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IAS मेधा रूपम: शूटिंग चैंपियन से नोएडा की पहली महिला DM तक का सफर

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आईएएस अधिकारी मेधा रूपम इन दिनों सुर्खियों में हैं। उन्हें हाल ही में नोएडा का जिला अधिकारी (DM) नियुक्त किया गया है और वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनी हैं। उनकी यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब उनके पिता, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (रिटा.) ज्ञानेश कुमार गुप्ता को देश का चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है।

मजबूत प्रशासनिक पृष्ठभूमि

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। वे अपने सख्त और निर्णायक प्रशासनिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय वह केंद्रीय गृह मंत्रालय में सचिव के पद पर थे और इस अहम फैसले के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका चर्चा में रही।

खेल से प्रशासन तक का सफर

मेधा रूपम का करियर शुरू में खेल के मैदान से हुआ। उन्होंने केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीते और राज्य का रिकॉर्ड तोड़ा। यह उपलब्धियां उनकी फोकस और अनुशासन की मिसाल हैं, जिसने आगे उनके प्रशासनिक करियर की नींव रखी।

UPSC में सफलता की कहानी

पिता की प्रेरणा से मेधा ने प्रशासनिक सेवा में आने का फैसला किया। उन्होंने कठिन परिश्रम कर UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की। वर्ष 2014 में वह उत्तर प्रदेश कैडर में आईएएस बनीं। उनकी पहली पोस्टिंग बरेली में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में हुई।

नौकरी के साथ जारी रखा जुनून

मेरठ और उन्नाव में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में काम करते हुए भी उन्होंने शूटिंग प्रतियोगिताओं में भाग लिया और स्वर्ण पदक जीते। यह साबित किया कि प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ भी जुनून को जिंदा रखा जा सकता है।

प्रशासनिक जिम्मेदारियों में प्रगति

मेधा ने लखनऊ में यूपीएएएम के संयुक्त निदेशक और महिला कल्याण विभाग की विशेष सचिव के रूप में कार्य किया। इसके बाद वह बाराबंकी की मुख्य विकास अधिकारी बनीं और फिर हापुड़ की DM के पद पर तैनात हुईं। हर पद पर उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।

निजी जीवन और पारिवारिक सहयोग

मेधा के पति मनीष बंसल भी 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। पंजाब में जन्मे मनीष ने एम.टेक की पढ़ाई की है। दोनों की मुलाकात मसूरी में प्रशिक्षण के दौरान हुई और वहीं से उनका साथ शुरू हुआ। आज वे दो बच्चों के साथ परिवार और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए हुए हैं।

पिता का मार्गदर्शन

मेधा कहती हैं कि उनके जीवन के हर बड़े फैसले में पिता का मार्गदर्शन अहम रहा है। आज, जब उनके पिता एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं और वह खुद एक सक्रिय प्रशासनिक भूमिका निभा रही हैं, तब यह परिवार चर्चा का केंद्र बन गया है।

शूटिंग में रिकॉर्ड तोड़ने से लेकर प्रशासन में नई ऊंचाइयां छूने तक, IAS मेधा रूपम की यात्रा अनुशासन, मेहनत और संकल्प का उदाहरण है। उनकी कहानी न केवल UPSC अभ्यर्थियों बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जुनून और समर्पण के साथ अपने सपनों को साकार करना चाहता है।

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