Home Society प्रेमानंद महाराज ने बताया नवरात्रि व्रत का असली महत्व

प्रेमानंद महाराज ने बताया नवरात्रि व्रत का असली महत्व

Shardiya Navratri हिन्दू धर्म का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है, जिन्हें तपस्या और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। हर दिन एक विशेष बीज मंत्र का उच्चारण किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां दुर्गा भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी करती हैं। इसी दौरान कई लोग पूरे नौ दिन का Navratri Vrat रखते हैं, तो कुछ लोग केवल अष्टमी के दिन उपवास करते हैं।

प्रेमानंद महाराज का प्रवचन

अपने हालिया प्रवचन में Premanand Maharaj ने व्रत के सही अर्थ को समझाया। उनका कहना है कि Navratri fasting केवल भोजन पर नियंत्रण तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली व्रत वह है जिसमें इंसान अपने विचारों और कर्मों को भी शुद्ध करे। महाराज ने कहा कि केवल फल खाने या भोजन पर नियंत्रण करने से व्रत का उद्देश्य पूरा नहीं होता। मन की शुद्धि और भक्ति का भाव ही व्रत को सफल बनाता है।

नवरात्रि व्रत में करने योग्य पाँच कार्य

प्रेमानंद महाराज ने प्रवचन में पाँच महत्वपूर्ण कार्य बताए जिन्हें Navratri Vrat के दौरान करना चाहिए। ये केवल आहार से जुड़े नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली और आचरण से जुड़े हैं।

  • पहला, सही और धर्मसम्मत कर्म करें।

  • दूसरा, नकारात्मकता से पूरी तरह दूर रहें।

  • तीसरा, भगवान का नाम जपें और मंत्रों का उच्चारण करें।

  • चौथा, भजन और कीर्तन में शामिल हों।

  • पाँचवाँ, Positive Thoughts अपनाएँ और दूसरों के लिए शुभ सोचें।

महाराज का कहना है कि अगर इन पाँच बातों का पालन किया जाए तो Navratri fasting का असली फल मिलता है।

भोजन से आगे बढ़कर व्रत का असली संदेश

महाराज ने कहा कि व्रत का मतलब केवल फलाहार करना या पकवान खाना नहीं है। आजकल कई लोग उपवास के नाम पर तरह-तरह के व्यंजन बना लेते हैं, जबकि व्रत का उद्देश्य सादगी और भक्ति है। असली Navratri Vrat तभी सफल माना जाएगा जब व्यक्ति केवल फल और भगवान का प्रसाद ग्रहण करे और मन से पूर्ण भक्ति करे। उन्होंने कहा कि उपवास का मकसद स्वाद लेना नहीं बल्कि संयम और अनुशासन का पालन करना है।

आत्मशुद्धि का पर्व

Premanand Maharaj ने समझाया कि Shardiya Navratri को केवल एक परंपरा की तरह न निभाएँ। यह पर्व आत्मशक्ति और भक्ति का उत्सव है। इन दिनों हर भक्त को अपने भीतर झांकना चाहिए और गुस्सा, लालच, ईर्ष्या जैसी बुराइयों से खुद को मुक्त करना चाहिए। व्रत का असली अर्थ मन और आत्मा की शुद्धि है।

अनुशासन और भक्ति का मेल

महाराज का मानना है कि अनुशासन के बिना भक्ति अधूरी है। Navratri fasting तभी सार्थक होता है जब भक्त सच्चाई और ईमानदारी से नियमों का पालन करे। नियमित प्रार्थना, ध्यान और संयम से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। महाराज ने कहा कि छोटे-छोटे सद्कार्य जैसे किसी की मदद करना या मीठा बोलना भी व्रत का हिस्सा है।

बीज मंत्र और दैनिक पूजा

नवरात्रि के दौरान हर दिन मां दुर्गा के एक अलग स्वरूप की पूजा होती है। हर दिन का अलग Beej Mantra होता है। महाराज ने बताया कि इन मंत्रों का उच्चारण पूर्ण श्रद्धा से करना चाहिए। भक्ति के साथ किए गए जाप से ही मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि उपवास का वास्तविक फल तभी मिलता है जब पूजा, ध्यान और मंत्रों के साथ जोड़ा जाए।

नकारात्मकता से दूरी

प्रवचन में महाराज ने विशेष रूप से नकारात्मकता से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गुस्सा, चुगली या कटु वचन उपवास की शक्ति को कम कर देते हैं। भक्तों को धैर्य, शांति और क्षमा का भाव रखना चाहिए। इस तरह व्यक्ति खुद को दिव्य ऊर्जा से जोड़ पाता है।

भजन और कीर्तन का महत्व

नवरात्रि के दौरान भजन और कीर्तन का विशेष महत्व है। महाराज ने कहा कि यह भक्त और देवी के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत करता है। परिवार और समुदाय के लोग शाम को भजन-कीर्तन करें तो घर और समाज में सकारात्मक माहौल बनता है। संगीत और भक्ति का मेल आत्मा को पवित्र करता है।

सकारात्मक विचारों की शक्ति

Premanand Maharaj ने कहा कि व्रत के दौरान Positive Thoughts रखना बेहद ज़रूरी है। दूसरों के लिए शुभ सोचना और आत्मा को पवित्र बनाए रखना व्रत का सबसे बड़ा फल है। उन्होंने बताया कि जब विचार सकारात्मक होते हैं तो जीवन की दिशा भी सकारात्मक होती है।

आधुनिक समय में व्रत की गलतियाँ

महाराज ने यह भी बताया कि आधुनिक समय में लोग व्रत को गलत तरह से समझ रहे हैं। उपवास के नाम पर स्वादिष्ट पकवान खाना व्रत नहीं है। व्रत में सादगी और त्याग होना चाहिए। केवल सरल भोजन और प्रसाद ही उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि उपवास कभी भी भोजन का उत्सव नहीं होना चाहिए।

आत्मबल और संयम का पर्व

Shardiya Navratri को देवी शक्ति का पर्व कहा जाता है। महाराज ने कहा कि यह पर्व आत्मबल और संयम का भी प्रतीक है। उपवास से धैर्य और आत्मसंयम की शक्ति बढ़ती है। यह केवल नौ दिनों का अभ्यास नहीं बल्कि जीवनभर अनुशासन की प्रेरणा है।

प्रेमानंद महाराज के प्रवचन ने स्पष्ट किया कि Navratri Vrat का असली अर्थ भोजन पर नियंत्रण से आगे है। यह आत्मशुद्धि, Positive Thoughts और ईमानदार भक्ति का प्रतीक है। Shardiya Navratri हर भक्त को आत्मबल और आत्मसंयम सिखाती है। मां दुर्गा तभी प्रसन्न होती हैं जब भक्ति सच्ची हो और जीवन आचरण पवित्र हो।

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