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आधुनिक जीवन शैली से कमजोर हो रही है प्रजनन क्षमता

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लंदन। लंदन में हुए एक शोध से पता चला है कि आधुनिक जीवन शैली मानव के प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को कमजोर कर रही है। कहतें हैं कि जब किसी कपल को बेबी चाहिए होता है तो इसके लिए जरूरी है कि उनका बॉडी सिस्टम सही से काम कर रहा हो। यानी बॉडी का केमिकल बैलेंस बेहतर होना जरूरी है। किंतु, मौजूदा दौर में यह सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा है।

इसमें सबसे अहम है भूमिका है कीटनाशक की। दरअसल, शरीर की ऊर्जा हमारे भोजन पर ही निर्भर है। आजकल ज्यादातक खाद्य पदार्थ केमिकल की सहायता से तैयार किए जाते हैं। ऐसे में इनका हानिकारक केमिकल हमारे शरीर की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्म टॉयलेट सीट भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। लोग कई घंटे तक लगतार अपनी सीट पर बैठे रहते हैं। इससे सीट का तापमान बढ़ जाता है। लिहाजा, उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। कार की गर्म सीट भी प्रजनन क्षमता के लिए बेहद नुकसान देह है क्योंकि इससे शुक्राणु नष्ट होने का खतरा रहता है।
इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रभाव से पुरुषों की फर्टीलिट प्रभावित होने की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, अभी इससे महिलाओं के संबंध में जानकारी मिलना बाकी है। कम्प्यूटर, मोबाइल या गैजेट्स की स्क्रीन से निकलने वाली किरणें भी इंसान की फर्टीलिटी के लिए नुकसान देह साबित हो सकती हैं। कहतें हैं कि आप जितने भी ब्यूटी प्रोडक्ट यूज करते हैं उनमें अधिकांश प्रोडक्ट हानिकारक केमिकल की मदद से तैयार होता हैं। ये केमिकल शरीर के हार्मोन को प्रभावित करता हैं। लिहाजा, अपनी फर्टीलिटी दुरुस्त रखना है तो ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल संभल कर करना होगा।
बात यही खत्म नही होती है। बल्कि, घर में इस्तेमाल होने वाला कई प्रकार के पेंट भी प्रजनन क्षमता के लिए नुकसान देह हो सकता हैं। हालांकि हाई वीओसी वाले पेंट्स पर प्रतिबंध लगा हुआ है। बावजूद, इसके अक्सर घरो में काफी पुराना पेंट लगा है, जो प्रजनन क्षमता को कमजोर कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपके घर में लगा सप्लाई वाला नल यदि पुराना है, तो पानी के साथ हानिकारक रसायन आ सकता हैं। जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता हैं। आज कल प्लास्टिक रैपर का प्रचलन हो गया है। किंतु, यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जाता। क्योंकि इसके हानिकारक रसायन कुछ मात्रा में हमारे भोजन में मिल जाता हैं और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता हैं। लिहाजा, यदि आप बेबी प्लान कर रहें हैं तो इन जिंचो से बचें।

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