नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन देवी दुर्गा के एक शक्तिशाली रूप, मां कात्यायनी की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर भक्त पूरी श्रद्धा और विधि से इस पूजा को करते हैं, तो उनके विवाह में आ रही रुकावटें समाप्त हो जाती हैं। मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने महिषासुर का वध किया था। इसके अलावा, वे न केवल असुरों का नाश करती हैं, बल्कि अपने भक्तों को संकटों से उबारने वाली देवी मानी जाती हैं।
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मां कात्यायनी का रूप और वाहन
मां कात्यायनी की सवारी शेर (सिंह) है, जो उनकी शक्ति और वीरता को दर्शाता है। उनके चार भुजाएं हैं और वे इन भुजाओं में कमल और तलवार धारण करती हैं। एक भुजा में वर मुद्रा और दूसरी में अभय मुद्रा होती है, जो उनके भक्तों को आशीर्वाद और सुरक्षा प्रदान करती है। उनके सिर पर एक सुंदर मुकुट हमेशा सुशोभित रहता है, जो उनकी दिव्यता और प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
मां कात्यायनी पूजा का मुहूर्त
मां कात्यायनी की पूजा के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित हैं, जिन्हें जानना और अनुसरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा के लिए प्रमुख मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: 04:36 AM से 05:24 AM
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अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM से 12:35 PM
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विजय मुहूर्त: 02:11 PM से 02:59 PM
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गोधूलि मुहूर्त: 06:10 PM से 06:35 PM
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अमृत काल: 06:05 PM से 07:53 PM
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सर्वार्थ सिद्धि योग: 03:55 AM, 29 सितम्बर से 06:13 AM, 29 सितम्बर
इन मुहूर्तों में पूजा करने से मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
मां कात्यायनी के लिए प्रिय भोग और रंग
मां कात्यायनी को शहद का भोग प्रिय है। इसे पूजा के दौरान अर्पित करने से भक्तों का व्यक्तित्व निखरता है और वे मानसिक शांति प्राप्त करते हैं। इसके अलावा, मां कात्यायनी को लाल रंग के पुष्प विशेष रूप से पसंद हैं। इस दिन गुड़हल या गुलाब के फूलों को अर्पित करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इन फूलों से मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त होती है।
मां कात्यायनी का मंत्र
मां कात्यायनी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है:
ॐ देवी कात्यायन्यै नम:॥
यह मंत्र मां कात्यायनी को सम्मान और प्रार्थना अर्पित करने का एक दिव्य तरीका है। इसके जाप से भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
मां कात्यायनी स्तुति मंत्र
मां कात्यायनी की स्तुति के लिए एक और महत्वपूर्ण मंत्र है:
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
यह मंत्र मां कात्यायनी के समस्त रूपों को नमन करता है और उनके दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए उपासना की जाती है।
मां कात्यायनी कवच मंत्र
मां कात्यायनी का कवच मंत्र सुरक्षा और समृद्धि के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह मंत्र भक्तों को हर प्रकार के संकट से उबारने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद देता है:
कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥
यह मंत्र शारीरिक और मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे भक्त हर मुसीबत से बच सकते हैं।
मां कात्यायनी पूजा विधि
मां कात्यायनी की पूजा का विशेष तरीका है जिसे ध्यान से करना चाहिए। पूजा की विधि इस प्रकार है:
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स्नान और मंदिर की सफाई: पूजा करने से पहले स्नान करें और घर के मंदिर को साफ करें।
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गंगाजल से अभिषेक: देवी दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें।
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अक्षत और चंदन अर्पित करें: देवी को अक्षत, लाल चंदन, सिंदूर, और लाल-पीले पुष्प अर्पित करें।
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जलाभिषेक और तिलक: सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें और उन पर तिलक करें।
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प्रसाद अर्पित करें: फल, मिठाई, और शहद का भोग अर्पित करें।
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दीप और धूप जलाएं: घर के मंदिर में धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं।
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दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें: पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
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पान के पत्ते पर कपूर और लौंग रखें: पान के पत्ते पर कपूर और लौंग रखकर मां की आरती करें।
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क्षमा प्रार्थना: अंत में पूजा को समाप्त करते हुए क्षमा प्रार्थना करें।
मां कात्यायनी के लिए भोग और आरती
मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करने की परंपरा है। शहद का भोग उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक तरीका माना जाता है। इसके साथ ही, पूजा के बाद मां कात्यायनी की आरती गाई जाती है, जो उनके महान कार्यों और शक्ति को दर्शाती है। एक प्रसिद्ध आरती है:
जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
यह आरती मां कात्यायनी के आशीर्वाद के लिए एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भक्तों को शांति और समृद्धि की प्राप्ति कराती है।
मां कात्यायनी की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन एक महान भक्त थे और उन्होंने मां दुर्गा की कठिन तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। इसी कारण उन्हें ‘कात्यायनी’ के नाम से जाना जाता है। देवी कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था, और यही कारण है कि उन्हें ‘महिषासुर मर्दिनी’ भी कहा जाता है। उनका रूप और शक्ति असुरों का संहार करने में सक्षम मानी जाती है।
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं, बल्कि भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। मां कात्यायनी की पूजा के दौरान किए गए मंत्रों और आरती से भक्तों को मानसिक शांति और आशीर्वाद मिलता है। इस दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, और यह पूजा विधि भक्तों के जीवन को सकारात्मक दिशा में बदलने में मदद करती है।
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