Politics

भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में कोविंद ने लिया शपथ

देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता: राष्ट्रपति

नई दिल्ली। देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में राम नाथ कोविंद ने मंगलवार को अपना पदभार संभालने के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है और यही विविधता हमें अद्वितीय बनाता है। कोविंद ने कहा कि भारत में हमें राज्यों, क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। कहा कि हम होते हुए भी एक हैं।
नए राष्ट्रपति कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है। कहा कि 21वीं सदी का भारत, ऐसा भारत होगा जो हमारे पुरातन मूल्यों के अनुरूप होने के साथ ही साथ चौथी औद्योगिक क्रांति को विस्तार देगा। उन्होंने कहा कि हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना है।
कोविंद ने कहा कि एक तरफ जहां ग्राम पंचायत पर सामुदायिक विचार विमर्श करके समस्याओं का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर डिजिटल राष्ट्र हमें विकास की नई उंचाइयों पर पहुंचाने में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निमार्ण का आधार राष्ट्रीय गौरव होता है। हमें गर्व है भारत की मिट्टी और पानी पर, हमें गर्व है भारत की विविधता और समग्रता पर, हमें गर्व है भारत की संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म पर, हमें गर्व है देश के प्रत्येक नागरिक पर, हमें गर्व है अपने कर्तव्यों के निर्वहन पर और हमें गर्व है हर छोटे से छोटे काम पर, जो हम प्रतिदिन करते हैं।
कोविंद ने कहा, मैं इस महान राष्ट्र के 125 करोड़ नागरिकों को नमन करता हूं और उन्होंने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का मैं वचन देता हूं। मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से प्रणब दा कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूं।
उन्होंने कहा, हमारी स्वतंत्रता, महात्मा गांधी के नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों का परिणाम थी। बाद में, सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया। हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने का काम किया। वे इस बात से संतुष्ट नहीं थे कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही काफी है। उनके लिए, हमारे करोड़ों लोगों की आथर्कि और सामाजिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को पाना भी बहुत महत्त्वपूर्ण था।
उन्होंने कहा, ‘अब स्वतंत्रता मिले 70 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। हम 21वीं सदी के दूसरे दशक में हैं, वो सदी, जिसके बारे में हम सभी को भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी, भारत की उपलब्धियां ही इस सदी की दिशा और स्वरूप तय करेंगी। हमें एक ऐसे भारत का निमार्ण करना है जो आथर्कि नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे। हमारे लिए ये दोनों मापदंड कभी अलग नहीं हो सकते। ये दोनों जुड़े हुए हैं और इन्हें हमेशा जुड़े ही रहना होगा।

This post was published on जुलाई 25, 2017 16:07

KKN लाइव टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

Show comments
Published by
KKN न्‍यूज ब्यूरो

Recent Posts

  • Videos

स्वामी विवेकानन्द का नाइन इलेवन से क्या है रिश्ता

ग्यारह सितम्बर... जिसको आधुनिक भाषा में  नाइन इलेवन कहा जाता है। इस शब्द को सुनते… Read More

जुलाई 3, 2022
  • Videos

एक योद्धा जो भारत के लिए लड़ा और भारत के खिलाफ भी

एक सिपाही, जो गुलाम भारत में अंग्रेजों के लिए लड़ा। आजाद भारत में भारत के… Read More

जून 19, 2022
  • Bihar

सेना के अग्निपथ योजना को लेकर क्यों मचा है बवाल

विरोध के लिए संपत्ति को जलाना उचित है KKN न्यूज ब्यूरो। भारत सरकार के अग्निपथ… Read More

जून 18, 2022
  • Videos

कुदरत की रोचक और हैरान करने वाली जानकारी

प्रकृति में इतनी रोमांचक और हैरान कर देने वाली चीजें मौजूद हैं कि उन्हें देख… Read More

जून 15, 2022
  • Society

भाषा की समृद्धि से होता है सभ्यता का निर्माण

भाषा...एक विज्ञान है। यह अत्यंत ही रोचक है। दुनिया में जितनी भी भाषाएं हैं। सभी… Read More

जून 7, 2022
  • Videos

सात राज्यों में माननीय के वेतन का इनकम टैक्स भी सरकारी खजाने से क्यों

आजादी के बाद भारत की राजनीति गरीब और गरीबी के इर्द- गिर्द घूमती रही है।… Read More

जून 5, 2022