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PMCH में वेतन कटौती के खिलाफ नर्सों का प्रदर्शन

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पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत नर्सों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वेतन कटौती के विरोध में नर्सों ने अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। नर्सों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके वेतन में कटौती कर दी गई। इस फैसले से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

अचानक वेतन कटौती से नर्सों में आक्रोश

प्रदर्शन कर रही नर्सों का कहना है कि Salary Cut का फैसला पूरी तरह से एकतरफा है। उन्हें न तो पहले कोई जानकारी दी गई और न ही कोई लिखित आदेश सौंपा गया। जब वेतन मिला, तभी कटौती का पता चला। इस अचानक फैसले से नर्सों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ा है।

नर्सों के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत कुल 415 नर्सों के वेतन में कटौती की गई है। इससे न केवल उनका मनोबल टूटा है, बल्कि परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है।

चार दिनों से समाधान की कोशिश बेनतीजा

नर्सों ने बताया कि पिछले चार दिनों से वे लगातार अस्पताल अधीक्षक से मुलाकात करने की कोशिश कर रही हैं। उनका उद्देश्य बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालना था। हालांकि अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

नर्सों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। वेतन कटौती को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसी कारण कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।

आर्थिक दबाव बढ़ने का दावा

प्रदर्शनकारी नर्सों ने कहा कि पहले से ही महंगाई का बोझ बढ़ा हुआ है। ऐसे में वेतन में कटौती उनके लिए बड़ा झटका है। कई नर्सों ने बताया कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों को निभाना कठिन हो गया है।

नर्सों का कहना है कि वे अस्पताल में दिन-रात मरीजों की सेवा करती हैं। इसके बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

30 दिसंबर तक का Deadline तय

नर्सों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर 30 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 31 दिसंबर से कार्य बहिष्कार करेंगी। इसके बाद अस्पताल में अनिश्चितकालीन Strike शुरू की जाएगी।

नर्सों ने यह भी कहा कि यह कदम वे मजबूरी में उठाएंगी। उनका उद्देश्य किसी को परेशानी में डालना नहीं है। लेकिन लगातार अनदेखी के चलते अब उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है।

अस्पताल सेवाओं पर पड़ सकता है असर

नर्सों की हड़ताल की चेतावनी से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। Patna Medical College Hospital राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

अगर नर्सें हड़ताल पर जाती हैं, तो अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खासकर आपात सेवाओं और वार्ड संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी

अब तक PMCH प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वेतन कटौती की वजह को लेकर भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इस चुप्पी ने नर्सों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

नर्सों का कहना है कि वे लिखित आश्वासन चाहती हैं। जब तक कटौती वापस नहीं ली जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन ने पकड़ा जोर

अस्पताल परिसर में लगातार नर्सों की संख्या बढ़ रही है। प्रदर्शन के दौरान नर्सों ने नारेबाजी कर अपनी मांगें दोहराईं। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे मरीजों की सेवा कर रही हैं, लेकिन धैर्य की भी एक सीमा होती है।

नर्सों ने साफ कहा कि अगर प्रशासन समय रहते फैसला नहीं लेता, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शनकारी नर्सों ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि Frontline Health Workers के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

नर्सों को उम्मीद है कि उच्च स्तर से दखल मिलने पर समस्या का समाधान निकल सकता है। इससे अस्पताल में कामकाज भी सामान्य बना रहेगा।

बढ़ता तनाव और नजदीक आता फैसला

31 दिसंबर की तारीख नजदीक आने के साथ ही अस्पताल में तनाव का माहौल बना हुआ है। नर्सों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

अस्पताल सूत्रों का कहना है कि मामला गंभीर है, लेकिन अभी तक किसी औपचारिक बैठक की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

PMCH में नर्सों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि वेतन कटौती जैसे फैसले कर्मचारियों के बीच असंतोष पैदा करते हैं। समय रहते समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। अब जरूरत है कि प्रशासन संवाद के जरिए स्थिति को संभाले और जल्द कोई ठोस निर्णय ले।

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