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सोने के भाव में तेजी: अमेरिका-चीन टैरिफ टेंशन के बीच सोने की कीमतों में उछाल, इस साल ₹14,421 महंगा

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KKN गुरुग्राम डेस्क | सोने के भाव में इस साल भारी वृद्धि हो रही है, और स्पॉट गोल्ड गुरुवार को 0.2% बढ़कर 3,089.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। भारत में सोने के भाव भी इस वर्ष अब तक ₹14,421 प्रति 10 ग्राम बढ़ चुके हैं। यह वृद्धि उन वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारकों के कारण हो रही है, जिनमें अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ विवाद और वित्तीय अनिश्चितता जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि सोने के बढ़ते हुए दामों का क्या कारण है और इसके भविष्य के लिए क्या संकेत हैं।

सोने के भाव में क्यों हो रही है वृद्धि?

सोना हमेशा से ही एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, विशेष रूप से वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक संकट के दौरान। जब भी वित्तीय बाजारों में अस्थिरता होती है, तो निवेशक सोने को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में खरीदते हैं। वर्तमान में सोने के दामों में वृद्धि के कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  1. अमेरिका-चीन व्यापार विवाद: यूएस और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ मुद्दे दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। इन तनावों के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का माहौल बन गया है, और इसके चलते निवेशक सोने में निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  2. वृद्धि हो रही महंगाई: महंगाई बढ़ने के साथ, सोने की मांग भी बढ़ी है, क्योंकि यह निवेशकों को मुद्रा के मूल्य में गिरावट से बचने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है। महंगाई बढ़ने से मुद्रा का मूल्य गिरता है, और निवेशक सोने को अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने का एक तरीका मानते हैं।

  3. कम ब्याज दरें: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा न्यूनतम ब्याज दरों को बनाए रखने से सोने में निवेश आकर्षक हो गया है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने जैसे कीमती धातुओं में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि अन्य निवेश विकल्पों से अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता है।

  4. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता: कोरोना महामारी के बाद, आर्थिक अस्थिरता और मंदी के संकेत वैश्विक स्तर पर नजर आ रहे हैं, जिससे सोने के भाव में और वृद्धि हुई है। निवेशक भविष्य में होने वाली संभावित आर्थिक मंदी से बचने के लिए सोने में निवेश कर रहे हैं।

भारत में सोने के बढ़ते हुए दाम

भारत में सोने की कीमतों में वृद्धि के कई कारण हैं। रुपए की कमजोरी और वैश्विक सोने की कीमतों में वृद्धि दोनों ही कारक हैं, जो घरेलू बाजार में सोने के दामों को प्रभावित करते हैं। 2025 में अब तक सोने के दाम ₹14,421 प्रति 10 ग्राम बढ़ चुके हैं, जो एक बड़ा उछाल है। भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ घरेलू कारकों जैसे त्योहारों और शादियों का मौसम, रुपया और डॉलर के बीच आदान-प्रदान और महंगाई जैसी चीजों से प्रभावित होती हैं।

भारत में सोने का मुख्य उपयोग सौंदर्य और धार्मिक अनुष्ठान जैसे विवाह और त्योहारी सीजन में होता है, जिसके कारण मांग हर साल बढ़ती है। इस साल की बढ़ी हुई कीमतों के साथ, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है, लेकिन फिर भी इसकी मांग बनी हुई है।

अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद और सोने की कीमतों पर प्रभाव

अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ विवाद की वजह से वैश्विक व्यापार में अस्थिरता का माहौल बना है। व्यापार युद्ध के कारण, चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगा दिए हैं और इसके बदले अमेरिका भी अपनी नीतियों में बदलाव कर रहा है। इन व्यापारिक तनावों ने वित्तीय बाजारों में एक तरह की अनिश्चितता को जन्म दिया है, जो सोने की कीमतों को ऊंचा कर रही है।

विश्वव्यापी निवेशक, जो सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं, अब और अधिक इस धातु में निवेश कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में वृद्धि हो रही है। चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और भविष्य की आर्थिक मंदी की आशंका ने भी सोने को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

सोने की कीमतों में और कितनी बढ़ोतरी हो सकती है?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका-चीन व्यापार समझौते में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है और महंगाई और वित्तीय अस्थिरता बनी रहती है, तो सोने की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सोना ₹55,000 प्रति 10 ग्राम तक भी पहुंच सकता है, खासकर यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आती है और बाजारों में अस्थिरता बनी रहती है।

फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन भी सोने की कीमतों पर प्रभाव डाल सकता है। यदि ब्याज दरें कम रहती हैं, तो सोने में निवेश अधिक आकर्षक बनेगा, जिससे कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।

निवेश के लिए सोने की रणनीतियाँ

सोने में निवेश करने के कई तरीके हैं, और वर्तमान बढ़ते दामों के बीच आपको अपने निवेश का सही तरीका चुनना चाहिए:

  1. भौतिक सोना: सोने की गहनों या सोने के सिक्कों के रूप में खरीदारी एक पारंपरिक तरीका है, लेकिन यह भंडारण और सुरक्षा की समस्याओं का सामना कर सकता है।

  2. गोल्ड ईटीएफ: गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) सोने में निवेश का एक सरल तरीका है। इसमें सोने का ट्रैकिंग किया जाता है, और यह ब्रोकर के माध्यम से ट्रेड किए जाते हैं।

  3. गोल्ड म्यूचुअल फंड्स: यह म्यूचुअल फंड्स सोने की खनन कंपनियों में निवेश करते हैं, जिससे आपको गोल्ड के बाजार के उतार-चढ़ाव से लाभ मिल सकता है।

  4. सोवरेन गोल्ड बॉन्ड: भारत सरकार द्वारा जारी किए गए सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स एक सुरक्षित और आकर्षक निवेश विकल्प है। ये बांड निवेशकों को सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से लाभ दिलाने के साथ-साथ एक निश्चित ब्याज दर भी प्रदान करते हैं।

2025 में सोने के दामों में वृद्धि वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थितियों के कारण हो रही है। अमेरिका-चीन व्यापार विवाद, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता जैसे कारक सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इस बढ़ोतरी के बीच, निवेशकों के लिए सोने में निवेश एक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन सकता है। हालांकि, सोने की कीमतों में भविष्य में और वृद्धि हो सकती है, इसके बावजूद निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेने की आवश्यकता है।

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