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पाकिस्तानी गोलीबारी में बिहार का भारतीय जवान शहीद: जवान राम बाबू की शहादत से दहल उठा सीवान

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KKN गुरुग्राम डेस्क | भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बिहार के सीवान जिले का एक और जवान देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। शहीद जवान की पहचान रामबाबू, निवासी वसिलपुर, गौतम बुद्ध नगर थाना क्षेत्र, के रूप में हुई है। वे जम्मू-कश्मीर सीमा पर तैनात थे, जहां पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी में उन्हें गंभीर चोटें आईं, और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

उनकी शहादत की खबर सोमवार को उनके गांव पहुंची, जिसके बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

 तीन महीने पहले ही हुई थी शादी, अब तिरंगे में लिपटा शरीर लौटेगा

सबसे दर्दनाक बात यह है कि शहीद रामबाबू की शादी फरवरी 2025 में ही हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही वह अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे। अब मात्र तीन महीनों बाद, उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ उनके गांव लौटेगा।

परिजनों के अनुसार, रामबाबू की पत्नी पूरी तरह टूट चुकी हैं, लेकिन पति की बहादुरी और देशभक्ति पर गर्व भी है। वह मीडिया से बात करने की स्थिति में नहीं थीं।

 ऑपरेशन सिंदूर में दी शहादत

रामबाबू की यह शहादत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत मानी जा रही है, जो भारतीय सेना द्वारा चलाया जा रहा एक प्रमुख अभियान है। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना की ओर से हो रही गोलीबारी और घुसपैठ को रोकने के लिए भारतीय सैनिकों को चौकसी बढ़ानी पड़ी, जिसमें कई जवान शहीद हुए।

इससे पहले सारण जिले के मोहम्मद इम्तियाज भी इसी ऑपरेशन में शहीद हो चुके हैं। सोमवार को उन्हें उनके पैतृक गांव नारायणपुर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

 वसिलपुर गांव में मातम, लेकिन गर्व भी

गांव के लोग रामबाबू को बचपन से ही देशभक्त मानते थे। उनके पिता रामविचार सिंह का पहले ही निधन हो चुका था। रामबाबू ने गरीबी और कठिनाइयों के बीच देश सेवा का सपना देखा और उसे पूरा किया। वह भारतीय सेना में शामिल होकर गांव और परिवार का गौरव बने।

गांव में हर कोई उनके निधन से आहत है, लेकिन उनकी शहादत पर सभी को गर्व भी है। लोग घर-घर तिरंगा लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे हैं।

 बुधवार को होगा अंतिम संस्कार, पूरे राजकीय सम्मान के साथ

सेना सूत्रों और जिला प्रशासन के अनुसार, शहीद रामबाबू का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर तक सीवान पहुंचेगा। इसके बाद उनके गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। सेना के अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि अंत्येष्टि में शामिल होंगे।

सेना की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर, बंदूक की सलामी और राष्ट्रध्वज से लिपटे ताबूत के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

 परिजनों और ससुराल वालों की प्रतिक्रिया

शहीद के ससुर ने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“तीन महीने पहले ही बेटी की शादी की थी, आज शहीद का शव आने वाला है। दुख भी है, लेकिन दामाद की बहादुरी पर गर्व भी है। वह हमेशा देश के लिए जीते थे और देश के लिए ही शहीद हुए।”

 गांववालों की प्रतिक्रिया

रामबाबू के बचपन के दोस्त बताते हैं:

“उसे बचपन से ही फौज में जाने का जुनून था। वो सुबह 5 बजे उठकर दौड़ लगाता था, कहता था कि ‘देश की सेवा करनी है।’ आज वो सच में अमर हो गया है।”

एक स्कूल शिक्षक ने कहा:

“रामबाबू पढ़ाई में औसत था लेकिन अनुशासन में सर्वोपरि था। वह एक सच्चा देशभक्त था। हमारे गांव के बच्चों को उससे प्रेरणा मिलेगी।”

 भारत-पाक सीमा पर 2025 में बढ़ता तनाव

2025 की शुरुआत से ही भारत-पाक सीमा पर संघर्ष तेज हुआ है। पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर उल्लंघन और घुसपैठ की कोशिशें की जा रही हैं। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई के तहत कई ऑपरेशनों की शुरुआत की, जिनमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी प्रमुख है।

सेना के सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ की साजिशें अप्रैल के बाद से तेज हो गई हैं, और भारतीय सेना ने सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया है।

सरकार से मुआवज़ा और सहायता की उम्मीद

बिहार सरकार की ओर से शहीदों के परिवारों को मुआवज़ा देने की नीति है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में शहीद इम्तियाज के परिवार को ₹50 लाख की सहायता की घोषणा कर चुके हैं। उम्मीद है कि शहीद रामबाबू के परिजनों को भी इसी प्रकार की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी दी जाएगी।

 सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की लहर

सोशल मीडिया पर #ShaheedRambabu, #BiharBraveheart, और #OperationSindoor जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग भावनात्मक पोस्ट, कविताएं और चित्रों के माध्यम से शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

कई नेताओं और सेलिब्रिटीज़ ने भी ट्विटर पर श्रद्धांजलि अर्पित की और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शहीद रामबाबू सिर्फ वसिलपुर गांव के नहीं, पूरे देश के बेटे थे। उनकी शहादत ने देशवासियों को एक बार फिर याद दिलाया है कि हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए कोई हर दिन अपनी जान जोखिम में डालता है।

उनकी वीरता, प्रतिबद्धता और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। जब तक सूरज-चांद रहेगा, रामबाबू का नाम अमर रहेगा।

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