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एक ई-मेल… और कई अदालतों में मच गया हड़कंप!’ बिहार के कोर्ट्स को बम से उड़ाने की धमकी, हाईकोर्ट से जिला अदालतों तक अलर्ट

KKN ब्यूरो। बिहार में न्यायिक सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त चौकन्नी हो गई, जब धमकी भरा ई-मेल एक साथ कई अदालतों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, यह धमकी राजधानी पटना स्थित हाईकोर्ट के आधिकारिक ई-मेल सिस्टम तक पहुँची, जबकि कुछ जिला न्यायालयों को भी इसी तरह के संदेश मिलने की पुष्टि हुई।

किन-किन कोर्ट को मिला धमकी भरा ई-मेल?

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, धमकी के दायरे में—

  • पटना हाईकोर्ट
  • पटना सिविल कोर्ट (जिला न्यायालय परिसर)
  • मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय
  • गया जिला न्यायालय
  • भागलपुर जिला न्यायालय

शामिल बताए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से सूची को सीमित रूप में सार्वजनिक किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की अराजकता या कॉपीकैट हरकतों से बचा जा सके।

धमकी का स्वरूप: क्या लिखा था ई-मेल में?

धमकी ई-मेल की भाषा संक्षिप्त लेकिन गंभीर बताई जा रही है, जिसमें अदालत परिसरों में विस्फोट की चेतावनी दी गई थी।

  • समय या स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं
  • उद्देश्य: डर और भ्रम फैलाना
  • संकेत: डिजिटल/साइबर ट्रेल छिपाने की कोशिश

इसी वजह से इसे हाई-रिस्क अलर्ट मानते हुए त्वरित कार्रवाई की गई।

तत्काल एक्शन: कोर्ट खाली, बम स्क्वॉड तैनात

धमकी मिलते ही—

  • संबंधित कोर्ट परिसरों को अस्थायी रूप से खाली कराया गया
  • बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, स्थानीय पुलिस और स्पेशल ब्रांच मौके पर पहुँची
  • प्रवेश-निकास पर कड़ी घेराबंदी
  • पार्किंग, कोर्ट रूम, रिकॉर्ड रूम तक सघन तलाशी

कई घंटों की जांच के बाद कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, लेकिन प्रशासन ने इसे मॉक या फर्जी मानकर खारिज करने से इनकार किया।

जांच का एंगल: साइबर साजिश या सोची-समझी धमकी?

पुलिस सूत्र बताते हैं कि मामला साइबर क्राइम एंगल से जुड़ा हो सकता है—

  • ई-मेल की IP और सर्वर-लेवल ट्रैकिंग
  • VPN/डार्क-नेट इस्तेमाल की आशंका
  • राज्य साइबर सेल और विशेष एजेंसियाँ अलर्ट

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग राज्यों में फर्जी बम धमकियों के जरिए न्यायिक व शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।

न्यायिक व्यवस्था पर दबाव की कोशिश?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की धमकियाँ—

  • अदालतों के कामकाज को बाधित करती हैं
  • आम नागरिक और वकीलों में भय पैदा करती हैं
  • न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाती हैं

यही कारण है कि बिहार में

  • कोर्ट सुरक्षा SOP की री-ऑडिट
  • ई-मेल और डिजिटल सिस्टम की फॉरेंसिक ऑडिट
  • हाई-रिस्क दिनों में अतिरिक्त बल तैनाती
    पर विचार चल रहा है।

प्रशासन का सख्त संदेश

कोर्ट की सुरक्षा सर्वोपरि है। धमकी चाहे फर्जी हो या वास्तविक—जांच पूरी होगी और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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