मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में उठी मांग, विधायक अजय कुमार की मांग के मायने क्या हैं
KKN ब्यूरो। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान जब काफिला मुजफ्फरपुर के अहियापुर बाजार समिति पहुँचा, तो मंच से एक मांग ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। मीनापुर से विधायक अजय कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “झपहां को मुजफ्फरपुर का पूर्वी अनुमंडल बनाया जाए।” यह कोई भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी तर्कों पर खड़ी मांग थी।
झपहां क्यों? पूर्वी अनुमंडल की ज़रूरत कहां से आई
वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिला प्रशासनिक रूप से अत्यधिक विस्तृत है। पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के लोगों को आज भी छोटे-छोटे अनुमंडल स्तरीय प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक आना पड़ता है।
झपहां को अनुमंडल बनाने से क्या बदलेगा?
- प्रशासनिक लाभ
- थाना, अंचल और अनुमंडल कार्यालय पास-पास होंगे
- भूमि विवाद, जाति-आय प्रमाण पत्र और न्यायिक प्रक्रियाएं तेज़ होंगी
- आर्थिक प्रभाव
- सरकारी दफ्तरों से लेकर स्थानीय बाज़ार, होटल और परिवहन को बढ़ावा मिलेगा
- युवाओं के लिए सरकारी और निजी रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे
- सामाजिक असर
- मीनापुर, बोचहां, गायघाट और औराई जैसे इलाकों की सीधी प्रशासनिक पहुंच होगी
- पलायन और बिचौलिया तंत्र पर लगाम लगेगा
विधायक ने यही मांग यहीं क्यों उठाई?
मीनापुर विधायक अजय कुमार के लिए यह मांग तीन स्तरों पर रणनीतिक है:
- स्थानीय जनभावना
लंबे समय से पूर्वी मुजफ्फरपुर के लोग अनुमंडल की मांग कर रहे हैं। विधायक ने उसी आवाज़ को मंच दिया है। - राजनीतिक संकेत
समृद्धि यात्रा के दौरान सीधे मुख्यमंत्री से मांग रखकर उन्होंने यह संकेत दिया कि वे केवल विधायक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के दावेदारी वाले नेता हैं। - 2029 की तैयारी
आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा मीनापुर और आसपास की सीटों में बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बन सकता है।
क्या सरकार मानेगी यह मांग?
बिहार में नए अनुमंडल या जिले का गठन आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए:
- प्रशासनिक सर्वे
- जनसंख्या व भौगोलिक अध्ययन
- वित्तीय भार का आकलन
- मंत्रिमंडलीय मंजूरी जरूरी है
हालांकि, नीतीश कुमार का प्रशासनिक इतिहास बताता है कि जहां दीर्घकालिक प्रशासनिक लाभ दिखता है, वहां निर्णय असंभव नहीं होता।
राजनीति बनाम प्रशासन: असली परीक्षा
झपहां को पूर्वी अनुमंडल बनाना सिर्फ एक नक्शे की रेखा बदलना नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि— क्या विकास राजधानी से बाहर भी बराबरी से पहुंचेगा? क्या बिहार की प्रशासनिक संरचना 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार बदलेगी?
अहियापुर में उठी आवाज़ आने वाले समय में मुजफ्फरपुर की प्रशासनिक राजनीति की दिशा तय कर सकती है। अब गेंद सरकार के पाले में है— क्या झपहां सिर्फ एक मांग बनकर रह जाएगा, या सच में झपहां पूर्वी मुजफ्फरपुर की नई प्रशासनिक राजधानी बनेगा?
