होमBiharनालंदा विश्वविद्यालय में हिंदी और वैश्विक संवाद पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

नालंदा विश्वविद्यालय में हिंदी और वैश्विक संवाद पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

Published on

राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी 9 और 10 जनवरी को आयोजित होगी, जिसमें देश और विदेश से आए विद्वान, शिक्षाविद, राजनयिक और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में सशक्त बनाने पर गंभीर मंथन करना है।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का शीर्षक “हिंदी के प्रचार-प्रसार और वैश्विक संवाद में विभिन्न संस्थानों की भूमिका” रखा गया है। कार्यक्रम में सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जो हिंदी भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा करेंगे।

हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित चर्चा

संगोष्ठी का मुख्य फोकस हिंदी भाषा की सांस्कृतिक, शैक्षणिक और बौद्धिक भूमिका पर है। वक्ता इस बात पर चर्चा करेंगे कि हिंदी किस तरह वैश्विक मंच पर संवाद का सशक्त माध्यम बन सकती है, जबकि उसकी जड़ें भारतीय ज्ञान परंपरा में बनी रहें।

इस आयोजन में कुलपति, वरिष्ठ प्रोफेसर, शोधकर्ता, लेखक, संपादक और प्रशासक भाग ले रहे हैं। हिंदी के प्रचार से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि भी संगोष्ठी में शामिल हैं। कुछ वक्ता Online Mode के माध्यम से भी अपने विचार रख रहे हैं, जिससे कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिला है।

9 जनवरी को उद्घाटन सत्र का आयोजन

संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र 9 जनवरी को नालंदा विश्वविद्यालय के सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी उद्घाटन भाषण के माध्यम से संगोष्ठी की मूल भावना को प्रस्तुत करेंगे। उनके संबोधन में नालंदा की ऐतिहासिक विरासत और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर विशेष जोर रहने की संभावना है।

उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे। बिहार संग्रहालय के महानिदेशक और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। भारत के अजरबैजान में राजदूत अभय कुमार भी संगोष्ठी में भाग लेंगे। इसके अलावा पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध संपादक तरुण विजय भी अपने विचार रखेंगे।

दो दिनों में सात अकादमिक सत्र

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कुल सात अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र हिंदी भाषा के अलग-अलग पहलुओं पर केंद्रित रहेगा। 10 जनवरी को समापन सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया जाएगा और भविष्य के लिए सुझाव रखे जाएंगे।

इन सत्रों के माध्यम से हिंदी के विकास, उसके उपयोग और वैश्विक स्वीकार्यता को लेकर व्यापक संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

देश के प्रमुख संस्थानों के विद्वानों की भागीदारी

संगोष्ठी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय और आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद भी चर्चा में भाग लेंगे।

इन संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ हिंदी भाषा को आधुनिक संदर्भों में समझने और आगे बढ़ाने के तरीकों पर प्रकाश डालेंगे। यह मंच विभिन्न शैक्षणिक दृष्टिकोणों को एक साथ लाने का अवसर प्रदान कर रहा है।

पत्रकारिता और तकनीक में हिंदी की भूमिका

संगोष्ठी के कुछ सत्र हिंदी पत्रकारिता और संपादन की भूमिका पर केंद्रित होंगे। वक्ता डिजिटल युग में हिंदी मीडिया की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। कंटेंट क्वालिटी और भाषा की शुद्धता जैसे विषयों पर भी मंथन होगा।

इसके साथ ही आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हिंदी के विकास पर भी चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि नई तकनीक किस तरह हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में मदद कर सकती है।

वैश्विक मंच पर हिंदी की संभावनाएं

एक विशेष सत्र में हिंदी की वैश्विक भूमिका पर चर्चा की जाएगी। इसमें हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की संभावित आधिकारिक भाषा के रूप में देखने के विचार पर भी मंथन होगा। वक्ता हिंदी के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय उपयोग और उसकी संभावनाओं पर अपने विचार रखेंगे।

सांस्कृतिक और दार्शनिक दृष्टि से हिंदी की भूमिका को भी रेखांकित किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालयों और हिंदी प्रचार संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी।

समापन सत्र में बनेगा भविष्य का रोडमैप

10 जनवरी को आयोजित होने वाले समापन सत्र में संगोष्ठी के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें हिंदी के भविष्य और वैश्विक संवाद में उसकी भूमिका को लेकर स्पष्ट दिशा तय करने का प्रयास किया जाएगा।

नालंदा की ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत से प्रेरित यह संगोष्ठी हिंदी को ज्ञान, संस्कृति और वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। आयोजन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगोष्ठी हिंदी के भविष्य को लेकर नई सोच और नीति निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

मीनापुर का किसान फसल बेचकर कितना कमाता है? खेत से बाजार तक पूरा हिसाब

मीनापुर में धान की फसल जब खेत में लहलहाती है, तो दूर से वह...

विधानसभा में उठेगा ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा और पेंशन का मुद्दा, पारू व लालगंज विधायकों ने दिया भरोसा

मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी के ‘हमारी आवाज’ कार्यक्रम में पत्रकारों ने सर्वसम्मति से पारित...

More like this

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

विधानसभा में उठेगा ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा और पेंशन का मुद्दा, पारू व लालगंज विधायकों ने दिया भरोसा

मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी के ‘हमारी आवाज’ कार्यक्रम में पत्रकारों ने सर्वसम्मति से पारित...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

शिक्षक से बड़ा कौन? भारत की उस परंपरा की पड़ताल, जहाँ गुरु को देवता कहा गया

KKN पड़ताल। किसी बच्चे के हाथ में पहली बार कलम आती है, तो वह...

क्या एक विधायक पांच साल में अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है?

KKN ब्यूरो। विधायक के पास अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 वर्षों में 20...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

मीनापुर की जुड़वा बहनों ने CSIR-NET में लहराया परचम, शनाया को ऑल इंडिया 92वीं रैंक

मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड की जुड़वा बहनों शनाया निशांत और शोनाया निशांत ने CSIR-NET...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...