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कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़ क्यों आ जाती है? कहीं मुफ्त बिजली, कहीं मुफ्त बस यात्रा, तो कहीं मुफ्त राशन। लेकिन क्या यह सब सच में ‘मुफ्त’ है?

आज के ‘खबरों की खबर’ में हम पड़ताल करेंगे फ्रीबी पॉलिटिक्स (Freebie Politics) के उस मायाजाल की, जो सुनने में तो राहत देता है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा है।

इस वीडियो में हम चर्चा करेंगे:

भारतीय राज्यों पर बढ़ता 170 लाख करोड़ का भारी कर्ज।

मुफ्त योजनाओं और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) का गहरा संबंध है।

कैसे चुनाव जीतने के लिए पार्टियां अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और भविष्य के आर्थिक खतरे।

क्या हम विकास के नाम पर सिर्फ ‘पॉलिटिकल हाई शुगर’ के शिकार हो रहे हैं?

यह वीडियो केवल राजनीति पर नहीं, बल्कि आपके और हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर है। क्या इन योजनाओं पर रोक लगनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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