Home Bihar मुजफ्फरपुर में Midday Meal से दर्जनों बच्चे बीमार, खाने में मिली छिपकली

मुजफ्फरपुर में Midday Meal से दर्जनों बच्चे बीमार, खाने में मिली छिपकली

बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले में एक बार फिर Midday Meal Scheme पर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार को प्राथमिक विद्यालय पोखरैरा बिचला टोला में भोजन करने के बाद दर्जनों बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। बच्चों ने उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने जैसी शिकायतें कीं।

स्कूल के शिक्षकों और प्रधान शिक्षक ने तुरंत सभी बच्चों को पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया। अस्पताल में कुल 62 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें से आठ बच्चों की स्थिति गंभीर बताई गई और उन्हें बेहतर उपचार के लिए SKMCH रेफर कर दिया गया। वहीं, 52 बच्चों को प्राथमिक इलाज के बाद घर भेज दिया गया।

परीक्षा के दौरान हुआ हादसा

प्रधान शिक्षक रमेश राम ने बताया कि बुधवार को स्कूल में अर्द्धवार्षिक परीक्षा हो रही थी। कुल 102 में से 100 बच्चे परीक्षा में मौजूद थे।

पहली पाली की परीक्षा खत्म होने के बाद छात्र-छात्राएं Midday Meal खाने बैठे। इसी दौरान सब्ज़ी में छिपकली गिर गई। खाना फेंकवा दिया गया, लेकिन तब तक कई बच्चों ने भोजन कर लिया था।

कुछ ही देर में करीब 62 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी और पेट दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।

बच्चों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

बीमार हुए कई बच्चों ने बताया कि भोजन करने के तुरंत बाद उन्हें चक्कर आने लगे। कुछ को उल्टी हुई और पेट में तेज़ दर्द शुरू हो गया।

मामले की जानकारी मिलते ही अभिभावक भी अस्पताल पहुंच गए। बच्चों के परिजनों ने गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि Midday Meal में स्वच्छता और मॉनिटरिंग की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।

प्रशासन की सफाई और जांच

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अरविंद सिन्हा ने पुष्टि की कि Midday Meal में छिपकली गिरी थी। उन्होंने कहा कि इस वजह से कई बच्चे बीमार हुए।

उन्होंने बताया कि इस घटना के लिए ज़िम्मेदारी तय की जा रही है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) से जवाब मांगा गया है। दोनों अधिकारियों को संयुक्त जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

सिन्हा ने माना कि स्कूल स्तर पर Midday Meal की सही मॉनिटरिंग नहीं हो रही है और यह बड़ी लापरवाही है।

Midday Meal Scheme पर फिर सवाल

मिड डे मील योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन बार-बार सामने आ रही घटनाओं ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अतीत में भी बिहार के कई जिलों में Midday Meal खाने से बच्चों के बीमार होने की घटनाएं हो चुकी हैं। ज़्यादातर मामलों में साफ-सफाई की कमी, अनदेखी और निगरानी की लापरवाही सामने आई है।

गुस्से में अभिभावक और ग्रामीण

घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में गुस्सा देखा गया। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर बच्चों के खाने में छिपकली कैसे गिर गई।

ग्रामीणों ने मांग की कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और स्कूलों में Midday Meal की निगरानी मज़बूत की जाए। कई अभिभावक अब बच्चों को स्कूल का खाना खिलाने से डर रहे हैं।

आगे की ज़रूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि Midday Meal Scheme को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

  • स्कूलों में साफ-सफाई और भोजन पकाने की सही व्यवस्था होनी चाहिए।

  • नियमित निरीक्षण और आकस्मिक जांच ज़रूरी है।

  • समुदाय की भागीदारी से भोजन की गुणवत्ता पर नज़र रखी जा सकती है।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। लेकिन परिजन और ग्रामीण चाहते हैं कि इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कदम उठाए जाएं।

मुजफ्फरपुर का यह मामला एक बार फिर Midday Meal Scheme की खामियों को उजागर करता है। 62 बच्चों का बीमार होना और आठ बच्चों का SKMCH रेफर होना बेहद चिंताजनक है।

जिला प्रशासन ने जांच का आदेश तो दे दिया है, लेकिन जब तक निगरानी व्यवस्था मज़बूत नहीं होगी, ऐसे हादसे दोहराने की आशंका बनी रहेगी।

यह योजना लाखों बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी है। इसलिए अब ज़रूरी है कि सरकार और अधिकारी इसे गंभीरता से लें और बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दें।

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