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लोकसभा में पप्पू यादव का हमला: चीन-पाक सैन्य गठजोड़ और कश्मीर सुरक्षा नीति पर उठाए गंभीर सवाल

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पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में केंद्र सरकार की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सीधे तौर पर पूछा कि पाकिस्तान को चीन और अमेरिका से कितनी सैन्य ताकत मिल रही है, और इस पर सरकार की रणनीति क्या है। सांसद ने हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सरकार की security policy पर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, सरकार इन मुद्दों पर या तो चुप है या इन पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है।

पाकिस्तान को मिल रही मदद पर जवाब मांगा

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पप्पू यादव ने रक्षा मंत्री से यह स्पष्ट करने को कहा कि पाकिस्तान को चीन और अमेरिका से मिल रहे सैन्य सहयोग के विषय में सरकार की जानकारी और प्रतिक्रिया क्या है। उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान जितना खतरनाक दिखता है, उसका बड़ा कारण चीन द्वारा दी जा रही तकनीकी और सामरिक सहायता है। भारत की सेना मजबूत है, इसमें कोई दोराय नहीं, लेकिन असली चुनौती बाहरी सहयोग से पाकिस्तान की बढ़ती ताकत है, जिस पर सरकार सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रही है।

पहलगाम हमले को लेकर केंद्र की नीति पर सवाल

पप्पू यादव ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के संबंध में कहा कि एक महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी चार हमलावरों को पकड़ नहीं पाना यह दर्शाता है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल उठाया, “वे चार आतंकी अब तक कहां हैं? अगर हम उन्हें एक महीने में नहीं पकड़ सके, तो क्या देश सुरक्षित हाथों में है?” उन्होंने कहा कि भारत के 100 सैनिक पाकिस्तान को हराने में सक्षम हैं, लेकिन समस्या यह है कि सरकार उन वास्तविक खतरों पर चर्चा करने से बच रही है, जो चीन-पाक गठजोड़ से पैदा हो रहे हैं।

चीन के हस्तक्षेप पर गहरी चिंता

पप्पू यादव ने चीन के बढ़ते दखल को लेकर संसद में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन सिर्फ पाकिस्तान को तकनीक और हथियार ही नहीं दे रहा, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट डेटा और AI आधारित हथियारों के जरिए एक लंबी रणनीति पर काम कर रहा है। उनका कहना था कि इस विषय पर संसद में कोई ठोस चर्चा नहीं हो रही है और ना ही सरकार इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है। उन्होंने कहा, “सच बोलने की हिम्मत होनी चाहिए, और जनता को यह जानने का हक है कि सरकार इन अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के लिए क्या रणनीति बना रही है।”

विदेश नीति और प्रधानमंत्री की भूमिका पर सीधा हमला

सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने विदेश नीति को प्रचार का माध्यम बना दिया है, जबकि जमीनी स्तर पर इसका असर नगण्य है। उन्होंने कहा कि यदि विदेश दौरों और वैश्विक संबंधों का उद्देश्य भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा है, तो फिर पाकिस्तान और चीन का सैन्य गठजोड़ क्यों मजबूत होता जा रहा है? उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस मोर्चे पर सरकार और प्रधानमंत्री दोनों विफल रहे हैं।

धारा 370 पर सरकार को घेरा

पप्पू यादव ने केंद्र सरकार को धारा 370 को लेकर भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कई सालों से सिर्फ धारा 370 को ही मुद्दा बनाए रखा है, लेकिन इसका जमीनी परिणाम कश्मीर में दिखाई नहीं देता। उन्होंने दावा किया कि 370 हटाने के बाद कश्मीर में आतंकी हमले और असुरक्षा की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का दावा है कि 370 हटाने से शांति आई है, तो फिर कश्मीर में लगातार हो रहे हमलों का जिम्मेदार कौन है?

सुरक्षा नीति में पारदर्शिता की मांग

सांसद ने कहा कि अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को केवल भाषणों और घोषणाओं के भरोसे न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि देश की जनता को जानने का हक है कि हमारी सरकार चीन और पाकिस्तान से मिल रही चुनौती से कैसे निपट रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को केवल सर्जिकल स्ट्राइक या बीते सैन्य अभियानों की कहानियों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता, बल्कि वर्तमान में जो खतरे हैं, उनका समाधान ज़रूरी है।

उन्होंने संसद में सरकार से आग्रह किया कि वे खुफिया तंत्र, आतंक विरोधी ऑपरेशनों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर स्पष्ट नीति बनाकर जनता के सामने रखें। उनका कहना था कि जब तक सरकार पारदर्शिता के साथ अपनी नीतियां नहीं रखेगी, तब तक विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा।

लोकसभा में पप्पू यादव की यह मुखर उपस्थिति और सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक नई बहस की शुरुआत है। उन्होंने जिन विषयों को उठाया, वे केवल कश्मीर या चीन-पाकिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे South Asia के geo-political landscape से जुड़े हैं। उनके सवाल सरकार के लिए चुनौती हैं कि वह अब केवल प्रचार नहीं, बल्कि ठोस रणनीति और ground-level action पर ध्यान दे।

जैसे-जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और जटिल होता जा रहा है, संसद में इस तरह की स्पष्ट और तथ्य आधारित बहसें यह संकेत देती हैं कि जनता अब जवाब चाहती है, भाषण नहीं। पप्पू यादव के सवालों ने निश्चित रूप से सरकार पर दबाव बढ़ाया है कि वह सुरक्षा नीति में पारदर्शिता लाए और असली खतरों से निपटने के लिए स्पष्ट और प्रभावी नीति पेश करे।

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