गुजरात में जारी भारी मानसूनी बारिश के बीच बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। आनंद और वडोदरा जिलों को जोड़ने वाला प्रमुख गंभीरा पुल (Gambhira Bridge) तेज बारिश की वजह से ढह गया, जिससे कई वाहन नदी में गिर गए। इस दुखद दुर्घटना में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लापता हैं।
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घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई है। बचाव कार्य जोरों पर है और प्रशासन ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर भेज दी हैं। घटना ने एक बार फिर भारत की कमजोर और उपेक्षित बुनियादी संरचना (infrastructure) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बारिश के चलते पुल ध्वस्त, भारी जनहानि की आशंका
गंभीरा पुल, जो आनंद और वडोदरा के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, बुधवार सुबह लगभग 6 बजे लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण अचानक टूट गया। घटना के समय पुल पर कई वाहन गुजर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ब्रिज के टूटते ही कारें, बाइक और अन्य वाहन सीधे नदी में समा गए। कुछ वाहन पानी के बहाव में दूर तक बह गए। SDRF और स्थानीय बचाव दलों द्वारा नदी में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने जताई चिंता, सरकार पर साधा निशाना
गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता अमित चावड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर हादसे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा:
“आनंद और वडोदरा जिलों को जोड़ने वाला मुख्य गंभीरा पुल भारी बारिश के कारण ढह गया है। कई वाहन नदी में गिर चुके हैं। प्रशासन को तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करना चाहिए और यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।”
उन्होंने हादसे को सरकारी लापरवाही और खराब ढांचे की देन बताया और राज्य सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बचाव कार्य जारी, SDRF और NDRF की टीमें मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, फायर ब्रिगेड, और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को भी तैनात किया गया।
टीमें रबर बोट्स, रस्सियों, और डाइवर्स की मदद से नदी में गिरे वाहनों और लोगों को निकालने का प्रयास कर रही हैं। अब तक तीन शव बरामद किए गए हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
यातायात पर भारी असर, वैकल्पिक मार्गों की तलाश
गंभीरा पुल के टूटने से आनंद और वडोदरा के बीच यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। यह पुल रोजाना हजारों लोगों के आवागमन का मुख्य जरिया था। फिलहाल, प्रशासन वैकल्पिक मार्गों से यातायात चालू रखने की कोशिश कर रहा है।
स्थानीय लोगों को करीब 40-50 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। स्कूल, ऑफिस और कारोबारी संस्थानों पर इसका गहरा असर पड़ा है।
मानसून के दौरान ढांचागत असुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि भारत में मानसून के दौरान सड़क और पुल जैसे बुनियादी ढांचे की स्थिति बेहद खराब है। देशभर में हर साल बारिश के दौरान इस तरह के हादसे सामने आते हैं, जिनकी मुख्य वजह होती है:
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निर्माण में गुणवत्ता की कमी
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समय-समय पर निरीक्षण न होना
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जल निकासी व्यवस्था का अभाव
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बढ़ते ट्रैफिक लोड के बावजूद मरम्मत न होना
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं, अगर समय पर ब्रिज की जांच और मरम्मत की जाती।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, जांच की मांग
इस हादसे से स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। ग्रामीणों और यात्रियों ने कहा कि पिछले कई महीनों से पुल की हालत खराब थी, लेकिन प्रशासन ने चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया।
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की भी मांग की है।
क्या कहती हैं रिपोर्टें?
गुजरात में इस समय भारी मानसून सक्रिय है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही राज्य के कई हिस्सों में रेड अलर्ट जारी किया था। पिछले 24 घंटों में 70 से 100 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है, जिससे नदियां उफान पर हैं और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
गुजरात के आनंद-वडोदरा मार्ग पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि हम बुनियादी ढांचे की लापरवाही की कितनी बड़ी कीमत चुका सकते हैं। इस घटना में तीन लोगों की जान चली गई, और कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकारें सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित न रहें, बल्कि मौजूदा पुलों और सड़कों का व्यापक ऑडिट कराएं, और जो पुल जर्जर हालत में हैं, उन्हें तुरंत मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए चिन्हित किया जाए।
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