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बिहार में एनडीए नेताओं के लिए खुलेंगे सत्ता के द्वार

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लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद विधायक और विधान पार्षदों के लिए राज्य मंत्रिपरिषद के द्वार खुल गयें हैं। विधानसभा-विधान परिषद के रिक्त पदों पर उनके लिए मौके हैं। लम्बे समय से बोर्ड निगमों के अध्यक्ष, सदस्य के रिक्त पदों को भी भरने का एनडीए को मौका मिल गया है।

ये है मौजूदा हालात

गौर करने वाली बात ये है कि राज्य सरकार के तीन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, दिनेश चन्द्र यादव और पशुपति कुमार पारस लोकसभा का चुनाव जीत गये हैं। फिलहाल बिहार मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत 28 सदस्य हैं। इनमें से तीन के इस्तीफे के बाद यह संख्या 25 बच गई है। नियमों के मुताबिक मंत्रिपरिषद में कुल सदस्य संख्या 36 हो सकती हैं। इसके मुताबिक 11 की रिक्ति हो गयी है। कम से कम आधा दर्जन नये लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने की संभावना प्रवल हो गई है। पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद फिलहाल कोई महिला सदस्य मंत्रिमंडल में नहीं हैं। उम्मीद है कि विस्तार में इस बार महिला विधायक को मौका मिल सकता है। पशुपति कुमार पारस के इस्तीफे के बाद लोजपा कोटे से मंत्रिपरिषद में अब कोई नहीं बचेगा।

लोकसभा चुनाव में 12 में से 4 विधायक जीते

इस लोकसभा चुनाव में जदयू के चार, राजद के पांच, कांग्रेस के दो और हम के इकलौते विधायक जीतन राम मांझी लोकसभा के रण में उतरे थे। इन 12 विधायकों में आठ चुनाव हार गये है। लेकिन जदयू के चारों विधायक दिनेशचन्द्र यादव (सिमरी बख्तियारपुर), अजय मंडल (नाथनगर ), गिरधारी यादव ( बांका), जबकि दरौंदा की विधायक कविता सिंह के संसद पहुंच जाने से इन चारों सीट पर उपचुनाव तय हो गया है। इस बीच जदयू के चार नये नेताओं को विधानसभा पहुंचने का भी मौका मिल सकता है। वहीं कांग्रेस के किशनगंज विधायक मो. जावेद के यहीं से सांसद बन जाने से यहां विधानसभा उपचुनाव में एक नए नेता को मौका मिलेगा।

विप में भी दो सीटों पर अवसर

विधान पार्षद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह (जदयू) और पशुपति पारस (लोजपा) के लोकसभा चुनाव जीतने पर विप की दो सीटों पर भी उपचुनाव होंगे। ललन सिंह का विप में कार्यकाल 6 मई 2020 तथा पशुपति पारस का 23 मई 2020 तक है। अभी विधान पार्षद की दो पदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया जारी है। माना जा रहा है कि इनमें एक जदयू और एक भाजपा नेता को मौका मिल सकता है।

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