Home Bihar पूर्वी चंपारण में विराट शिवलिंग के आगमन से आस्था का सैलाब

पूर्वी चंपारण में विराट शिवलिंग के आगमन से आस्था का सैलाब

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया गांव में मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चकिया–केसरिया पथ पर निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में सोमवार रात करीब 10:40 बजे विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया। शिवलिंग के आगमन की खबर फैलते ही आसपास के गांवों और जिलों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया।

मंदिर परिसर और उसके आसपास का इलाका धार्मिक माहौल से सराबोर नजर आया। हर ओर भक्ति गीतों और जयकारों की गूंज सुनाई देती रही। लोगों में शिवलिंग के दर्शन को लेकर खासा उत्साह देखा गया।

सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

मंगलवार सुबह करीब 8 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में जुटने लगी। हर-हर महादेव, जय श्रीराम और बोल बम के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठा। ट्रक पर लदे विराट शिवलिंग के दर्शन, स्पर्श और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों में खास उत्सुकता देखी गई।

श्रद्धालुओं ने बेलपत्र अर्पित किए और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगलकामना के लिए प्रार्थनाएं कीं। कई लोग शिवलिंग को देखकर भावुक नजर आए। धार्मिक आस्था के इस दृश्य ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।

वैकल्पिक रास्तों से मंदिर परिसर में प्रवेश

निर्माण कार्य जारी रहने के कारण फिलहाल मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए कई वैकल्पिक रास्ते खुले हुए हैं। श्रद्धालु जिस दिशा से रास्ता खाली मिला, उसी ओर से परिसर में प्रवेश करते नजर आए। पैदल यात्रियों के साथ-साथ साइकिल, मोटरसाइकिल, ऑटो और कारों की लंबी कतारें सड़क किनारे लगी रहीं।

मंदिर के आसपास मेला जैसा दृश्य बन गया। खाने-पीने की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। खासकर युवा वर्ग में शिवलिंग के साथ फोटो और सेल्फी लेने की होड़ दिखाई दी। स्कूलों में अवकाश होने के कारण छात्र-छात्राओं की संख्या भी काफी रही।

फटे टायरों ने बयां की लंबी यात्रा की कठिनाई

जिस ट्रक पर शिवलिंग लाया गया था, उसी पर कई फटे हुए टायर रखे नजर आए। इन टायरों ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम से मोतिहारी तक की लंबी और कठिन यात्रा की कहानी खुद बयां कर दी। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर शिवलिंग को यहां तक लाना एक बड़ी चुनौती रही।

यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों से गुजरते समय सड़क और मौसम की परिस्थितियों ने इस यात्रा को और भी कठिन बना दिया था।

पुलिस व्यवस्था नहीं दिखी, प्राइवेट गार्ड संभालते रहे भीड़

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद मंदिर परिसर में स्थानीय पुलिस की मौजूदगी नजर नहीं आई। भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्राइवेट गार्डों पर ही रही। लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से पुलिस बल की तैनाती आवश्यक है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

पार्किंग की अव्यवस्था से लगा जाम

मंदिर परिसर के आसपास वाहनों के लिए समुचित पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं ने सड़क किनारे ही वाहन खड़े कर दिए। इसके कारण चकिया–केसरिया पथ पर बार-बार जाम की स्थिति बनी रही।

राहगीरों और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बार पुलिस को मौके पर पहुंचकर जाम हटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यह स्थिति प्रशासनिक तैयारियों की कमी की ओर इशारा करती है।

helicopter abhishek की होगी विशेष व्यवस्था

यह विशाल शिवलिंग 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान यह आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार के गोपालगंज और केसरिया मार्ग से कैथवलिया गांव पहुंचा।

शिवलिंग पर helicopter abhishek की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके लिए हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर से पवित्र जल मंगाया गया है। मान्यता है कि यह सहस्रलिंगम शिवलिंग 1008 शिवलिंगों के जलाभिषेक के समान पुण्य प्रदान करता है।

विराट रामायण मंदिर परियोजना की भव्यता

विराट रामायण मंदिर को देश की सबसे भव्य धार्मिक परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। मंदिर परिसर का विस्तार लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। शिवलिंग का वजन करीब 210 मीट्रिक टन बताया गया है।

मंदिर की प्रस्तावित लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। पूरे परिसर में 18 शिखर और 22 मंदिर बनाए जाएंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट निर्धारित की गई है। इस विशाल temple project को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

17 जनवरी को होगी शिवलिंग की स्थापना

महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, 17 जनवरी को विधि-विधान के साथ शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। स्थापना से पूर्व पांच तीर्थों से लाए गए पवित्र जल से अभिषेक किया जाएगा।

इस अवसर पर helicopter abhishek भी किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। शिवलिंग की स्थापना के साथ ही विराट रामायण मंदिर परियोजना एक नए चरण में प्रवेश करेगी।

कुल मिलाकर, कैथवलिया गांव में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के आगमन ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक आस्था के केंद्र में बदल दिया है। आने वाले दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे यह स्थल बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होता नजर आ रहा है।

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