Home New Delhi सुप्रीम कोर्ट की यमुना सफाई पर अहम टिप्पणी और दिल्ली की राजनीति

सुप्रीम कोर्ट की यमुना सफाई पर अहम टिप्पणी और दिल्ली की राजनीति

KKN गुरुग्राम डेस्क | सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 25 फरवरी 2025 को यमुना नदी की सफाई को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में सरकार बदलने के बाद यमुना के प्रदूषण और पानी के बंटवारे से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 13 जनवरी 2021 को स्वत: संज्ञान लिया था और तब से ही कोर्ट इस मुद्दे पर आदेश जारी कर रही है।

यमुना नदी की सफाई का मुद्दा दिल्ली में खासा राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। हाल ही में भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को हराया और यमुना की सफाई को एक अहम मुद्दा बनाया। इस लेख में हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और यमुना सफाई पर हो रही राजनीति की चर्चा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: यमुना सफाई में हो सकता है सुधार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने यमुना के प्रदूषण और पानी के बंटवारे के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा, “दिल्ली में सरकार बदलने से अब इन विवादों का हल निकल सकता है। अब इन बदले हुए हालात में बेहतर कार्यान्वयन संभव हो सकता है।” यमुना नदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होती हुई दिल्ली तक पहुंचती है, और इन तीन राज्यों के बीच नदी के पानी को लेकर विवाद चलते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अब तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार होने से इस मुद्दे का हल निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दिल्ली में भाजपा की सत्ता और यमुना की सफाई

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हराने के बाद, भाजपा ने यमुना की सफाई का वादा किया था। अब भाजपा सरकार ने यमुना की सफाई के लिए एक तीन साल की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत यमुना नदी की सतह को साफ करने के लिए मशीनें तैनात की गई हैं। ये मशीनें जैविक और प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा कर रही हैं, जिससे नदी के पानी को कुछ हद तक साफ किया जा सके।

यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि केवल सतह पर सफाई से यमुना की समस्याएं पूरी तरह से हल नहीं हो सकतीं। इसके लिए शहरी और औद्योगिक अपशिष्टों को ठीक से निपटाने की जरूरत है। इसके अलावा, पानी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी जल शोधन संयंत्रों की आवश्यकता है।

यमुना के प्रदूषण के कारण और उसका प्रभाव

यमुना नदी पर प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। यह नदी दिल्ली और अन्य राज्यो के लाखों लोगों के लिए जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। लेकिन पिछले कई वर्षों से इस नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण इसका पानी पीने लायक नहीं बचा।

यमुना में औद्योगिक कचरा, घरेलू अपशिष्ट और अन्य प्रदूषक तत्वों का मिश्रण नदी के पानी को गंदा करता है। इससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। यमुना के पानी में अमोनिया और अन्य हानिकारक रसायन बढ़ने के कारण जलशोधन संयंत्रों को पानी की शुद्धता बनाए रखने में मुश्किल हो रही है।

हाल ही में वजीराबाद बैराज में अमोनिया के स्तर में वृद्धि ने दिल्ली के जल आपूर्ति व्यवस्था को बाधित किया था। इससे दिल्ली के कई क्षेत्रों में पीने के पानी की कमी हो गई थी। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को जल शोधन संयंत्रों की क्षमता बढ़ानी होगी और प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना होगा।

दिल्ली सरकार का प्रयास: औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई

दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के किनारे स्थित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। ये इकाइयां नदी में प्रदूषण डालने के लिए जिम्मेदार हैं। सरकार ने इन इकाइयों से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कड़े उपाय किए हैं।

दिल्ली सरकार ने औद्योगिक इकाइयों को चेतावनी दी है कि यदि वे अपनी गतिविधियों से यमुना के पानी को प्रदूषित करती हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम यमुना की सफाई को एक नया दिशा दे सकता है और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में मदद कर सकता है।

यमुना में बढ़ते अमोनिया स्तर का प्रभाव

हाल ही में यमुना नदी के वजीराबाद बैराज में अमोनिया का स्तर एक बार फिर से बढ़ गया, जिससे दिल्ली के जल शोधन संयंत्रों की कार्यक्षमता पर असर पड़ा। वजीराबाद और चंद्रावल जलशोधन संयंत्रों से जल आपूर्ति में 15 प्रतिशत की कमी आई है। इससे दिल्ली के कई इलाकों में पानी की कमी हो रही है।

अमोनिया के बढ़ते स्तर से निपटने के लिए जल शोधन संयंत्रों को अद्यतन करने की जरूरत है। इसके साथ ही, नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और भी ठोस कदम उठाने होंगे।

यमुना नदी की सफाई के लिए भाजपा की तीन साल की योजना

भा.ज.पा. सरकार ने यमुना नदी की सफाई के लिए एक तीन साल की योजना बनाई है, जिसके तहत कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इस योजना में नदी की सतह पर जमा कचरे को हटाने के लिए मशीनों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, नदी किनारे स्थित औद्योगिक इकाइयों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जो नदी में प्रदूषण डालने के लिए जिम्मेदार हैं।

भा.ज.पा. सरकार का यह कदम यमुना की सफाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह असल समस्या का समाधान नहीं कर सकता। यमुना नदी में प्रदूषण को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जल शोधन और कचरे के प्रबंधन की आवश्यकता है।

यमुना सफाई पर राजनीति और भाजपा का रुख

यमुना की सफाई हमेशा से राजनीति का हिस्सा रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार यमुना के पानी में “जहर” मिला रही है। इस मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने यमुना का पानी पीकर यह साबित करने की कोशिश की थी कि पानी बिल्कुल साफ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केजरीवाल के आरोपों को घृणित बताया और दावा किया कि वह 11 वर्षों से यमुना का पानी पी रहे हैं। इन आरोपों और काउंटर आरोपों ने यमुना की सफाई को राजनीतिक मंच बना दिया था।

हालांकि, अब भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद उम्मीद की जा रही है कि यमुना की सफाई के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा।

यमुना नदी की सफाई एक जटिल और बहु-आयामी समस्या है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां, भाजपा की नई योजना और दिल्ली सरकार की कार्रवाई यमुना के प्रदूषण को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती हैं। हालांकि, नदी की वास्तविक सफाई और इसके पानी की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए और भी बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

राजनीतिक विवादों को दरकिनार कर, हमें एक साथ मिलकर इस नदी को साफ करने के प्रयासों को बढ़ावा देना होगा। यमुना की सफाई एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए केंद्र, राज्य सरकारों, और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

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