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बिहार में दलित नेता मनीष पासवान कांग्रेस में शामिल, जिग्नेश मेवाणी और राजेश राम ने किया स्वागत

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KKN गुरुग्राम डेस्क | बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में दलित अधिकार मंच के युवा नेता मनीष पासवान ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। यह कार्यक्रम बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में आयोजित एक विशेष मिलन समारोह के दौरान हुआ, जहां प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व विधायक जिग्नेश मेवाणी की मौजूदगी रही।

इस कदम को कांग्रेस पार्टी की दलित समाज में पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर बिहार जैसे राज्य में जहां जातिगत समीकरण चुनावी जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं।

 कौन हैं मनीष पासवान?

मनीष पासवान बिहार के युवा और सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक हैं, जो पिछले कई वर्षों से दलित अधिकार मंच के माध्यम से वंचित समाज के हक और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे शिक्षा, सामाजिक न्याय और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों पर निरंतर आंदोलन करते रहे हैं।

कांग्रेस में शामिल होते समय मनीष ने कहा:

“कांग्रेस पार्टी ने हमेशा दलित समाज को सम्मान दिया है, चाहे वह बिहार हो या देश का कोई और हिस्सा। पार्टी की सोच और इतिहास से प्रभावित होकर मैंने कांग्रेस की सदस्यता ली है।”

 राजेश राम का बयान: कांग्रेस को मिलेगा सामाजिक आधार

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने मनीष पासवान का स्वागत करते हुए कहा:

“मनीष पासवान युवा हैं, ऊर्जावान हैं और वर्षों से दलित समाज के लिए संघर्षरत हैं। उनके आने से कांग्रेस को वंचित वर्गों में मजबूती मिलेगी और हमारा जनाधार बढ़ेगा।”

राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य है कि दलित, पिछड़े, महिला और अल्पसंख्यक वर्ग के युवा नेतृत्व को मंच दिया जाए, ताकि सामाजिक न्याय की विचारधारा को आगे बढ़ाया जा सके।

जिग्नेश मेवाणी का संदेश: कांग्रेस को दलित युवा देख रहे भविष्य के रूप में

जिग्नेश मेवाणी, जो स्वयं गुजरात के वडगाम से विधायक हैं और देश के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं, ने कार्यक्रम में कहा:

“राहुल गांधी लगातार दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के हक में संघर्ष कर रहे हैं। आज का युवा इस संघर्ष से प्रभावित होकर कांग्रेस से जुड़ रहा है। मनीष पासवान का कांग्रेस में आना इस बात का प्रमाण है कि दलित युवा कांग्रेस में अपना भविष्य देख रहे हैं।“

मेवाणी ने यह भी कहा कि कांग्रेस अब एक ऐसी पार्टी बनती जा रही है जो सामाजिक न्याय को अपने राजनीतिक केंद्र में रखती है।

मिलन समारोह में मौजूद रहे प्रमुख नेता

इस मिलन समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ और युवा नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • डॉ. शकील अहमद खान

  • रतन लाल

  • जितेन्द्र गुप्ता

  • प्रवीण सिंह कुशवाहा

  • मंजीत आनन्द साहू

  • शकीलुर रहमान

  • ब्रजेश प्रसाद मुनन

इन सभी नेताओं ने मनीष पासवान का कांग्रेस परिवार में स्वागत किया और उनके साथ मिलकर काम करने की बात कही।

 बिहार में कांग्रेस की रणनीति: दलित और वंचित वर्ग पर फोकस

बिहार की राजनीति में राजद, जदयू और लोजपा जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के वर्चस्व के चलते कांग्रेस का जनाधार कम हुआ है। लेकिन अब कांग्रेस दलित और वंचित वर्ग के मुद्दों पर मुखर हो रही है।

कांग्रेस की रणनीति है:

  • दलित और पिछड़े वर्ग के युवाओं को संगठन में नेतृत्व देना

  • सामाजिक न्याय यात्रा और जन संवाद कार्यक्रम आयोजित करना

  • अनुसूचित जाति-जनजाति से आने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट देना

  • विश्वविद्यालयों और छात्र संगठनों से सीधा संवाद बढ़ाना

 कांग्रेस और दलित समाज: ऐतिहासिक रिश्ता

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दलित समाज से पुराना रिश्ता रहा है, लेकिन समय के साथ यह संबंध कमजोर होता गया। अब पार्टी दोबारा इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में है।

राहुल गांधी, जिग्नेश मेवाणी, उदित राज जैसे नेताओं के माध्यम से पार्टी ने देश भर में दलित मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है — जैसे कि:

  • निजी क्षेत्र में आरक्षण

  • शिक्षा और छात्रवृत्ति

  • सफाईकर्मियों के अधिकार

  • भूमि अधिकार और सुरक्षा

 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: सकारात्मक संकेत

मनीष पासवान के कांग्रेस में शामिल होने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे जैसे:

  • #ManishPaswan

  • #CongressDalitStrategy

  • #JigneshInPatna

  • #DalitYouthForCongress

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कांग्रेस की ओर से एक रणनीतिक कदम है जो 2025 बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

मनीष पासवान जैसे जमीनी नेता का कांग्रेस में शामिल होना केवल एक सदस्यता अभियान नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है। यह संदेश है कि कांग्रेस अब पिछड़े, वंचित और दलित समाज को केंद्र में रखकर राजनीति करने को तैयार है।

आने वाले दिनों में कांग्रेस इस दिशा में और भी बड़े कदम उठा सकती है, जिससे उसका राजनीतिक आधार मजबूत हो और बिहार की राजनीति में फिर से एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरे।

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