Home Bihar मुजफ्फरपुर में दारोगा की रिश्वतखोरी का ऑडियो वायरल, प्रशासन में हड़कंप

मुजफ्फरपुर में दारोगा की रिश्वतखोरी का ऑडियो वायरल, प्रशासन में हड़कंप

बिहार में सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच मुजफ्फरपुर जिले से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां के मिठनपुरा थाना में तैनात एक दारोगा का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुलेआम रिश्वत की मांग करता सुनाई दे रहा है। यह ऑडियो उस वक्त सामने आया जब दारोगा सुभाष राम ने जब्त की गई बाइक छोड़ने के बदले पैसे की डिमांड की।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में रिश्वत की मांग

वायरल ऑडियो में सुभाष राम और एक व्यक्ति के बीच बातचीत हो रही है। इस बातचीत में दारोगा दो टूक लहजे में कहता है, “हम बाइक नहीं छोड़ेंगे… शाम में बड़ा बाबू 5000 मांगेंगे, तो कहां से देंगे?” इस बयान से यह साफ होता है कि यह रिश्वत की मांग सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल कथित तौर पर उच्च अधिकारियों तक फैला हुआ है। बातचीत में दारोगा यह भी कहता है कि यह पैसा उनकी जेब में नहीं जाएगा, बल्कि यह ‘बड़े बाबू’ (थानाध्यक्ष) तक पहुंचना जरूरी है, तभी उनका काम पूरा होगा।

आरोपों के बाद प्रशासन में हड़कंप

यह ऑडियो वायरल होते ही पुलिस मुख्यालय और स्थानीय जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। अब सवाल उठने लगे हैं कि यदि पुलिस के अंदर ही इस तरह की घूसखोरी हो रही है, तो आम जनता को न्याय कहां से मिलेगा? लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो जनता किससे मदद मांगेगी? इस घटना के गंभीर होने के कारण वरीय पुलिस अधिकारियों ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया।

पुलिस ने लिया तुरंत एक्शन

टाउन एसडीपीओ (SDPO) सुरेश कुमार ने मीडिया को बताया कि वायरल ऑडियो की प्राथमिक जांच कराई गई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद मिठनपुरा थाना के दारोगा सुभाष राम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इस मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस पूरी तरह से इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास कर रही है।

जमीन विवाद से जुड़ा मामला

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। सतीश कुमार ठाकुर नामक एक व्यक्ति का मिठनपुरा थाना क्षेत्र में कुछ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उन्होंने पहले भी मुसहरी थाना में रंगदारी और जान से मारने की धमकी को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, इसके बावजूद अपराधियों ने इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया और पुलिस को खुली चुनौती दी।

घूसखोरी का यह खेल उच्च अधिकारियों तक फैला हो सकता है

यह घटना एक गंभीर संकेत है कि पुलिस विभाग के अंदर भ्रष्टाचार का यह खेल केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है। दारोगा के बयान से यह जाहिर होता है कि इस तरह की वसूली उच्च अधिकारियों तक पहुंचने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह और भी चिंताजनक है क्योंकि यदि रिश्वतखोरी का यह सिलसिला विभाग के उच्चाधिकारियों तक फैला हुआ है, तो सिस्टम में सुधार की जरूरत और भी बढ़ जाती है।

पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह घटना बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। अगर वही लोग जो कानून की रक्षा करने के लिए तैनात हैं, वही कानून तोड़ते हुए रिश्वत मांग रहे हैं, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है? इस तरह के मामलों में पुलिस की निष्पक्षता और जनता के प्रति विश्वास पर गहरा असर पड़ता है। अब यह देखना होगा कि क्या राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस तरह के भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाते हैं।

आगे की जांच और कार्रवाई

पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। उच्च अधिकारियों ने सुनिश्चित किया है कि जल्द ही इस मामले में पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि विभाग में सुधार की जरूरत है, ताकि ऐसे मामले दोबारा न हों।

मुजफ्फरपुर में दारोगा द्वारा रिश्वत मांगने का यह मामला बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। यह घटना राज्य के सुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की असली स्थिति को उजागर करती है। फिलहाल पुलिस द्वारा इस पर त्वरित कार्रवाई की गई है, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए और अधिक कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version