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तेजस्वी यादव का वक्फ एक्ट पर बड़ा बयान: “कूड़ेदान में फेंक देंगे कानून” – बिहार चुनाव में छिड़ा विवाद

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मुस्लिम बहुल इलाकों में तेजस्वी का धमाकेदार वादा

KKN ब्यूरो। कटिहार/किशनगंज/अररिया, 27 अक्टूबर 2025 – बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने रविवार को एक विवादास्पद बयान देकर राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है। सीमांचल क्षेत्र के मुस्लिम बहुल जिलों कटिहार, किशनगंज और अररिया में हुई चार जनसभाओं को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो वक्फ संशोधन कानून को “कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा”।​ आरजेडी के इस युवा नेता ने अपने संबोधन में कहा, “अगर इंडिया ब्लॉक राज्य में सत्ता में आया तो हम वक्फ एक्ट को कूड़ेदान में फेंक देंगे। यह चुनाव संविधान, लोकतंत्र और भाईचारे को बचाने की लड़ाई है”। तेजस्वी ने प्रणपुर, कोचाधामन, जोकीहाट और नरपतगंज विधानसभा क्षेत्रों में अपनी रैलियों में यह बयान दोहराया।​

बीजेपी को ‘भारत जलाओ पार्टी’ कहा, नीतीश पर साधा निशाना

तेजस्वी यादव ने अपने तीखे हमले में बीजेपी को ‘भारत जलाओ पार्टी’ करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी पूरे देश और बिहार में सांप्रदायिक नफरत फैला रही है। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ने हमेशा ऐसी ताकतों का समर्थन किया है। उनके कारण ही आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन राज्य और देश में सांप्रदायिक घृणा फैला रहे हैं। बीजेपी को ‘भारत जलाओ पार्टी’ कहा जाना चाहिए”।​ अपने पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक विरासत को याद करते हुए तेजस्वी ने कहा, “लालू जी ने कभी सांप्रदायिक ताकतों से समझौता नहीं किया। यही आरजेडी की विचारधारा है। लेकिन नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में आरएसएस को जमीन दी है”। उन्होंने आगे जोड़ा, “मैं लालू का बेटा हूं। मुझे अमित शाह की धमकियों से डर नहीं लगता। मैं लड़ूंगा और जीतूंगा। हम बिहारी हैं, असली बिहारी, हम बाहरी लोगों से नहीं डरते”।​

वक्फ संशोधन कानून क्या है और क्यों है विवादित?

वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को केंद्रीय संसद ने अप्रैल 2025 में पारित किया था। इस कानून को लेकर भारत की राजनीति में गहरा विभाजन है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने इस कानून को पिछड़े मुसलमानों और महिलाओं के सशक्तिकरण, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।​ दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस संशोधन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों के मौलिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में कुछ प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगा दी थी, जिसमें जिला कलेक्टरों को वक्फ संपत्तियों पर व्यापक अधिकार देने और वक्फ बनाने के लिए पांच साल तक इस्लाम का अभ्यास करने की अनिवार्यता शामिल थी।​ कानून का नाम बदलकर “यूनाइटेड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 (UWMEED Act 1995)” रखा गया है। इसमें केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है।​

एनडीए का पलटवार: संसद का कानून CM नहीं बदल सकता

तेजस्वी के बयान के बाद एनडीए खेमे ने जोरदार पलटवार किया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, “आरजेडी के लोग जंगलराज वाले हैं। उन्हें नहीं पता कि केंद्र की संसद से जो कानून बना है, उस पर सुप्रीम कोर्ट की भी मुहर लग गई है। आरजेडी पूरी तरह से निराश और हताश हो गई है”।​ बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने तेजस्वी की राज्य सरकार की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा, “वक्फ बोर्ड बिल संसद में पारित किया गया है, विधानसभा में नहीं। व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार बोलना चाहिए। जब आप (आरजेडी) सरकार में थे, तो अपराधियों का राज था। ये लोग ‘जय शाहबुद्दीन’ का नारा लगाते हैं। तेजस्वी यादव की 56 इंच लंबी जुबान है जबकि एनडीए का 56 इंच का सीना है”।​ शनिवार को आरजेडी विधान पार्षद मोहम्मद कारी सोहैब ने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में एक सार्वजनिक बैठक में कहा था कि अगर तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनते हैं तो “वक्फ बिल सहित सभी बिलों को फाड़ दिया जाएगा”। इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया, क्योंकि विपक्ष ने सवाल उठाया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री केंद्रीय कानून को कैसे बदल सकता है।​

सीमांचल में मुस्लिम वोटरों का महत्व

तेजस्वी यादव ने अपना यह बयान सीमांचल क्षेत्र में दिया, जो बिहार का मुस्लिम बहुल इलाका है। इस क्षेत्र में पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले शामिल हैं, जहां मुस्लिम आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा निवास करता है। किशनगंज में 68% मुस्लिम मतदाता हैं।​ बिहार की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 17.7% है, लेकिन राजनीतिक दलों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को केवल 34-35 टिकट दिए हैं। 243 सीटों में से आरजेडी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए केवल 18 मुस्लिम उम्मीदवार (12.58%) दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने 61 में से 10 (16.7%) मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है।​ 87 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 20% से अधिक है, और उत्तरी बिहार में लगभग 75% मुस्लिम आबादी केंद्रित है। ऐसे में वक्फ कानून पर तेजस्वी का बयान इस क्षेत्र के मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।​

सीमांचल के लिए विकास के वादे भी किए

वक्फ कानून के अलावा तेजस्वी ने सीमांचल क्षेत्र के विकास के लिए कई बड़े वादे भी किए। उन्होंने सीमांचल विकास प्राधिकरण की स्थापना, विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का केंद्र स्थापित करने का वादा किया।​ तेजस्वी ने कहा, “नीतीश कुमार की दो दशक पुरानी सरकार सीमांचल को विकसित करने में विफल रही है। भ्रष्टाचार व्याप्त है और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। हम वृद्धावस्था पेंशन को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह करेंगे”।​

संवैधानिक समानता और बहुलवाद की लड़ाई

अपने भाषणों में तेजस्वी ने इस चुनाव को संविधान और बहुलवाद को बचाने की लड़ाई करार दिया। किशनगंज में उन्होंने कहा, “यह देश सबका है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी ने बलिदान दिया है। संविधान सभी को समान अधिकार देता है। इस चुनाव में संवैधानिक समानता पर व्यापक हमला हो रहा है”।​ तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी नीतीश कुमार को “हाईजैक” कर चुकी है और गृह मंत्री अमित शाह के बयान से साफ है कि चुनाव के बाद विधायक मुख्यमंत्री का चुनाव करेंगे, जिसका मतलब है कि नीतीश को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा।​

CPI(ML) ने भी किया समर्थन

तेजस्वी के बयान का समर्थन करते हुए इंडिया गठबंधन के सहयोगी CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी रविवार को कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर बिहार में वक्फ संशोधन कानून को लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बिहार में वक्फ संशोधन कानून लागू नहीं हो। हाल में लाए गए सभी कानूनों के साथ भी यही करेंगे जो संवैधानिक संघीय ढांचे पर हमला प्रतीत होते हैं”।​

चुनावी संदर्भ: 6 और 11 नवंबर को मतदान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा और 14 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार और मुकेश साहनी (विकासशील इंसान पार्टी) को उप-मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है।​ एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर होगी, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। वक्फ कानून का यह विवाद बिहार चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इसका गहरा असर होने की संभावना है।​

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