प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी स्वर्गवासी मां को लेकर दरभंगा में Voter Rights Yatra के दौरान दिए गए अभद्र बयान का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद पर अब जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि मोदी केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। राजनीतिक विरोध करना गलत नहीं है लेकिन व्यक्तिगत गाली देना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं।
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इस बयान के बाद बीजेपी को अप्रत्यक्ष तौर पर प्रशांत किशोर का समर्थन मिल गया है और कांग्रेस पर माफी मांगने का दबाव और बढ़ गया है।
कांग्रेस पर प्रशांत किशोर का हमला
समस्तीपुर में आयोजित Bihar Badlav Sabha के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करना स्वाभाविक है। वे खुद भी कई बार मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन विरोध का मतलब यह नहीं है कि उनकी मां या बहन को गाली दी जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी से ऐसी घटना की उम्मीद नहीं की जाती। यह पार्टी की छवि पर धब्बा है और कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।
किशोर ने यह भी जोड़ा कि जिस मंच से यह अपमानजनक शब्द बोले गए, उसकी जिम्मेदारी वहां मौजूद नेताओं पर बनती है।
बीजेपी का प्रदर्शन और बवाल
दरभंगा की घटना के बाद बिहार में बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पटना, मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों में बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।
पटना में कांग्रेस दफ्तर के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। सदाकत आश्रम में तो हालात और बिगड़ गए, जहां दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच लाठी-डंडे और पत्थर चले। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए।
बीजेपी का कहना है कि प्रधानमंत्री और उनकी स्वर्गवासी मां के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
मामला अदालत तक पहुंचा
इस पूरे विवाद पर कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। मुजफ्फरपुर की अदालत में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई कार्यकर्ताओं पर परिवाद दायर हुआ है।
अदालत ने सितंबर में इस मामले की सुनवाई तय की है। वहीं, पटना में दो थानों में आवेदन दिया गया है और दरभंगा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
दिल्ली तक पहुंचा बीजेपी का आंदोलन
बिहार में प्रदर्शन के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को दिल्ली तक ले जाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि यह केवल बिहार का नहीं बल्कि पूरे देश का मुद्दा है क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री का अपमान किया गया है।
दिल्ली में भी बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
जनभावना और सांस्कृतिक असर
भारत में माता-पिता के प्रति सम्मान को संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की स्वर्गवासी मां के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल लोगों की भावनाओं को गहराई से आहत कर रहा है।
यही वजह है कि यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक आक्रोश का रूप ले चुका है।
कांग्रेस पर बढ़ा दबाव
बीजेपी के आंदोलन, अदालत में मामला और अब प्रशांत किशोर का Prashant Kishor Statement—इन सबने कांग्रेस को घेर लिया है। विपक्षी पार्टी पर माफी मांगने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस यदि खेद प्रकट कर ले तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन अगर चुप्पी बरकरार रही तो पार्टी की छवि और नुकसान झेल सकती है।
दरभंगा की घटना से शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। BJP Protest बिहार से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुका है और कांग्रेस सवालों के घेरे में है।
प्रशांत किशोर का बयान इस मामले को और गंभीर बना देता है। उनका साफ कहना है कि नरेंद्र मोदी को अब केवल पार्टी नेता नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाना चाहिए और उनकी मां को गाली देना अस्वीकार्य है।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस पर हैं कि क्या वह Congress Apology Demand को स्वीकार करेगी या टकराव की राजनीति जारी रखेगी।



