Home Society मीनापुर के किसानों का बकाया है 37.4 लाख रुपये का कृषि अनुदान

मीनापुर के किसानों का बकाया है 37.4 लाख रुपये का कृषि अनुदान

तीन महीने से भुगतान की आश में भटक रहें हैं किसान

कौशलेन्द्र झा
एक ओर जहां बाढ़ से कराह रहे मीनापुर के किसान बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग कर रहें हैं। तो दूसरी ओर विभिन्न सरकारी योनाओं के तहत 2,742 किसानों को मिलने वाला 37,46,515 लाख रुपये का अनुदान प्रशासनिक लापरवाही के कारण पिछले तीन महीने से लटका हुआ है।
विदित हो कि जुलाई महीने में प्रखंड कृषि पदाधिकारी महेन्द्र साह का स्थानांतरण होने के बाद 8 अगस्त को बोचहां के बीएओ अरुण कुमार ने योगदान तो किया। लेकिन इसके बाद मीनापुर नहीं आये। बीएओ को वित्तीय प्रभार नहीं मिलने के कारण किसानो को अनुदान का भुगतान नहीं हो सका है। यहां यह बताना भी जरुरी है कि किसानों को अभी तक डीजल अनुदान की राशि का भी भुगतान होना बाकी है। इसके लिए रुपये बैंक में पड़ा हुआ है।
प्रखंड कृषि कार्यालय में अधिकारी के नहीं होने का खामियाजा भुगत रहे किसानों को अब बाढ़ से हुई फसल की तबाही भी झेलना पड़ रहा है। आलम ये है कि यहां बाढ़ से हुई तबाही का आकलन करने वाला भी कोई नहीं है। जिला कृषि पदाधिकारी कृष्ण कुमार वर्मा स्वयं मानतें हैं कि मीनापुर में मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले बोचहां के बीएओ से जवाब तलब भी किया गया है। अब देखना ये है कि मीनापुर के किसानो को कब तक उसका बकाया भुगतान मिल पाता है।
बकाया अनुदान
272 किसानों के बीच मूंग के बीज का 2,22,729 रुपये
– 1,296 किसानों शंकर धान के बीज का 9,19,500 रुपये
– मुख्यमंत्री मंत्री तीव्र बीज विस्तार का 2,77,020 रुपये
– मिनी कीट के 108 विक्वंटल घान के बीज का 2,93,760 रुपये
– 46 किसानों के जीरो टीलेज खरीद का 1,23,280 रुपये
– सुगंधित धान का बीज लेने वाले 58 किसानों का 1,55,440 रुपये
– श्री विधि के तहत 378 किसानों का 10,13,040 रुपये
– पैडी ट्रांसप्लांटर लेने वाले 96 किसानों का 2,57,280 रुपये

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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