बिहार विधानसभा चुनाव की चुनावी मुहिम के अंतिम दौर में राज्य में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजद-कांग्रेस गठबंधन पर जोरदार हमला करते हुए कहा, “राजद और कांग्रेस बिहार का कभी विकास नहीं कर सकते। इन लोगों ने कई सालों तक बिहार पर शासन किया। जहां बंदूकें और क्रूरता का राज हो, वहां कानून का कोई महत्व नहीं होता।”
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वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के उम्मीदवार तौसीफ आलम ने अपने विवादित बयान से आग में घी डालने का काम किया। आलम ने कहा, “अगर किसी fodder thief का बेटा ओवैसी पर उंगली उठाता है, तो मैं उसे काट दूंगा। अगर वह आंख उठाता है, तो मैं उसे निकाल दूंगा।” इस बयान ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री मोदी, नीतीश कुमार, असदुद्दीन ओवैसी, गिरिराज सिंह और सम्राट चौधरी जैसे नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी, और सभी ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधा।
हालांकि, तेजस्वी यादव ने अपनी योजना पर ध्यान केंद्रित रखा और व्यक्तिगत हमलों या विवादों में शामिल होने से बचते हुए, अपनी मुख्य विषयवस्तु – रोजगार, शिक्षा और प्रशासन – पर जोर दिया। उन्होंने अपने रैलियों में बार-बार यही संदेश दिया: “शांतिपूर्वक, लालटेन की छाप।” सिर्फ तीन दिनों में उन्होंने 51 रैलियों को संबोधित किया और अपनी 10 बिंदुओं की योजना को प्रचारित किया, जिससे उनका उद्देश्य Grand Alliance के पक्ष में वोटों को प्रभावित करना था।
तेजस्वी यादव के मुख्य अभियान मुद्दे
तेजस्वी यादव का सबसे बड़ा अभियान मुद्दा रोजगार है। उन्होंने वादा किया कि सरकार बनने के 20 महीने के भीतर हर परिवार को एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। बिहार के युवा मतदाताओं, जिनकी संख्या करीब 40% है, को ध्यान में रखते हुए उनका अभियान युवा आकांक्षाओं को संबोधित करता है। तेजस्वी ने भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता, ठेका कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी और उचित डोमिसाइल नीति की बात भी की।
तेजस्वी ने युवा वोटरों से जुड़ने के लिए अपनी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा को छोड़कर रैलियों में रंगीन टी-शर्ट पहनना शुरू किया। यह बदलाव उनकी युवा छवि को प्रक्षिप्त करने के लिए एक रणनीतिक कदम था।
महिला-केन्द्रित कल्याण योजनाएँ और नीतीश कुमार की नीतियों को चुनौती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मजबूत महिला वोट बैंक को चुनौती देने के लिए, तेजस्वी ने महिला कल्याण के लिए कई योजनाओं की घोषणा की। इनमें “माई-बहन मान योजना” (₹2,500 मासिक), मकर संक्रांति पर ₹30,000 की एकमुश्त राशि, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और स्कॉलरशिप शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने का वादा किया। यह कदम नीतीश कुमार की उन कल्याणकारी नीतियों का प्रतिकार था, जिनसे महिलाओं को शराबबंदी और आरक्षण नीतियों के माध्यम से जेडीयू से जोड़ा गया था।
उच्च मतदान प्रतिशत और आक्रामक ज़मीन पर प्रचार
तेजस्वी ने पहले चरण में 64.46% मतदान को “बदलाव की हवा” करार दिया और इसे Grand Alliance के पक्ष में बढ़ते समर्थन का संकेत बताया। उन्होंने इसे अंतिम मतदान चरणों में बनाए रखने की रणनीति अपनाई। अपनी प्रचार रणनीति को सफल बनाने के लिए, तेजस्वी ने रोजाना 18 रैलियों को संबोधित किया और “momentum carry-forward” के तहत सार्वजनिक बैठकें, प्रेस इंटरएक्शन और लाइव सत्र आयोजित किए।
गठबंधन की एकजुटता और विभिन्न मतदाता समूहों तक पहुंच
Grand Alliance ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके अपनी एकजुटता दिखाई। तेजस्वी ने गठबंधन के भीतर सीटों के विवाद को सुलझाया और मुकेश साहनी को RJD के उम्मीदवार अफज़ल खान का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहे।
तेजस्वी ने पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार से परे जाकर अपने outreach को EBCs (Economic Backward Classes), दलितों और OBCs तक विस्तारित किया। उनके टिकट वितरण ने इस बदलाव को दर्शाया, जिसमें 51 यादव, 19 मुस्लिम, 11 कुशवाहा और 14 उच्च जाति के उम्मीदवार शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने EBC आरक्षण को 20% से बढ़ाकर 30% करने का वादा किया, जो उनके समावेशी दृष्टिकोण को और मजबूत करता है।
प्रतिकारात्मक भाषा से बचते हुए तेजस्वी का संदेश
तेजस्वी यादव ने NDA द्वारा लगाए गए “जंगलराज” के आरोप का कड़ा जवाब देते हुए कहा, “अगर मेरी परछाई भी कुछ गलत करती है, तो मैं उसे सजा दूंगा।” उनके चुनावी घोषणापत्र में किसानों के ऋण माफी, मुफ्त बिजली, MSP की गारंटी, शिक्षक स्थानांतरण सुधार और OPS जैसे कल्याणकारी वादे शामिल थे, जो शासन और कल्याण की राजनीति का मिलाजुला रूप थे।
डिजिटल अभियान और मुस्लिम वोटरों तक पहुंच
तेजस्वी ने सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करते हुए फेसबुक (3.8 मिलियन फॉलोअर्स) और X (पूर्व ट्विटर) को अपने अभियान का अहम हिस्सा बनाया। उन्होंने रैलियों के लाइवस्ट्रीम से लेकर मीम आधारित पहुंच तक, डिजिटल रणनीति को जोरशोर से प्रचारित किया, खासकर युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच।
निष्कलंक नेतृत्व और राजनीतिक परिपक्वता
तेजस्वी यादव ने अपने प्रतिद्वंद्वियों से अलग रहते हुए भड़काऊ बयानों का जवाब नहीं दिया। उन्होंने तौसीफ आलम के हिंसक बयान या अपने भाई तेज प्रताप यादव की विवादास्पद टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह दिखाता है कि तेजस्वी ने अनुशासन बनाए रखा है और महुआ में वह अपने भाई तेज प्रताप के खिलाफ भी प्रचारित हुए, इस संदेश के साथ कि “पार्टी परिवार से बड़ी है।”
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएँ
वरिष्ठ पत्रकार इर्शादुल हक ने कहा, “तेजस्वी ने इस चुनाव को ‘तेजस्वी बनाम अन्य’ बना दिया है। BJP द्वारा उकसाए जाने के बावजूद, वह नफरत फैलाने वाली भाषा से बचते हैं, जो उनके पक्ष में काम कर सकता है।” वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा, “तेजस्वी ने रोजगार को मुख्य मुद्दा बनाकर सभी पार्टियों को अपनी नीतियों का पालन करने पर मजबूर किया। हालांकि, उनका चुनौती यह है कि बिहार उन्हें चुनावों के बाद भी सक्रिय रूप से नजर आए।”
तेजस्वी यादव का अभियान युवा ऊर्जा, कल्याण योजनाओं और डिजिटल अभियानों का मिश्रण था। उनका रोजगार और समावेशी राजनीति पर ध्यान केंद्रित करना, और भड़काऊ बयानों से बचना, उन्हें इस चुनाव का केंद्रीय चेहरा बना दिया है। यह देखना बाकी है कि क्या यह गठबंधन भाजपा-जेडीयू के संगठनात्मक ताकत और जातीय गणित को पार कर सकता है, लेकिन एक बात साफ है — तेजस्वी यादव ने इस चुनाव को अपने नाम कर लिया है।
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