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बिहार चुनाव 2025, जानिए कौन सी पार्टी आगे?

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। अब तक के रुझानों के अनुसार, राज्य में एनडीए को बहुमत मिल चुका है और महागठबंधन 70 सीटों पर आगे चल रहा है। पहले दो घंटों के बाद, एनडीए ने 161 सीटों पर बढ़त बना ली है, जबकि बिहार में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 122 सीटें है। इन प्रारंभिक रुझानों से यह साफ हो रहा है कि एनडीए का प्रदर्शन अच्छा हो सकता है।

पार्टी वाइज रुझान

दो घंटे की गिनती के बाद जो परिणाम सामने आए हैं, उनके अनुसार एनडीए के गठबंधन में बीजेपी को 69 सीटों पर बढ़त है, जबकि जेडीयू ने 75 सीटों पर आगे चलने की खबर दी है। चिराग पासवान की पार्टी LJP को 13 सीटों पर, वहीं हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) को 3 सीटों और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 1 सीट मिलती दिख रही है।

महागठबंधन में आरजेडी को 51 सीटों पर बढ़त मिल रही है, कांग्रेस 12 सीटों पर आगे है, और वाम दलों को 3 सीटों पर बढ़त मिली है। VIP को 1 सीट पर बढ़त दिखाई दे रही है।

मुख्य सीटों पर रुझान

बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में तगड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। रोहतास जिले के काराकाट विधानसभा क्षेत्र में जेडीयू के महाबली सिंह 1501 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं। उन्होंने CPI (ML) के उम्मीदवार अरुण कुमार और निर्दलीय ज्योति सिंह को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, वारसलीगंज में भाजपा के उम्मीदवार अरुण कुमार ने 2993 वोटों से बढ़त बनाई है।

नालंदा जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से छह पर एनडीए बढ़त बनाए हुए हैं। केवल हिलसा विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। नालंदा के इस्लामपुर सीट से जेडीयू के उम्मीदवार 128 वोटों की बढ़त के साथ आगे हैं। सिकटा विधानसभा से जेडीयू के समृद्ध वर्मा 5115 वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि तरारी से माले के उम्मीदवार मदन सिंह भी आगे हैं।

बिहार चुनाव का दो चरणों में आयोजन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो चरणों में हुए थे। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर वोटिंग हुई थी और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान हुआ। इस बार का मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच है। अधिकांश एग्जिट पोल्स में एनडीए को बढ़त मिलती दिखी थी और शुरुआती रुझानों में भी यही तस्वीर नजर आ रही है।

जेडीयू की प्रतिक्रिया

जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने शुरुआती रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “चुनाव से पहले मैंने कहा था कि जेडीयू 80 सीटों के आसपास जीतने वाली है। कांग्रेस पार्टी को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा।” उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि जेडीयू को अपनी उम्मीदों के अनुसार सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है।

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने बिहार में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और उनके नेतृत्व में जेडीयू को इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद थी। पार्टी ने पहले ही अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से चुनाव के परिणाम को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की अपील की थी।

चुनाव में कड़ी टक्कर

भले ही एनडीए को शुरुआती रुझानों में बढ़त मिली हो, लेकिन महागठबंधन भी कई सीटों पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक रूप से महागठबंधन को समर्थन मिलता है, वहां वे काफी आगे चल रहे हैं। बिहार की राजनीति हमेशा से ही जटिल रही है, और हर चुनाव में जाति, क्षेत्रीय मुद्दे और स्थानीय नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

फाइनल परिणाम आने में कुछ समय लगेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि बिहार में सरकार बनाने के लिए एनडीए और महागठबंधन दोनों के पास मजबूत समर्थन है।

बिहार की राजनीति का भविष्य

बिहार के चुनाव परिणाम अगले पांच वर्षों के लिए राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। अगर एनडीए की बढ़त कायम रहती है, तो नीतीश कुमार को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है। वहीं, अगर महागठबंधन वापसी करता है, तो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है।

इसके अलावा, चुनाव परिणाम यह भी तय करेंगे कि बिहार में आने वाले वर्षों में कौन से महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे। बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियां आगामी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होंगी।

अब तक के रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि एनडीए और महागठबंधन दोनों में कड़ी टक्कर है। चुनाव के बाद की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कई सीटों पर रुझान लगातार बदल रहे हैं। बिहार की जनता ने जिस तरह से मतदान किया है, उससे यह साफ है कि राज्य में एक बार फिर से बहुमत की सरकार बनने जा रही है।

जैसे-जैसे काउंटिंग पूरी होती जाएगी, तस्वीर और साफ होगी, और हम आपको परिणामों के बारे में ताजे अपडेट्स देंगे।

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