होमEntertainment‘सनम तेरी कसम 2’ में काम करने से हर्षवर्धन राणे ने किया...

‘सनम तेरी कसम 2’ में काम करने से हर्षवर्धन राणे ने किया इनकार, पाकिस्तानी एक्ट्रेस मावरा होकेन से भिड़ंत तेज़

Published on

KKN गुरुग्राम डेस्क | फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ के सितारे एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई रोमांटिक कहानी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और भावनात्मक विवाद है। भारतीय अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने फिल्म के दूसरे भाग ‘सनम तेरी कसम 2’ में पाकिस्तानी अभिनेत्री मावरा होकेन के साथ काम करने से साफ इंकार कर दिया है। इसकी वजह बनी मावरा की एक विवादास्पद टिप्पणी, जिसमें उन्होंने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को “कायराना” बताया था।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

हाल ही में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में एक सैन्य अभियान चलाया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कई पाकिस्तानी कलाकारों ने भारत की आलोचना की, जिनमें मावरा होकेन भी शामिल थीं। मावरा ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन को “कायरता” करार दिया।

इस बयान से आहत हर्षवर्धन राणे ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और साफ कहा कि अगर ‘सनम तेरी कसम 2’ में मावरा होंगी तो वे इसका हिस्सा नहीं बनेंगे।

हर्षवर्धन राणे का बयान: देश की गरिमा से कोई समझौता नहीं

हर्षवर्धन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा:

“मैं किसी को भी अपने देश की इज्जत और परवरिश को रौंदने की इजाजत नहीं दे सकता। मैंने बहुत शालीनता से ‘सनम तेरी कसम 2’ में काम करने से इनकार किया है, अगर पिछली कास्ट को दोहराया गया तो।”

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बड़ी संख्या में भारतीय यूज़र्स ने उनके देशभक्ति से जुड़े इस रुख की सराहना की।

मावरा होकेन का पलटवार: पीआर स्टंट करार दिया

हर्षवर्धन के बयान से पाकिस्तानी एक्ट्रेस मावरा होकेन नाराज़ हो गईं। उन्होंने भी इंस्टाग्राम पर अपनी प्रतिक्रिया दी:

“जिस इंसान से सामान्य ज्ञान की उम्मीद थी, वह गहरी नींद से जागकर अब एक PR स्ट्रेटजी के साथ सामने आया है।”

मावरा ने हर्षवर्धन के बयान को सिर्फ मीडिया अटेंशन पाने का तरीका बताया और उनके देशभक्ति से जुड़ी भावना को ‘दिखावा’ बताया।

हर्षवर्धन का शांत लेकिन स्पष्ट जवाब

मावरा के तीखे शब्दों का जवाब हर्षवर्धन ने शालीन लहजे में दिया लेकिन उनका संदेश साफ था:

“यह एक व्यक्तिगत हमला लगता है। सौभाग्य से, मुझे ऐसे हमलों को नजरअंदाज करना आता है। लेकिन मैं अपने देश की इज्जत पर हमला सहन नहीं कर सकता।”

हर्षवर्धन ने एक किसान के उदाहरण से समझाया:

“एक भारतीय किसान अपनी फसल से अनचाही खरपतवार को उखाड़ फेंकता है, और इसे सफाई कहते हैं। इसके लिए किसान को किसी PR एजेंसी की जरूरत नहीं होती। इसे कहते हैं कॉमन सेंस।”

उन्होंने आगे कहा:

“मेरे पास पूरा अधिकार है कि मैं उनके साथ काम न करूं जो मेरे देश की रक्षा को ‘कायरता’ कहें। मैंने किसी महिला के सम्मान पर हमला नहीं किया, लेकिन उनके शब्दों में बहुत घृणा और व्यक्तिगत टिप्पणी थी।”

फिल्म ‘सनम तेरी कसम 2’ पर संकट के बादल

2016 में आई फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता पाई थी और हर्षवर्धन राणे और मावरा होकेन की जोड़ी को दर्शकों ने सराहा था। इसके चलते इसके सीक्वल की योजना बनाई गई थी।

लेकिन अब जब हर्षवर्धन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मावरा के साथ काम नहीं करेंगे, तो फिल्म को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं:

  • क्या फिल्म की कास्ट बदली जाएगी?

  • क्या फिल्म को स्थगित कर दिया जाएगा?

  • क्या निर्माता इस विवाद पर आधिकारिक बयान देंगे?

फिलहाल, फिल्म निर्माताओं की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारत-पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक सहयोग पर असर

यह विवाद सिर्फ दो कलाकारों के बीच की बात नहीं है, बल्कि यह भारत-पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक तनाव की भी झलक देता है। 2016 के बाद से भारत में पाकिस्तानी कलाकारों पर कई बार प्रतिबंध लगाए गए हैं।

  • फवाद खानराहत फतेह अली खानअदनान सामी जैसे कलाकार भी ऐसे विवादों का हिस्सा रह चुके हैं।

  • अब हर्षवर्धन राणे जैसे कलाकार भी खुलकर राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं।

जनता की प्रतिक्रिया: देशभक्ति बनाम प्रोफेशनलिज़्म

भारत में अधिकांश सोशल मीडिया यूज़र्स ने हर्षवर्धन राणे के फैसले को साहसी और देशभक्ति से प्रेरित बताया है। कई लोग मानते हैं कि जब देश की बात हो, तो प्रोफेशनल कमिटमेंट से बड़ा कुछ नहीं होता।

वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि कला को राजनीति से अलग रखना चाहिए, और एक फिल्म प्रोजेक्ट को ऐसे विवादों से प्रभावित नहीं करना चाहिए।

हर्षवर्धन राणे का यह निर्णय दर्शाता है कि वे अपने सिद्धांतों और देश के सम्मान के लिए किसी भी स्तर की आलोचना का सामना करने को तैयार हैं। वहीं मावरा होकेन की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और भी व्यक्तिगत बना दिया है।

यह विवाद केवल एक फिल्म का नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दे फिल्म इंडस्ट्री को भी प्रभावित करते हैं। अब देखना होगा कि ‘सनम तेरी कसम 2’ की किस्मत क्या तय होती है और बॉलीवुड इस स्थिति से कैसे निपटता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

मोहम्मद रफी के आखरी अल्फाज- तो, मैं चलूं….

महान पार्श्व गायक मो. रफी आज हमारे बीच भले नही हो, किंतु, उन्हें भूलना...

More like this

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

क्या दुनिया बायोलॉजिकल वेपन के मुहाने पर खड़ी है?

सुपर पावरों की गुप्त प्रयोगशालाएं, अमेरिकी फंडिंग और मानव अस्तित्व पर मंडराता नया खतरा KKN...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...

ईरान के सामने अमेरिका कितना सफल रहा?

क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति सीमित हो चुकी है? KKN ब्यूरो। जब भारत...

क्या अमेरिका भारत का भरोसेमंद साझेदार है?

दोस्त, साझेदार या सिर्फ अपने हितों का प्रहरी? KKN ब्यूरो। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थायी...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

KKN ब्यूरो। भारत ने बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में...

क्या पेट्रोलियम संकट की तरफ बढ़ रहा है भारत?

मिडिल ईस्ट की आग, अमेरिका की शांति वार्ता और भारत पर मंडराता खतरा KKN ब्यूरो।...

क्या ट्रंप हार गए ईरान से? स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर संकट, चीन की एंट्री और भारत के लिए बड़ा खेल

KKN ब्यूरो। क्या सच में Donald Trump ईरान के सामने झुक गए? क्या अमेरिका...

क्या ईरान सिर्फ एक देश है या एक ऐसी रणनीति, जिसे हराना नामुमकिन है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है… कि दशकों से प्रतिबंध झेल रहा एक...

ट्रंप की दादागिरी का असली चेहरा अब दुनिया के सामने है

KKN ब्यूरो। क्या अमेरिका मिडिल ईस्ट में फंस चुका है? क्या ट्रंप की ‘दादागिरी’...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

अफगानिस्तान का नूर खान एयरबेस पर हमला: पाकिस्तान को दिया गया एक रणनीतिक संदेश

KKN ब्यूरो। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो केवल...