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पाकिस्तान के आम चुनाव में छिपा है खास संदेश

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पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव इस बार कई मायनों में अलग होने जा रहा है। अव्वल तो ये कि पिछले 30 साल में यह पहला आम चुनाव है जब देश की दो सबसे पुरानी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग की लीडरशिप बदल जायेगी। वैसे इस बार के चुनाव में इन दोनों पार्टियों को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जबरदस्त चुनौती मिल रही है। बतातें चलें कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी, पाक क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इमरान खान की पार्टी है।

तहरीक-ए-इंसाफ है बहुमत के करीब
चुनाव पूर्व किये गये एक सर्वे की माने तो तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी को बहुमत मिलने की संभवना बेहद प्रबल मानी जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी के संस्थापक और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान का पाकिस्तान में अगला प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है। हालांकि, पाक में एक कहावत है कि वहां आएएसआई के मर्जी के बिना कुछ नहीं होता। दरअसल, आईएसआई पाक की एक शक्तिशाली खुफिया एजेंसी है और कहा तो यह भी जा रहा है कि आईएसआई के दबाव में आकर ही पाकिस्तान की अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर घोटाले के आरोप में सजा सुनाई और चुनाव के बीच में लंदन से लौटने के शीघ्र बाद ही बीती रात सेना ने उन्हें उनकी पुत्री सहित गिरफ्तार कर लिया।
चुनाव में आईएसआई की भूमिका
बतातें चलें कि नवाज शरीफ और उनकी मुस्लिम लीग आईएसआई को फूटी आंखों नहीं सुहाते है। पाक मीडिया से आ रही रिपोर्ट इस ओर इशारा करता है कि आईएसआई की पहली पसंद कट्टवादी नेता हाफिज सईद है। किंतु, रुझानो में हाफिज सईद के बहुत पीछे छूट जाने का लाभ इमरान खान को मिल सकता है। बहरहाल, पाकिस्तान के लोग इमरान खान को अपना मुहाफिज यानी उद्धारक मानने लगे है।
इमरान ने खेला कट्टरवाद का कार्ड
इस बीच इमरान खान ने चुनाव में धर्म को अपना सबसे बड़ा हथियार बना कर उसे पेश कर दिया है। इमरान लगातार अपने चुनावी सभा में मुल्क की आवाम को यह विश्वास दिला रहे हैं कि इस्लामिक तौर-तरीकों से ही पाकिस्तान का भला हो सकता है। ऐसा करके इमरान ने एक साथ दो निशाना साधा है। एक और इससे पाकिस्तान के कट्टरपंथी बड़ी संख्या में तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़ने लगे है। दूसरी ओर सेना और पाक नौकरशाहों के भी वे पसंद बनने लगें हैं। वहीं आईएसआई को भी इस नए एजेंडे से खुश करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इसका परिणाम तो 25 जुलाई को ही पता चलेगा।
नवाज की गिरफ्तारी से बदल सकती है फिंजा
कहा तो यह भी जा रहा है कि नवाज शरीफ को आनन फानन में सजा सुना कर गिरफ्तार करने के पीछे इमरान खान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाना ही सबसे बड़ा कारण है और यदि यह सही है तो इसका मतलब साफ है कि आईएसआई का समर्थन भी इमरान को मिल चुका है। हालांकि, लंदन में पत्नी का इलाज करा रहे नवाज शरीफ सजा होने के बाद इतनी जल्दी लंदन से पाकिस्तान क्यों चलें आए? इसको लेकर भी कयास लगने शुरू हो गए है। नवाज शरीफ जानते थे कि पाकिस्तान पहुंचते ही उनका गिरफ्तार होना तय है। बावजूद इसके वह आये। यानी आम चुनाव के बीच में अपनी गिरफ्तारी देकर वह आवाम का सहानुभूति बटोरना चाहतें है। यदि, इसमें वे वाकई सफल हुए तो आईएसआई को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।
ऐसे बदल सकता है समीकरण
दरअसल भ्रष्टाचार की कमाई से लंदन में आलीशान फ्लैट खरीदने के मामले में पाकिस्तान की अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने 6 जुलाई को नवाज शरीफ को 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। वहीं इस मामले में नवाज की बेटी मरियम को 7 साल और दामाद कैप्टन सफदर को 1 साल की सजा सुनाई गई थी और इसी मामले 13 जुलाई को नवाज शरीफ ने अपनी गिरफ्तारी दी है। माहौल को समझने की कोशिश करें तो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके को इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ का गढ़ माना जाता है। वहीं, पंजाब के कुछ हिस्सों में भी तहरीक-ए-इंसाफ ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। हालांकि पंजाब में अभी भी नवाज शरीफ की पार्टी सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में है और नवाज की गिरफ्तारी से इस इलाके में उनके सहानुभूति का वोट बढ़ने का भी कयास लगने शुरू हो गए हैं।

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