बिहार में INDIA गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा गुरुवार को अपने 12वें दिन सीतामढ़ी पहुंची। इस मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने प्रसिद्ध जानकी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर माता सीता का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर और बाहर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
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जानकी मंदिर में पूजा के साथ हुई शुरुआत
गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने माता जानकी के दर्शन किए। उन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजा की और इसके बाद यात्रा को आगे बढ़ाया। पूजा की तस्वीरें कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल Media हैंडल पर साझा कीं, जिन्हें देखते ही हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी।
अब तक का सफर
यात्रा गयाजी, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जैसे जिलों से गुजरते हुए 12वें दिन सीतामढ़ी पहुंची है। हर जिले में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया।
आगे का कार्यक्रम
सीतामढ़ी से यह यात्रा पश्चिमी चंपारण, सारण और भोजपुर होते हुए 16वें दिन पटना पहुंचेगी। खास बात यह है कि इस बार समापन पर कोई रैली नहीं बल्कि एक Patna March आयोजित होगा। यह मार्च एक सितंबर को होगा और इसमें महागठबंधन के शीर्ष नेता कई स्थानों पर लोगों को संबोधित करेंगे।
कार्यकर्ताओं में उत्साह
सीतामढ़ी में यात्रा के दौरान माहौल बेहद जोशीला रहा। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और नेताओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया। स्थानीय युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने यह दिखाया कि वोटर अधिकार यात्रा धीरे-धीरे एक जनआंदोलन का रूप ले रही है।
यात्रा का राजनीतिक संदेश
यह यात्रा केवल राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन बताई जा रही है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों इसे जनता की आवाज़ और लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल के रूप में पेश कर रहे हैं।
जानकी मंदिर दर्शन का प्रतीकात्मक महत्व
सीतामढ़ी माता सीता की जन्मभूमि मानी जाती है। ऐसे में यात्रा की शुरुआत यहां से करने और मंदिर में पूजा करने को जनता से भावनात्मक जुड़ाव का कदम माना जा रहा है। यह दिखाता है कि गठबंधन अपने संदेश को सांस्कृतिक आस्था से भी जोड़ना चाहता है।
बिहार में INDIA गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा का सीतामढ़ी पड़ाव बेहद खास रहा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के माता जानकी मंदिर में दर्शन ने यात्रा को धार्मिक और सांस्कृतिक गहराई दी। अब यह यात्रा पश्चिमी चंपारण, सारण और भोजपुर होते हुए पटना पहुंचेगी, जहां एक सितंबर को होने वाला Patna March इस पूरे अभियान का निर्णायक पड़ाव साबित होगा। यह यात्रा आने वाले चुनावी समीकरणों पर गहरा असर डाल सकती है और बिहार की राजनीति में नई दिशा दिखा सकती है।
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