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दिल्ली में कम आयु वालों में ब्लड कैंसर का खतरा बढ़ा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

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KKN Gurugram Desk | दिल्ली में हर साल रक्त कैंसर के कम से कम 3,000 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से एक गंभीर रूप एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (AML) के मामले हैं। यह आक्रामक ब्लड कैंसर पहले 50 या 60 साल के लोगों में ज्यादा देखा जाता था, लेकिन अब यह 30 से 40 वर्ष के युवाओं में तेजी से फैलने लगा है, जो चिंता का विषय बन गया है। एम्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉक्टर रंजीत साहू ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस बीमारी की बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है, जिस पर शीघ्र ध्यान देने की आवश्यकता है।

क्या है एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (AML)?

एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (AML) एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो और रक्त को प्रभावित करता है। इसमें, शरीर में असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएं बनती हैं, जो सामान्य रक्त कोशिकाओं को दबा देती हैं और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती हैं। AML के कारण एनीमिया, खून बहना और संक्रमण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह बीमारी तेजी से बढ़ती है और यदि समय पर उपचार न मिले तो यह जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।

दिल्ली में AML के बढ़ते मामले: 30 से 40 वर्ष के युवाओं में खतरा

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में AML के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। जहां पहले यह बीमारी वृद्धों में ही देखने को मिलती थी, वहीं अब यह 30-40 साल के युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। यह युवा वर्ग, जो पहले इस बीमारी से कम प्रभावित होता था, अब इसके जाल में फंसता जा रहा है। डॉ. रंजीत साहू ने बताया कि एएमएल का देर से पता चलना बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य संक्रमण या थकान जैसे होते हैं, जिससे इसका सही समय पर निदान नहीं हो पाता।

AML के इलाज में समस्याएं और इलाज में देरी

एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया का इलाज समय पर करना बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन अक्सर मरीजों को सही उपचार प्राप्त करने में काफी समय लग जाता है। डॉ. साहू के अनुसार, AML के प्रारंभिक लक्षण जैसे थकान और संक्रमण आमतौर पर किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं देते, और इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक सही जांच होती है, तब तक यह बीमारी अत्यधिक बढ़ चुकी होती है। एक साधारण ब्लड टेस्ट से इसे पहचाना जा सकता है, लेकिन इलाज केवल विशेषीकृत चिकित्सा केंद्रों में ही संभव है, और इन उपचारों की लागत भी काफी अधिक होती है, जिससे कई लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते।

AML के इलाज में सबसे बड़ी बाधा आर्थिक स्थिति और अपर्याप्त बीमा सुरक्षा

AML के इलाज की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक तंगी और अपर्याप्त बीमा सुरक्षा है। विशेषज्ञों के अनुसार, AML से पीड़ित केवल 30% मरीज ही इलाज पूरा कर पाते हैं। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत और खराब हो जाती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि बीमा कंपनियां AML जैसे महंगे उपचार के लिए पर्याप्त कवर प्रदान नहीं करती हैं, जिससे अधिकतर मरीज इलाज के खर्चे का सामना नहीं कर पाते। इन मरीजों को इलाज में देरी के कारण अवसर खोने का जोखिम होता है, और उनका जीवन संकट में आ सकता है।

मौजूदा स्थिति में सरकार से अपील: AML को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता में शामिल किया जाए

जैसे-जैसे AML के मामले बढ़ते जा रहे हैं, विशेषज्ञों ने सरकार से यह अपील की है कि इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि सरकार को AML के इलाज और जांच को सुलभ और सस्ता बनाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग समय पर इलाज प्राप्त कर सकें। सरकार को बीमा योजनाओं में सुधार करना चाहिए और प्रारंभिक निदान के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए, ताकि AML के मामलों में समय पर हस्तक्षेप किया जा सके।

नैतिक जिम्मेदारी: AML के मामलों में और रिसर्च की आवश्यकता

यह भी माना जा रहा है कि सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं को AML के कारणों और इलाज पर अधिक रिसर्च करनी चाहिए, ताकि इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि AML के मामलों में आधुनिक उपचार के साथ-साथ प्रारंभिक जांच और समय पर निदान बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर समय रहते कदम उठाए जाते हैं तो बहुत से मरीज इस बीमारी से लड़ने में सफल हो सकते हैं।

जागरूकता और प्रिवेंशन पर ध्यान देना जरूरी

AML के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए लोगों को इसके लक्षणों के बारे में बताया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को यदि थकान, अनियंत्रित खून बहना, या संक्रमण जैसे लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। इसके अलावा, AML से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की भी सलाह दी जाती है। स्वस्थ आहार, व्यायाम, और स्मोकिंग और शराब से बचना इस बीमारी के खतरे को कम कर सकता है।

दिल्ली में AML के मामलों में बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। खासकर 30-40 वर्ष के युवा वर्ग में इस बीमारी का फैलाव चिंता पैदा कर रहा है। इसके इलाज में आने वाली आर्थिक कठिनाइयां और समय पर निदान न होना इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि AML को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता में शामिल किया जाए, ताकि इसका इलाज सुलभ और सस्ता हो सके। इसके अलावा, समय पर निदान और जागरूकता अभियान के जरिए इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, जिससे और अधिक जिंदगियां बचाई जा सकें।

हमारे स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और लोगों के लिए सस्ती चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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