बुधवार, अप्रैल 15, 2026 7:16 अपराह्न IST
होमNationalसुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता पर...

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता पर दायर याचिकाओं की सुनवाई टाली

Published on

KKN गुरुग्राम डेस्क |  आज सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई को टाल दिया। इस कानून के तहत, मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति के चयन पैनल से हटा दिया गया है।

यह मामला जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच के समक्ष था। याचिकाकर्ता और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुबह सत्र के दौरान मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। भूषण ने कहा कि यह मामला भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि, बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए दूसरे मामलों की सुनवाई करने के बाद तारीख तय की।

सुनवाई को लेकर तकरार

मामले की सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जो सरकार की ओर से पेश हो रहे थे, उन्होंने मामले की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया, क्योंकि वह पहले से ही CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में व्यस्त थे। इस पर प्रशांत भूषण ने आपत्ति जताई और कहा कि केंद्र सरकार के पास 17 कानून अधिकारी हैं, और किसी भी मामले को सिर्फ इसलिए नहीं टाला जा सकता क्योंकि सॉलिसिटर जनरल किसी अन्य कोर्ट में व्यस्त हैं।

भूषण का यह बयान मेहता को अप्रसन्न कर गया, और उन्होंने कहा, “आइए हम इस स्तर तक न गिरें।” इस पर बेंच ने मेहता से कहा कि यदि वह संविधान पीठ से मुक्त नहीं हो पाते तो उनके अनुरोध पर विचार किया जाएगा। इसके बाद, बेंच ने अन्य मामलों की सुनवाई जारी रखी, और मामले को बाद में फिर से सूचीबद्ध किया।

मामला कई बार सूचीबद्ध, लेकिन सुनवाई नहीं हुई

हालांकि याचिका को दिनभर में दो बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन उसे सुनवाई के लिए नहीं लिया गया। जब एक वकील ने तर्क दिया कि इस याचिका की सुनवाई भारत के लोकतंत्र की सर्वाइवल के लिए जरूरी है, और कार्यपालिका द्वारा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से 140 करोड़ लोगों पर असर पड़ रहा है, तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “सभी मामले महत्वपूर्ण होते हैं, हम नहीं सोचते कि कोई मामला [अन्य मामलों से] महत्वपूर्ण है।”

सुनवाई के दौरान, जस्टिस कांत ने प्रशांत भूषण से कहा कि वह 19 मार्च 2024 को एक मौका ले सकते हैं (यह तारीख अस्थायी है, और इसे आदेश जारी होने के बाद पुष्टि किया जाएगा)।

चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 का महत्व

चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 को दिसंबर 2023 में संसद द्वारा पास किया गया था। इस अधिनियम के तहत, मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से हटा दिया गया है। पहले, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता मिलकर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते थे, ताकि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके।

अब इस नए अधिनियम के तहत, चुनाव आयुक्तों का चयन एक समिति द्वारा किया जाएगा जिसमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता होंगे। यह कानून विवादों का कारण बन गया है, क्योंकि आलोचकों का मानना है कि इससे चुनाव आयोग पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ सकता है, जो चुनावों की स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है।

इस अधिनियम को चुनौती देने वाले कानूनी मामले

इस अधिनियम को संसद द्वारा पास किए जाने के बाद कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं। इनमें प्रमुख कांग्रेस नेता जया ठाकुर और लोकतांत्रिक सुधारों के संघ (ADR) जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इनका कहना है कि यह अधिनियम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा और चुनावों में निष्पक्षता को खतरे में डाल सकता है।

मार्च 2024 में, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना (जो वर्तमान में CJI हैं) और जस्टिस दीपंकर दत्ता शामिल थे, ने चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम के कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बेंच ने टिप्पणी की थी कि मामले में दो पहलू हैं – एक तो यह कि क्या यह अधिनियम संविधान के अनुरूप है, और दूसरा यह कि चयन प्रक्रिया में कोई खामी तो नहीं है।

नए कानून के प्रभाव

इस नए कानून के तहत, मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पैनल से हटा दिया गया है, जो पहले इस प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा थे। इसका उद्देश्य था चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखना, ताकि चुनावों में कोई पक्षपाती प्रभाव न हो।

अब इस नए कानून के तहत, प्रधानमंत्रीकेंद्रीय मंत्री, और विपक्ष के नेता मिलकर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करेंगे। इस बदलाव को लेकर चिंता जताई जा रही है कि कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ सकता है, और यह चुनाव आयोग को न्यायपालिका से स्वतंत्र नहीं बना सकता। चुनाव आयोग की निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए इसे पूरी तरह से स्वतंत्र रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आगामी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में यह तय करेगा कि चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 संविधान के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि इस नए कानून में कार्यपालिका का बढ़ता प्रभाव चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है या नहीं।

आने वाले दिनों में, यह मामला भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना देश की चुनावी प्रक्रिया के लिए बहुत जरूरी है। यदि कोर्ट इस नए कानून को असंवैधानिक मानता है, तो इससे चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है।

क्यों है यह मामला महत्वपूर्ण?

चुनाव आयोग भारत की चुनावी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, और इसकी स्वतंत्रता को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से हटा दिया जाता है, तो इससे चुनाव आयोग पर कार्यपालिका का अधिक प्रभाव हो सकता है, जो कि लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

इसलिए यह मामला न केवल चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए बल्कि पूरे भारतीय लोकतंत्र के लिए भी अहम है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस कानून को असंवैधानिक मानता है, तो यह भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

आज सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के चयन अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता पर दायर याचिकाओं की सुनवाई टाल दी। अब यह मामला 19 मार्च 2024 को फिर से सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा। इसके साथ ही, यह मामला भारतीय लोकतंत्र में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और कार्यपालिका के प्रभाव के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण हो सकता है। आने वाले दिनों में यह फैसला भारतीय चुनावों की निष्पक्षता के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

बंगाल 2026: असली लड़ाई वोट की नहीं, सिस्टम की है

पश्चिम बंगाल की राजनीति अब सिर्फ चुनाव नहीं रह गई है… यह लड़ाई बन...

नीतीश युग का अंत या नई शुरुआत? सम्राट चौधरी के हाथों में बिहार की सत्ता का नया समीकरण

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है…...

क्या टीपू सुल्तान हीरो थे या विवादित शासक?

क्या आप जानते हैं कि 18वीं सदी में भारत के एक राजा ने रॉकेट...

क्या 2035 तक पानी के लिए जंग शुरू हो जाएगी?

भारत में दुनिया की करीब 18% आबादी रहती है… लेकिन मीठे पानी का स्रोत...

More like this

नीतीश युग का अंत या नई शुरुआत? सम्राट चौधरी के हाथों में बिहार की सत्ता का नया समीकरण

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है…...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

क्या नीतीश कुमार का दौर खत्म होने वाला है और क्या बीजेपी लिख रही है नई सत्ता की पटकथा?

पटना की राजनीति में अचानक क्यों तेज हुई फुसफुसाहट? KKN ब्यूरो। क्या बिहार में फिर...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...
00:10:10

क्या चीन-बांग्लादेश की साज़िश से घिर गया भारत? सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर क्यों मंडराया खतरा

भारत का सबसे संवेदनशील इलाका — सिलिगुड़ी कॉरीडोर, जिसे दुनिया चिकेन नेक के नाम...

Pariksha Pe Charcha 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से की सीधी बातचीत

Pariksha Pe Charcha 2026 का आगाज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

Budget 2026 : महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा बजट, She Mart और लखपति दीदी को नई रफ्तार

केंद्रीय बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर...

Union Budget 2026–27: बजट के बाद क्या सस्ता हुआ, क्या हुआ महंगा

देश की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने रविवार को लोकसभा में वर्ष 2026–27 का...

Tatkal Ticket New Rules 2026 : तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

 Indian Railways ने Tatkal Ticket Booking प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के...

अजित पवार का अंतिम संस्कार : राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, शोक में डूबा महाराष्ट्र

महाराष्ट्र की राजनीति ने गुरुवार को एक बड़े और अपूरणीय नेता को खो दिया।...

बारामती विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन, महाराष्ट्र में शोक की लहर

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया।...

अजीत पवार विमान दुर्घटना : बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान हादसा, हालात की जांच जारी

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar को ले जा रहा विमान बुधवार को बारामती में...

UGC के नए नियम 2026 पर देशभर में बहस, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी अनिवार्य

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई...