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बक्सर जिले में एक मां ने तीन बच्चों के साथ खुद भी खाया ज़हर

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बिहार के बक्सर जिले के नया भोजपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपने तीन बच्चों के साथ जहर खा लिया। मंगलवार की रात, नया भोजपुर गांव में यह दर्दनाक घटना घटी। जानकारी के अनुसार, सबिता देवी ने अपनी 5 साल की बेटी ज्योति, 3 साल के बेटे आकाश और 1 साल के बेटे विकास कुमार को जहर दिया और फिर खुद भी जहर खा लिया।

घटना का विवरण

सुनील कुमार, जो पेशे से एक राजमिस्त्री हैं, जब दिनभर के काम से घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनका पूरा परिवार अचेत अवस्था में पड़ा था। वह जोर-जोर से चिल्लाए, जिससे आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। फिर सभी को तुरंत सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने सबिता और उसके दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। हालांकि, उनके छोटे बेटे विकास की हालत गंभीर है और उसे बेहतर इलाज के लिए बक्सर से रेफर कर दिया गया है।

घरेलू विवाद और आर्थिक तंगी

गांववासियों के अनुसार, सबिता का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उसके पति सुनील कुमार घरेलू उपकरणों की मरम्मत का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। गांव में यह चर्चा थी कि सबिता और सुनील के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जो इस घटना की वजह बना। बताया गया कि यह घरेलू विवाद इतना गंभीर हो गया कि सबिता ने अपने बच्चों के साथ ऐसा कठोर कदम उठा लिया, जिससे पूरे गांव में शोक का माहौल है।

मौत के कारण और घटना की जांच

परिजनों के मुताबिक, सबिता ने पहले अपने बच्चों ज्योति, आकाश और विकास को जहर दिया, और फिर खुद भी वही जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उनकी हालत बिगड़ी, तो परिजनों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन बचाने का प्रयास नाकाम रहा। सबिता, ज्योति और आकाश की मौत हो गई, जबकि विकास की हालत नाजुक बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए बक्सर अस्पताल भेजा गया है।

इस घटना के बाद, नया भोजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस इस बात की तहकीकात कर रही है कि जहर का सेवन क्यों किया गया और क्या यह कदम घरेलू विवाद के कारण उठाया गया था। पुलिस ने इस मामले में परिजनों, दोस्तों और गांववासियों से पूछताछ की है, ताकि इस दुखद घटना के कारणों का पता चल सके।

एक दुखद कहानी

नया भोजपुर गांव में यह घटना एक बड़े हादसे की तरह सामने आई। सबिता के परिवार को लेकर गांव में सभी हैरान हैं। गांववाले बताते हैं कि सबिता का परिवार हमेशा खुश रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी और घरेलू विवाद ने इस परिवार को इस दर्दनाक कदम तक पहुंचा दिया। सबिता का यह कदम पूरी तरह से अविश्वसनीय है, और अब लोग इस घटना को लेकर अचंभित हैं कि एक मां अपने बच्चों के साथ ऐसा क्यों कर सकती थी।

सभी को इस बात का खेद है कि ऐसा कदम उठाने वाली सबिता का अब कोई भविष्य नहीं है, और उसके तीन बच्चों में से दो की मौत हो गई है। उनका एकमात्र बेटा, विकास, जो अभी जीवित है, वह भी गंभीर स्थिति में है। उसकी जान बचाने के लिए परिजन और अस्पताल की पूरी कोशिशें जारी हैं।

परिवार और गांव में शोक की लहर

इस हादसे के बाद, सबिता के परिवार में गहरा शोक फैल गया है। उनकी मौत के बाद गांववासियों ने इसे एक अप्रत्याशित और दिल दहला देने वाली घटना माना है। गांववाले बताते हैं कि सबिता और सुनील के बीच जो विवाद हुआ था, उसका कोई ठोस कारण नहीं था। हालांकि, उनका यह कदम उन सभी के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है। गांव में सभी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या घरेलू तनाव और आर्थिक परेशानियों के चलते इस परिवार ने यह कदम उठाया।

पुलिस की जांच और परिवार का भविष्य

पुलिस इस मामले में गहरी छानबीन कर रही है। जहर खाने के कारण और अन्य परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या यह मामला केवल घरेलू विवाद का परिणाम था या कुछ और कारण थे।

सबिता की मौत ने उसके परिवार को असहनीय दुख दिया है। उनके पति और बच्चों के लिए यह समय बेहद कठिन है। परिवार अब इस दर्दनाक घटना से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि विकास की हालत गंभीर बनी हुई है।

इस घटना ने यह संदेश दिया है कि आर्थिक तनाव और घरेलू विवाद कभी भी किसी व्यक्ति को आत्मघाती कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यह दुखद घटना इस बात का उदाहरण है कि हमें अपनी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर जब हम आर्थिक संकट और घरेलू समस्याओं का सामना कर रहे होते हैं।

नया भोजपुर गांव में हुई यह घटना गांव के लोगों और पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। यह घटना हमें यह समझने का अवसर देती है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समाज में आर्थिक संकट और घरेलू समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को समर्थन और सहायता देने की जरूरत है, ताकि वे इस तरह के कठोर कदम उठाने से बच सकें।

यह एक ऐसी घटना है, जिसे गांव और परिवार कभी नहीं भूल पाएंगे। सबिता और उसके बच्चों की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है, और अब सबकी उम्मीदें केवल इस बात पर हैं कि विकास की हालत में सुधार हो और वह इस संकट से उबर सके।

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