गोवा के शिरगांव में लैराई जात्रा के दौरान भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत, 80 से अधिक घायल

Goa Stampede Tragedy at Lairai Jatra: 7 Dead, Over 80 Injured in Shirgao Festival Chaos

KKN गुरुग्राम डेस्क | गोवा के प्रसिद्ध धार्मिक उत्सव लैराई देवी की जात्रा के दौरान शुक्रवार रात शिरगांव गांव में एक भीषण भगदड़ मच गई। इस हादसे में अब तक 7 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) और नॉर्थ गोवा जिला अस्पताल (मापुसा) में भर्ती कराया गया।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, भीड़ का अत्यधिक दबाव, स्थान की संकीर्णता और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण यह दुर्घटना घटी।

कैसे हुआ हादसा?

लैराई देवी जात्रा गोवा के सबसे प्रसिद्ध और भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में से एक है। शुक्रवार देर रात हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे थे, जहां अग्नि पर चलने की पारंपरिक रस्म संपन्न हो रही थी। इसी दौरान, एक संकीर्ण गलियारे में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ लोग नीचे गिर गए और देखते ही देखते हजारों की भीड़ में भगदड़ मच गई।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का बयान:

“हजारों लोग एक ही दिशा में जा रहे थे, तभी किसी ने चिल्लाना शुरू किया और अचानक भगदड़ मच गई। कुछ लोग नीचे गिर गए, जिन्हें कुचल दिया गया,” — एक श्रद्धालु ने बताया।

मुख्यमंत्री का दौरा और राहत कार्य

घटना की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने मापुसा जिला अस्पताल और बिचोलिम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया। उन्होंने सभी घायलों से मुलाकात की और अधिकारियों को तुरंत उचित इलाज, दवाइयों और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की:

  • मृतकों के परिवार को सरकारी मुआवजा

  • घायलों का पूर्ण निशुल्क उपचार

  • जांच समिति का गठन, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों

क्या है लैराई देवी जात्रा?

लैराई देवी को गोवा की एक प्राचीन और पूजनीय हिंदू देवी माना जाता है। यह जात्रा हर वर्ष चैत्र मास में बिचोलिम तालुका के शिरगांव गांव में बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है।

महत्वपूर्ण विशेषताएं:

  • अग्नि पर चलना (Fire Walking): जिसे “धोंड” कहा जाता है, श्रद्धालु जलते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं।

  • उपवास और ध्यान: इससे पहले श्रद्धालु उपवास रखते हैं और मानसिक तैयारी करते हैं।

  • शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठान: ढोल-नगाड़े, मंत्रोच्चार, और देवी की झांकी के साथ भव्य जुलूस निकलता है।

यह उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन, बल्कि गोवा की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। यहां हजारों श्रद्धालु हर साल देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं।

बार-बार होने वाली भीड़भाड़ की घटनाएं

भारत में धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण की समस्या कोई नई नहीं है।
हाल के वर्षों में भी कई बड़े हादसे हुए हैं:

  • अलाहाबाद कुंभ मेला 2013 में भगदड़

  • सबरीमाला मंदिर में 2011 की आग दुर्घटना

  • वैष्णो देवी मंदिर में 2022 में भगदड़ की चेतावनी

हर बार सरकारें उपाय करने की बात करती हैं, लेकिन प्रभावी योजना और आपातकालीन प्रबंधन की कमी के कारण ऐसे हादसे दोहराए जाते हैं।

भीड़ प्रबंधन की विफलता

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के बड़े आयोजनों के लिए प्रशासन को चाहिए:

  • डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रणाली

  • सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन कैमरा

  • आपातकालीन निकास मार्ग

  • प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की टीम

इस हादसे ने फिर से यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या हम आस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन बना पा रहे हैं?

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद देशभर से शोक संदेश आने लगे हैं। विपक्षी दलों ने न्यायिक जांच की मांग की है और धार्मिक आयोजनों में मानव सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की अपील की है।

मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि श्रद्धालुओं की जीवन रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि केवल धार्मिक परंपरा का निर्वाह।

स्थानीय समुदाय में दुख और आक्रोश

शिरगांव और आस-पास के गांवों में शोक की लहर है। हालांकि लोग देवी में आस्था रखते हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह हादसा रोका जा सकता था।

“हर साल भीड़ बढ़ती जा रही है, लेकिन इंतजाम वही पुराने हैं। आखिर कितनी जानें जाएंगी तब प्रशासन जागेगा?” — एक स्थानीय नागरिक

आगे की कार्यवाही और प्रशासनिक सुधार

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी।

  • सभी धार्मिक आयोजनों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

  • मंदिर समितियों और पंचायतों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सावंत ने कहा:

“यह एक दुखद घटना है। हमें सबक लेकर आगे बढ़ना होगा ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों।”

लैराई देवी जात्रा गोवा की धार्मिक और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करती है। लेकिन 2025 की यह घटना बताती है कि अगर श्रद्धा में सुरक्षा की कमी हो, तो वह आस्था विनाश का कारण बन सकती है।
अब वक्त आ गया है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में गंभीर कदम उठाएं।

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