होमKKN Specialक्या ट्रंप हार गए ईरान से? स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर संकट, चीन...

क्या ट्रंप हार गए ईरान से? स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर संकट, चीन की एंट्री और भारत के लिए बड़ा खेल

Published on

KKN ब्यूरो। क्या सच में Donald Trump ईरान के सामने झुक गए? क्या अमेरिका की सुपरपावर वाली छवि अब दरक रही है या फिर यह सिर्फ एक रणनीतिक “रीसेट” है? इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें भावनाओं नहीं, बल्कि तथ्यों, रणनीति और भू-राजनीति के वास्तविक समीकरणों को समझना होगा।

क्या ट्रंप ईरान से हार गए

सबसे पहले एक स्पष्ट तथ्य—अमेरिका और Iran के बीच कोई औपचारिक युद्ध-बंदी घोषित नहीं हुआ है। लेकिन, ईरान ने अपने प्रॉक्सी नेटवर्क (Hezbollah, Houthis आदि) के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगातार चुनौती देकर सुपर वापर को बैक-फुट पर धकेल दिया है। अमेरिकी सैन्य ताकत के बावजूद, निर्णायक जीत नहीं मिली। कई बार अमेरिका को रिस्ट्रेन्ड प्रतिक्रिया देनी पड़ी। इसका मतलब यह सैन्य हार नहीं, बल्कि रणनीतिक गतिरोध (Strategic Stalemate) है। यानी, सुपरपावर होने के बावजूद अमेरिका हर जगह डॉमिनेट नहीं कर पाया।

क्या अमेरिका की सुपरपावर छवि खत्म हो रही है

अमेरिका अब भी दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत है। लेकिन, यूक्रेन युद्ध में रूस को रोकने में सीमित सफलता, मिडिल ईस्ट में लगातार अस्थिरता और चीन का उभार यह संकेत देता है कि दुनिया अब Unipolar (एकध्रुवीय) नहीं रही। बल्कि, Multipolar World की ओर बढ़ रही है।

स्ट्रेट ऑफ हार्मुज: दुनिया की सांसें यहां अटकी हैं

Strait of Hormuz दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई यहीं से होकर गुजरती है। ईरान बार-बार इसे बंद करने की धमकी देता रहा है। ईरान अभी भी स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर अपना दावा कर रहा है। इसका मतलब साफ है कि अमेरिका चाहे जितना ढ़िढ़ोरा पीट ले। लेकिन, सच ये है कि ईरान युद्ध में उसके सुपर पावर वाली छवि को डेंट लगी है। अगर यहां संकट बढ़ता है, तो तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जायेगी।

क्या मिडिल ईस्ट पर चीन का कब्जा हो जाएगा

China धीरे-धीरे लेकिन बेहद रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ रहा है! ईरान के साथ 25 साल का आर्थिक समझौता, सऊदी-ईरान शांति समझौते में मध्यस्थता और Belt and Road Initiative के जरिए निवेश में बढ़ोतरी करके चीन ने दुनिया को बहुत बड़ा संदेशा दे दिया है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि चीन सैन्य रूप से नहीं, आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव से दबदबा बढ़ा रहा है।

भारत के लिए फायदा या नुकसान

भारत इस पूरे संकट में खतरे और अवसर दोनों के बीच खड़ा है। अनुमान है कि युद्ध भले थम गया हो, लेकिन तेल की कीमत बढ़ने और इससे भारत में महंगाई बढ़ने की सम्भावना अभी भी बरकरार है। सप्लाई चेन बाधित होने का भी खतरा है और खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि, इस बीच भारत के लिए कुछ अच्छी खबर भी है। वह ये कि Chabahar Port के जरिए भारत की रणनीतिक पहुंच अभी भी बनी हुई है। मल्टी-अलाइनमेंट पॉलिसी (US + Iran + Russia सभी से भारत के अच्छे संबंध है और इससे भारत को सस्ते तेल खरीदने का मौका मिल सकता है। कुल मिला कर भारत संतुलन की राजनीति कर रहा है — यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

अब ट्रंप क्या करेंगे

डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकतें हैं। सीधे युद्ध से बचते हुए Maximum Pressure Policy अख्तियार कर सकतें हैं और इजराइल और खाड़ी देशों के साथ गठजोड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर सकतें है। हालांकि, अब यह अमेरिका के लिए बहुत आसान नहीं होने वाला है। ट्रंप की रणनीति हमेशा डील + दबाव का मिश्रण रही है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका की चुनौती बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट में उसका एकछत्र राज खत्म हो रहा है। चीन धीरे-धीरे जगह बना रहा है। भारत इस खेल में साइलेंट गेम चेंजर बन सकता है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

तिरहुत स्नातक में वंशीधर ब्रजवासी का दबदबा कायम, शिक्षक सीट पर नरेंद्र सिंह की वापसी

तिरहुत की दोनों एमएलसी सीटों पर बदला चुनावी इतिहास बिहार विधान परिषद के 2026 के...

मीठा बोलना कमजोरी नहीं, इंसानियत की ताकत है

कठोरता को अच्छाई बताने वालों को विज्ञान का जवाब एक बच्चा अपने घर में बड़ों...

दूसरों की कमियां खोजते-खोजते खुद क्यों खो जाता है इंसान?

विज्ञान ने खोली नकारात्मक सोच की परतें कभी-कभी एक इंसान सुबह उठता है और उसकी...

क्या शिक्षित समाज लोकतांत्रिक भागीदारी से दूर हो रहा है?

बिहार एमएलसी चुनाव: आंकड़ों ने खड़े किए गंभीर सवाल लेखक: मितेश झा जब समाज का शिक्षित...

More like this

मीठा बोलना कमजोरी नहीं, इंसानियत की ताकत है

कठोरता को अच्छाई बताने वालों को विज्ञान का जवाब एक बच्चा अपने घर में बड़ों...

क्या बियाडा सार्वजनिक करेगा रोजगार और स्थानीय आय का हिसाब?

महवल लेदर पार्क पर जवाबदेही की परीक्षा महवल के लेदर पार्क की सफलता का सबसे...

महवल लेदर पार्क की फाइलों में क्या दर्ज है?

रोजगार का हिसाब अब भी अधूरा बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी बियाडा की वेबसाइट...

महवल लेदर पार्क में रोजगार का आधार क्या है?

कितनी फैक्ट्रियों में शुरू हुआ उत्पादन? मुजफ्फरपुर के महवल में लेदर पार्क का उद्घाटन हो...

क्या नौ दिन की पूजा से मिल जाती हैं अलौकिक शक्तियां या इसका अर्थ कुछ और है?

नवरात्रि के 9 दिन पूरे होते हैं। मंदिरों में आरती होती है। घरों में...

छोटी बच्चियों में देवी का दर्शन या स्त्री के सम्मान की सबसे बड़ी सामाजिक कसौटी?

नवरात्र की अष्टमी या नवमी। पूजा का मंडप सजा है। छोटी-छोटी बच्चियों को आसन...

हवन से शुद्ध होती है हवा या बढ़ता है प्रदूषण?

दुर्गा पूजा की अग्नि पर विज्ञान की बड़ी पड़ताल दुर्गा पूजा की अंतिम आहुतियों के...

दुर्गा पूजा मातृशक्ति का सम्मान है या समाज के सामने एक अधूरा सवाल?

जिस समाज में स्त्री को देवी मानकर पूजा जाता है, उसी समाज में उसकी...

क्या मिट्टी के पात्र में रखा जल सचमुच याद रखता है मंत्रों की ऊर्जा?

एक मिट्टी का पात्र। उसमें भरा जल। उसके मुहाने पर रखे आम के पत्ते...

महिषासुर कौन था? पुराणों के असुरराज से आदिवासी पूर्वज तक

दुर्गा पूजा के पंडाल में एक दृश्य बार-बार दिखाई देता है। सिंह पर सवार...

मीनापुर का किसान फसल बेचकर कितना कमाता है? खेत से बाजार तक पूरा हिसाब

मीनापुर में धान की फसल जब खेत में लहलहाती है, तो दूर से वह...

गुमनाम हकीकत: जब इतिहास के खामोश पन्ने अपनी कहानी कहने लगते हैं

पुस्तक समीक्षा इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना शायद यह है कि जो दर्ज है,...

शिक्षक से बड़ा कौन? भारत की उस परंपरा की पड़ताल, जहाँ गुरु को देवता कहा गया

KKN पड़ताल। किसी बच्चे के हाथ में पहली बार कलम आती है, तो वह...

एआई: सुविधा का अगला पड़ाव या इंसान के नियंत्रण से बाहर होती मशीन?

KKN ब्यूरो। कल्पना कीजिए, एक ऐसी मशीन है जिसे आपने कोई काम करने के...

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...