बुधवार, जून 3, 2026 1:19 पूर्वाह्न IST
होमKKN Specialजीवन के लिए जरुरी है जैविक खेती

जीवन के लिए जरुरी है जैविक खेती

Published on

हरित क्रांति का साइड इफैक्ट, खतरे में स्वस्थ्य जीवन, अन्न का उत्पादन बढ़ा, उर्बरा शक्ति घटी

कौशलेन्द्र झा
भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा यहां का कृषि देश की अर्थ व्यवस्था का प्रमुख साधन भी है। भोजन, मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है, जो अन्न के बेहतर पैदावर पर निर्भर होता है। इसकी पूर्ति के लिए 60 के दशक में हरित क्रांति की शुरूआत हुई। अधिक अन्न उपजाओं का नारा दिया गया। नतीजा, रासायनिक उर्वरकों ओर कीटनाशकों का असन्तुलित उपयोग प्रारम्भ हो गया। इससे उत्पादन तो बढ़ा। किन्तु, उत्पादकता के सम्भावित खतरे को समझने में देरी हो गई। पिछले कुछ समय से रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशको के अंधाधूंध व असंतुलित प्रयोग का दुष्प्रभाव मनुष्य व पशुओं के स्वास्थ्य पर हुआ है। बल्कि, इसका कुप्रभाव पानी, भूमि एंव पर्यावरण पर भी दिखाई देने लगा है।

सरकार ने दिखाई गंभीरता

हालिया वर्षो में जैविक खेती की पध्दति व अन्य कृषि हितैषी जीवों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने को लेकर सरकार ने गंभीरता दिखानी शुरू कर दी है। जैविक खेती एक ऐसी पध्दति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों तथा खरपतवार नाशियों के स्थान पर जिवांश खाद पोषक तत्वों (गोबर की खाद कम्पोस्ट, हरी खाद, जिवाणु कल्चर, जैविक खाद) जैव नाशियों (बायो-पैस्टीसाईड) व वायो एजैन्ट जैसे क्राईसोपा आदि का उपयोग किया जाता है। इससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है। बल्कि, पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता तथा कृषि लागत घटने व उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ने से कृषक को अधिक लाभ भी मिलता है ।

फसल चक्र हो सकता है विकल्प

जैविक खेती के लिए किसानो को कार्वनिक खादों का उपयोग, जीवाणु खादो का प्रयोग, फसल अवशेषों का उचित उपयोग, जैविक तरीकों द्वारा कीट व रोग नियंत्रण विधि, फसल चक्र में दलहनी फसलों को अपनाना व मृदा संरक्षण क्रियाएं अपनाने पर जोर दिया जाने लगा है। कहतें हैं कि भारत में शताब्दियों से गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद व जैविक खाद का प्रयोग विभिन्न फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। जैविक खेती के लिए जैविक खादों का प्रयोग आज के दौर में और भी आवश्यक हो गया है। क्योंकि जैविक कृषि में रासायनिक खादों का प्रयोग करने की आवश्यकता नही होती है। ऐसी स्थिति में पौंधों को पोषक तत्व देने के लिए जैविक खादों, हरी खाद व फसल चक्र में जाना अब मौजूदा समय की मांग भी है।

जैविक खाद बनाने की विधि

जानकार बतातें हैं कि जैविक खाद बनाने के लिए पौधों के अवशेष, गोबर, जानवरों का बचा हुआ चारा आदि सभी बस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। जैविक खाद बनाने के लिए 10 फुट लम्बा, 4 फुट चौड़ा व 3 फुट गहरा गङ्ढा करना चाहिए। सारे जैविक पदार्थों को अच्दी तरह मिलाकर गङ्ढें को भरना चाहिए तथा उपयुक्त पानी डाल देना चाहिए। गङ्ढे में पदार्थों को 30 दिन के बाद अच्छी तरह पलटना चाहिए और उचित मात्रा में नमी रखनी चाहिए। यदि नमी कम है तो पलटते समय पानी डाला जा सकता है। पलटने की क्रिया से जैविक पदार्थ जल्दी सड़ते हैं और खाद में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। इस तरह यह खाद 3 महीने में बन कर तैयार हो जाती है।

नेत्रजन बढ़ाने का आसान तरीका

खेत में खाद डालकर शीघ्र ही मिट्टी में मिला देना चाहिए। ढेरियों को खेत में काफी समय छोड़ने से नेत्रजन की हानी होती है जिससे खाद की गुणवत्ता में कमी आती है। गोबर की खाद में नेत्रजन की मात्रा कम होती है और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने कुछ विधियां विकसित की हैं। जैविक खाद में फास्फोरस की मात्रा बढ़ाने के लिए रॉक फास्फेट का प्रयोग किया जा सकता है। 100 किलाग्राम गोबर में 2 किलोग्राम रॉक फास्फेट आरम्भ में अच्छी तरह मिलाकर सड़ने दिया जाता है। तीन महीने में इस खाद में फास्फोरस की मात्रा लगभग 3 प्रतिशत हो जाती है। इस विधि से फास्फोरस की घुलनशीलता बढ़ती है और विभिन्न फसलों में रासायनिक फास्फोरस युक्त खादों का प्रयोग नहीं करना पड़ता।

किसानो का मित्र कीट है केंचुआ

खाद बनाते समय केंचुओं का प्रयोग कर लिया जाए तो यह जल्दी बनकर तैयार हो जाता है और इस खाद में नेत्रजन की मात्रा अधिक होती है। खाद बनाते समय फास्फोटिका का एक पैकेट व एजोटोबैक्टर जीवाणु खाद का एक पैकेट एक टन खाद में डाल दिया जाए तो फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले जीवाणु व एजोटोबैक्टर जीवाणु पनपने लगता हैं। लिहाजा, खाद में नेत्रजन व फास्फोरस की मात्रा आधिक हो जाती है। इस जीवाणुयुक्त खाद के प्रयोग से पौधों का विकास अच्छा होता है। इस तरह वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करके अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाई जा सकती है जिसमें ज्यादा लाभकारी तत्व उपस्थित होते हैं।

मृदा शक्ति बढ़ने की संभावना

जैविक उर्बरक के प्रयोग से वेशक भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है। जैविक खाद किसानों के यहां उपलब्ध संसाधनों के प्रयोग से आसानी से बनाई तैयार किया जा सकता है। रासायनिक खादों का प्रयोग कम करके और जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करके हम अपने संसाधनों का सही उपयोग कर कृषि उपज में बढ़ोत्तारी कर सकते हैं और जमीन को खराब होने से बचाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार को चाहिए कि वे किसानो को इसके लिए अधिक से अधिक जागरुक करे और इस कार्य में किसानो को प्रयाप्त मदद भी करे।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

KKN ब्यूरो। भारत ने बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में...

More like this

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

“हाँ इश्क है” के लोकार्पण समारोह में जुटे कवि और साहित्य प्रेमी, पटना में दिखा साहित्य का रंग

पटना में रविवार को साहित्य, कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक यादगार आयोजन देखने...

बिहार की अर्थव्यवस्था: तेज़ रफ्तार विकास के पीछे छिपी गरीबी, पलायन और संभावनाएं

क्या बिहार सचमुच बदल रहा है? या आंकड़ों की चमक के पीछे अब भी...

क्या ट्रंप हार गए ईरान से? स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर संकट, चीन की एंट्री और भारत के लिए बड़ा खेल

KKN ब्यूरो। क्या सच में Donald Trump ईरान के सामने झुक गए? क्या अमेरिका...

क्या ईरान सिर्फ एक देश है या एक ऐसी रणनीति, जिसे हराना नामुमकिन है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है… कि दशकों से प्रतिबंध झेल रहा एक...

ट्रंप की दादागिरी का असली चेहरा अब दुनिया के सामने है

KKN ब्यूरो। क्या अमेरिका मिडिल ईस्ट में फंस चुका है? क्या ट्रंप की ‘दादागिरी’...

अफगानिस्तान का नूर खान एयरबेस पर हमला: पाकिस्तान को दिया गया एक रणनीतिक संदेश

KKN ब्यूरो। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो केवल...

क्या दुनिया एक और हिरोशिमा मोमेंट की ओर बढ़ रही है?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया को पता भी है कि मिडिल ईस्ट में चल रही...

ईरान पर अमेरिकी हमला या चीन को घेरने की रणनीति?

KKN ब्यूरो। क्या मिडिल ईस्ट में उठती हर जंग की आग के पीछे कोई...

मिडिल ईस्ट की जंग: क्या दुनिया की इंटरनेट नसों पर कब्ज़े की लड़ाई शुरू हो चुकी है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है कि मिडिल ईस्ट की हर जंग का...

मिडिल ईस्ट: महायुद्ध की दहलीज़ पर विभाजन और तड़पता हुआ क्षेत्र

KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान...

मिट्टी की खुशबू से मोबाइल की रिंगटोन तक: पांच दशक में बदलता ग्रामीण समाज

जब शाम ढलती थी और पूरा गांव एक आंगन में सिमट आता था KKN ब्यूरो।...

Everything Apple Sale में बड़ी छूट: iPhone 17 रुपये 45,000 से कम में उपलब्ध

रिटेल चेन Croma ने अपनी ‘Everything Apple Sale’ के तहत iPhone मॉडल्स पर भारी...

महिला रोजगार योजना बिहार : होली के बाद दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये जारी होंगे

Mahila Rojgar Yojana Bihar के तहत राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने की...