पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एक नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब सियासी रूप ले चुका है। जहानाबाद की रहने वाली छात्रा की मौत के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में जन सुराज पार्टी के प्रमुख Prashant Kishor ने पटना पहुंचकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।
प्रशांत किशोर ने पहले जहानाबाद जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। परिवार से बातचीत के बाद उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बताया। इसके बाद उन्होंने पटना के एसएसपी से मिलकर इस घटना में सख्त कार्रवाई की मांग रखी।
पटना एसएसपी से मुलाकात के बाद उठाए सवाल
पटना एसएसपी Kartikeya Sharma से मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि छात्रा की मौत के विरोध में पटना के कारगिल चौक पर कुछ छात्रों ने प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन न्याय की मांग को लेकर किया गया था।
प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि छात्र अपने साथी की मौत से आहत थे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे।
प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर को बताया गलत
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि विरोध प्रदर्शन करने वालों पर केस दर्ज करना गलत संदेश देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम से छात्र डर सकते हैं और अपनी आवाज उठाने से पीछे हट सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे को सीधे पटना एसएसपी के सामने रखा।
उन्होंने बताया कि एसएसपी ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को अपने स्तर से देखेंगे। पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा की बात भी कही गई है। इससे छात्रों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अस्पताल की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में प्रभात मेमोरियल अस्पताल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, प्रशांत किशोर ने कहा कि वह खुद कोई जांच अधिकारी नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पटना एसएसपी भी इस केस के जांच अधिकारी नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पटना आईजी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया है। इस टीम को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। ऐसे में जांच को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने देना जरूरी है।
एसआईटी को जांच करने देने की अपील
प्रशांत किशोर ने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी को सभी पहलुओं की जांच करने दी जाए। पीड़ित परिवार की बातों को सरकार और पुलिस के सामने रखा जा चुका है।
उनका कहना था कि सच सामने लाने के लिए जांच प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए। यदि कहीं भी लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पीड़ित परिवार की मांग पर भी रखा पक्ष
प्रशांत किशोर ने बताया कि पीड़ित परिवार का मानना है कि एक महिला पुलिस पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही है। परिवार का आरोप है कि उसी के कारण गलत स्थिति बनी। इस मांग को भी उन्होंने पटना एसएसपी के सामने रखा।
उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि संबंधित महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। प्रशांत किशोर ने प्रशासन से आग्रह किया कि इन आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
इस घटना के बाद राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष लगातार कानून व्यवस्था और छात्र सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है। खासकर कोचिंग हब के रूप में पहचाने जाने वाले पटना में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है। सभी की मांग है कि दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाए।
छात्र सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना ने एक बार फिर छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूर-दराज के जिलों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के माता-पिता भी चिंतित हैं। नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी माना जा रहा है।
इस घटना के बाद प्रशासन पर दबाव है कि वह छात्रावासों की स्थिति और निगरानी व्यवस्था पर ध्यान दे।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
पटना पुलिस की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा सकती है। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए अहम बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है और न्याय की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
