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विपक्ष का Protest March ECI से पहले ही रोका गया, राहुल-प्रियंका समेत कई नेता हिरासत में

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दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA Alliance का protest march चुनाव आयोग (ECI) पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। यह मार्च चुनाव में कथित गड़बड़ी, SIR में अनियमितताओं और vote theft के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया था। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 25 दलों के सांसद संसद भवन से पैदल निकलकर चुनाव आयोग तक जाने वाले थे।

पुलिस की सख्त सुरक्षा और सात बैरिकेड

मार्च के रास्ते में दिल्ली पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की और सात स्थानों पर बैरिकेड लगाए। योजना के मुताबिक सांसदों को करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर चुनाव आयोग तक पहुंचना था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया। सांसद नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे और “चोर-चोर” के नारे लगा रहे थे।

प्रियंका गांधी का बयान, सरकार पर हमला

प्रियंका गांधी ने मौके पर कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार कायर है और विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को रोकना चाहती है और चुनावी अनियमितताओं पर जवाब देने से बच रही है।

अखिलेश यादव ने बैरिकेड कूदकर दी चुनौती

मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को बैरिकेड कूदते हुए देखा गया। उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव, कांग्रेस नेता शशि थरूर, जयराम रमेश, शिवसेना नेता संजय राउत, DMK, TMC और अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे। सभी को बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया और पास के थानों में ले जाया गया।

पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन

राहुल गांधी द्वारा हाल में लगाए गए vote theft के आरोपों के बाद यह विपक्ष का पहला बड़ा सड़क प्रदर्शन था। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े पेश करते हुए दावा किया था कि मतदाता सूची में हेरफेर कर 1,00,250 वोट हटाए गए और यह मॉडल भाजपा के लाभ के लिए लागू किया गया।

ECI की चिट्ठी और बैठक का प्रस्ताव

चुनाव आयोग सचिवालय ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश को चिट्ठी लिखकर उसी दिन दोपहर 12 बजे बैठक का समय दिया। इसमें कहा गया कि जगह और पार्किंग की कमी के कारण अधिकतम 30 लोग ही शामिल हो सकते हैं। यह प्रस्ताव मार्च से ठीक पहले आया, जिससे इस समय-निर्धारण पर सवाल उठे।

अनुमति न मिलने पर विवाद

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च की कोई अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए इसे रोका गया। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस केंद्र सरकार के दबाव में यह कार्रवाई कर रही है।

विपक्ष की मांग और आरोप

INDIA Alliance का आरोप है कि भाजपा मतदाता सूची में हेरफेर और SIR सिस्टम के दुरुपयोग से चुनावी नतीजे प्रभावित कर रही है। राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए महादेवपुरा के आंकड़े को विपक्ष “स्पष्ट सबूत” मान रहा है और चुनाव आयोग से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है।

आगे की रणनीति

हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे संसद और सार्वजनिक सभाओं में इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। अगर चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की तो देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन की योजना भी बनाई जा सकती है।

नतीजा: चुनावी पारदर्शिता पर टकराव

दिल्ली की यह घटना विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच चुनावी पारदर्शिता को लेकर बढ़ते टकराव की निशानी है। आरोप, गिरफ्तारियां और सड़क पर उतरते नेता आने वाले चुनावी माहौल को और गरमा सकते हैं।

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