होमBiharबिहार की सीटों पर पति-पत्नी और भाई-भाई के बीच हो रहा,...

बिहार की सीटों पर पति-पत्नी और भाई-भाई के बीच हो रहा, राजनीतिक मुकाबला

Published on

 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने एक बार फिर राज्य की विशिष्ट राजनीतिक पहचान को उजागर किया है। यहां परिवारिक संबंधों, प्रतिद्वंद्विताओं और वंशवादी महत्वाकांक्षाओं का टकराव सीधे चुनावी मैदान में दिख रहा है। कई विधानसभा क्षेत्रों में रिश्तेदार, पति-पत्नी और यहां तक कि भाई-बहन भी एक दूसरे के खिलाफ या फिर विपक्षी दलों से चुनावी मैदान में हैं। इस प्रकार, चुनाव अब विरासत, वफादारी और सत्ता की लड़ाई बन गई है।

नवादा में पति-पत्नी ने बदला दल

नवादा जिले में राजनीतिक परिदृश्य ने एक दिलचस्प मोड़ लिया है। यहां पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कौशल यादव और राजबल्लभ यादव के बीच राजनीतिक भूमिकाओं ने उलटफेर किया है। जहां एक समय में कौशल यादव जेडीयू से जुड़े हुए थे, वहीं अब उन्होंने आरजेडी जॉइन कर ली है। वही राजबल्लभ  यादव, जो पहले आरजेडी के विधायक रह चुके थे, अब जेडीयू में शामिल हो गए हैं। इस बीच, दोनों की पत्नियां भी राजनीति में सक्रिय हैं।

राजबल्लभ की पत्नी, Vibha Devi, जेडीयू के टिकट पर नवादा से चुनावी मैदान में हैं, जबकि कौशल यादव की पत्नी, Purnima Yadav, पास के गोविंदपुर सीट से आरजेडी की उम्मीदवार हैं। कौशल और पुर्णिमा दोनों ही चार-चार बार विधायक रह चुके हैं। यह जोड़ा पहले 2005 में स्वतंत्र रूप से विधानसभा में प्रवेश किया था और फिर नीतीश कुमार के जेडीयू से जुड़ गया।

हालांकि, अब दोनों ने आरजेडी से अपने कदम जोड़ लिए हैं, जब कौशल यादव ने इस साल तेजस्वी यादव के साथ मिलकर अपने राजनीतिक संबंधों को फिर से स्थापित किया। नवादा में राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस पति-पत्नी की एक साथ चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति बिहार की राजनीति में एक दुर्लभ घटना है।

NDA में एक ही परिवार के तीन सदस्य चुनावी मैदान में

जहानाबाद और गया जिलों में अरुण कुमार परिवार ने राजनीतिक परिदृश्य को एक परिवारिक मुद्दा बना दिया है। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्य NDA के अंदर से चुनावी मैदान में हैं। पूर्व सांसद अरुण कुमार के बेटे रीतुराज कुमार, जो अब जेडीयू के टिकट पर घोषी से चुनावी मैदान में हैं, उनके भाई अनिल कुमार, जो चार बार विधायक रह चुके हैं, हम पार्टी (HAM) के टिकट पर टिकारी से चुनावी मैदान में हैं। उनके भतीजे रोमित कुमार भी हम पार्टी के टिकट पर अतरारी से चुनाव लड़ रहे हैं।

यह तीनों सदस्य एक ही परिवार और एक ही राजनीतिक खेमे से आते हैं, जो NDA के भीतर एक परिवार की एकजुटता का अनोखा उदाहरण पेश कर रहे हैं। उनका राजनीतिक आधार जहानाबाद से लेकर गया तक फैला हुआ है, जो कि हम पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जितन राम मांझी का घरवाला क्षेत्र है।

पति की “सुरक्षा” के लिए पत्नी ने किया चुनावी दांव

मोतिहारी में प्रीति कुमारी, जो कि मौजूदा मेयर हैं, एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव में उतर रही हैं। उनके पति, देव कुमार गुप्ता, आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रीति का कहना है कि उनका यह कदम विरोधी दलों की राजनीति के बीच अपने पति की “सुरक्षा” के लिए है। उन्होंने अपनी उम्मीदवारी का कारण बताते हुए कहा कि यह एक प्रकार से अपने पति के चुनावी भविष्य को सुरक्षित रखने का कदम है।

मोतिहारी, जो भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, में प्रीति कुमारी का प्रवेश चुनावी लड़ाई को और भी दिलचस्प बना सकता है। दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में दिवाली के दौरान पुलिस ने उनके घर पर एक ऑपरेशन किया था, जो एक हत्या के मामले से जुड़ा था। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में और भी चर्चा पैदा की है।

चिरैया सीट पर पिता-बेटे का मुकाबला

पूर्वी चंपारण की चिरैया विधानसभा सीट पर इस चुनावी सीजन में राजनीति को एक पीढ़ीगत मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां पूर्व विधायक लक्ष्मीनारायण यादव, जो अब आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, उनके बेटे लालू प्रसाद यादव भी स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर उसी सीट से चुनावी मैदान में हैं।

लक्ष्मीनारायण, जो पहले घोरसाहन से विधायक रह चुके हैं, दो बार विधायक रह चुके हैं और 1990 के दशक से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। उनके बेटे का इस बार चुनाव में उतरना पहले बार है, जब एक पिता और बेटा एक ही विधानसभा सीट से सीधे मुकाबला कर रहे हैं। यह मुकाबला इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प घटना है, क्योंकि यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में राजनीतिक विरासत को लेकर संघर्ष का प्रतीक है।

जोकीहाट में भाई-भाई का मुकाबला

जोकीहाट की राजनीतिक लड़ाई भी परिवार के भीतर की खींचतान को दर्शाती है। यहां दिवंगत सांसद तस्लीमुद्दीन के दो बेटे, सरफराज आलम और शाहनवाज आलम, एक बार फिर एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। शाहनवाज, जिन्होंने 2020 में AIMIM के टिकट पर जीत हासिल की थी और बाद में आरजेडी से जुड़ गए, इस बार फिर से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं उनके बड़े भाई सरफराज आलम, जो पूर्व में सांसद और विधायक रह चुके हैं, जन सूराज पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।

2020 में शाहनवाज ने सरफराज को 7,000 से ज्यादा वोटों से हराया था, जो परिवार के भीतर राजनीतिक शक्ति के बदलाव को दर्शाता है। इस बार का चुनाव यह तय करेगा कि कौन उनके पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगा। यह मुकाबला सिर्फ परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे अररिया क्षेत्र के लिए अहम साबित हो सकता है।

बिहार चुनाव 2025: परिवार, शक्ति और राजनीति का संघर्ष

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में परिवारों के बीच यह राजनीतिक संघर्ष यह दर्शाता है कि राज्य में वंशवादी राजनीति की पुरानी परंपरा अब भी मजबूत है। जहां परिवार, विरासत और राजनीति का संघर्ष अक्सर विचारधारा से ऊपर होता है, वहीं इस चुनाव में भी यह ट्रेंड साफ दिख रहा है।

राजनीतिक परिवारों की ताकत और प्रभाव को समझते हुए, बिहार में चुनावी मैदान अब सिर्फ एक राजनीतिक विचारधारा का संघर्ष नहीं रह गया है। यहां परिजन, रिश्तेदार, और परिवार के सदस्य राजनीतिक अखाड़े में उतरे हुए हैं, जिनके बीच सत्ता और विरासत की लड़ाई चल रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इन पारिवारिक और वंशवादी संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि राज्य की राजनीति पर परिवारों का गहरा प्रभाव है। यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक विचारधारा का नहीं, बल्कि परिवारों के बीच वफादारी और विरासत के संघर्ष का भी प्रतीक बन चुका है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, इन परिवारों की राजनीतिक लड़ाई और भी दिलचस्प हो सकती है। बिहार की राजनीति में यह पारिवारिक जुड़ाव और संघर्ष चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है, जिससे आगामी चुनावों में और भी दिलचस्पी होगी।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

More like this

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

तीन दशक की राजनीति जिसने बांकीपुर की पहचान बदल दी

कौशलेन्द्र झा KKN। आज बांकीपुर का नाम आते ही सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी का...

एक सीट… कई संदेश: आखिर क्यों पूरे बिहार की नजर बांकीपुर पर है?

क्या बांकीपुर का फैसला सिर्फ एक विधायक चुनेगा या बिहार की राजनीति की नई...

बांकीपुर की जंग: भाजपा का अभेद्य किला या प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक परीक्षा?

**KKN Live Special | Election Report KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव ऐसे...

बंटी यादव हत्याकांड: आखिर सच क्या है? पुलिस की कहानी और परिवार के आरोपों के बीच उलझी जांच

KKN ब्यूरो। पटना के बंटी यादव हत्याकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार के किसान और बेरोजगार: आखिर क्या है असली समाधान?

बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी नहीं, आय की कमी है KKN ब्यूरो। बिहार की...

भरत तिवारी एनकाउंटर: कानून का सवाल, जाति की बहस और सच की तलाश

KKN ब्यूरो। भोजपुर के बिलौटी गांव का एक युवक...। फेसबुक लाइव...। पुलिस पर पिस्टल...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...

क्या दुनिया बायोलॉजिकल वेपन के मुहाने पर खड़ी है?

सुपर पावरों की गुप्त प्रयोगशालाएं, अमेरिकी फंडिंग और मानव अस्तित्व पर मंडराता नया खतरा KKN...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...