Home Crime गला घोंट हत्या करके जमीन में गाड़ दी जाती थीं हड्डियां

गला घोंट हत्या करके जमीन में गाड़ दी जाती थीं हड्डियां

इंसान के रूप में भेड़िया निकला राम रहीम

250 से अधिक लड़कियों का कर चुका है रेप

 

राम रहीम का डरावना चेहरा भी सामने आने लगा है। जानकारी के मुताबिक डेरे में सैकड़ों लोगों को गला घोंटकर मारा गया था और उनकी बॉडी को सिरसा ब्रांच नहर (भाखड़) में बहा दिया जाता था। बाद मारे जाने वाले लोगों का दाह संस्कार किया जाने लगा और उनकी हड्डियों को डेरे के पीछे बने बगीचे में गाड़ा जाने लगा।
यह खुलासे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के गार्ड रह चुके बेअंत सिंह ने एक टीवी चैनल पर किया है। बेअंत भी बाबा राम रहीम की ज्यादतियों का शिकार हुआ था। यह, उन 250 युवाओं में शामिल है, जिन्हें डेरा में नपुंसक बनाया गया था। इनमें से कई लड़के अब देश से बाहर चले गए हैं और कुछ लड़के अभी भी देश के अलग-अलग हिस्सों में रहकर अपनी जिंदगी काट रहे हैं।
बेअंत ने खुलाशा किया है कि डेरे में रह रही 300 साध्वियों में से 90 फीसदी ऐसी हैं जिनके साथ रेप किया गया है। अपने वीडियो में सिंह ने बताया कि डेरा प्रमुख एक के बाद एक सभी साध्वियों के साथ रेप करता था। हर रोज एक एक करके साध्वियां उसके कमरे में आती थीं और उनसे गलत काम करवाया जाता था। बेअंत ने कहा कि 1995 में एक बार माउंट आबु में राम रहीम ने 16 साल की एक लड़की को अपने साथ कमरे में ले गया और उसके साथ घंटों तक दुष्कर्म करता रहा। सभी सिक्योरिटी गार्ड इस घटना को देख रहे थे। लड़की की असहाय चीख को सुन भी रहे थे। लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसे रोके। वो लड़की अब बड़ी हो चुकी है और अब भी डेरे में ही है। बेअंत के अनुसार डेरा प्रमुख ने 200 से 250 लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया है। डेरा में करीब 400 लड़कियां हैं, जिन्हें साध्वी बताया जाता है। डेरा प्रमुख की गुफा में सारी रात कोई न कोई लड़की आती ही थी।

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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