम करने के उपायों को अपनाना होगा।
बिहार में दीपावली के बाद प्रदूषण की स्थिति ने हमें एक बार फिर यह याद दिलाया कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जिम्मेदारी से कार्य करना कितना जरूरी है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सभी को मिलकर कदम उठाने होंगे। यह केवल एक सरकार का काम नहीं है, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी भी है। यदि हम सही दिशा में काम करें, तो हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित कर सकते हैं।



