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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA और महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान, कौन बनेगा बड़ा भाई?

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KKN गुरुग्राम डेस्क | बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक दलों में सरगर्मी तेज हो चुकी है। एक ओर जहां भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते राष्ट्रीय माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर बिहार में सभी प्रमुख गठबंधन — एनडीए (NDA) और महागठबंधन (MGB) — अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।

राजनीतिक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। सभी दल अपने गठबंधन में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

NDA में सीट शेयरिंग का प्रारंभिक फार्मूला तय

एनडीए में भाजपा और जेडीयू ने आपस में सीटों के बंटवारे का खाका लगभग तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, 243 सीटों में से दोनों दल लगभग बराबर सीटों पर लड़ेंगे

प्रमुख बिंदु:

  • भाजपा और जेडीयू के बीच एक सीट का अंतर संभव है, जिससे तय होगा कि कौन ‘बड़ा भाई’ और कौन ‘छोटा भाई’ होगा।

  • सहयोगी दलों को सीटें इन दोनों प्रमुख दलों के हिस्से से ही मिलेंगी।

  • उपेन्द्र कुशवाहा की RLSP और जीतनराम मांझी की HAM को 10-10 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि वे क्रमशः 15 और 40 सीटों की मांग कर रहे हैं।

हाल ही में उपेन्द्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बीच हुई बैठक को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

चिराग पासवान को साधने की जिम्मेदारी भाजपा पर

एनडीए में एक बड़ी चुनौती लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान को लेकर भी है। पिछली बार के चुनाव में चिराग ने जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे, जिससे जेडीयू को लगभग 3 दर्जन सीटों का नुकसान हुआ था।

स्थिति का विश्लेषण:

  • चिराग ने भाजपा को तो बख्शा था, लेकिन जेडीयू को नुकसान पहुंचाया।

  • उनकी पार्टी लोजपा बाद में दो भागों में बंट गई, और चिराग अकेले सांसद बचे।

  • अब नीतीश कुमार ने चिराग से बात करने की जिम्मेदारी भाजपा पर छोड़ दी है।

  • भाजपा उन्हें 10–15 सीटों के बीच में सीमित करने की योजना पर काम कर रही है।

महागठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान जारी

महागठबंधन (MGB) में भी सीट बंटवारे को लेकर समीकरण जटिल बनते जा रहे हैं। राजद सबसे बड़ा घटक दल है और वह ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़ने का मन बना चुका है।

MGB की रणनीति:

  • राजद (RJD) कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है (2020 में 144 पर लड़ा था)।

  • कांग्रेस को इस बार 50 से कम सीटें मिल सकती हैं, क्योंकि VIP और CPI(ML) को सीटें देना भी जरूरी हो गया है।

  • VIP 60 सीटें मांग रही है, लेकिन 12-15 सीटें ही मिलने की संभावना है।

  • CPI (ML) ने 2020 में 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 सीटें जीती थीं, इस बार उसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।

इस समीकरण से साफ है कि कांग्रेस की सीटें काट कर ही अन्य सहयोगियों को जगह दी जा रही है, जिससे कांग्रेस में नाराजगी है।

कांग्रेस की स्थिति और सीएम फेस पर अड़चन

कांग्रेस न केवल ज्यादा सीटें, बल्कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय करने की भी कोशिश कर रही है। लेकिन राजद इसे स्वीकार नहीं कर रही। इसके चलते महागठबंधन के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं

राजद इस बार चुनावी रणनीति में पूरा दबदबा बनाए रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपने कमजोर प्रदर्शन के बावजूद अधिक भागीदारी की मांग कर रही है।

पाकिस्तान तनाव के बीच NDA को मिल सकता है लाभ

हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और भारत की सख्त जवाबी कार्रवाई ने राष्ट्रीय सुरक्षा को एक बार फिर से चुनावी मुद्दा बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि:

  • एनडीए इस राष्ट्रवादी माहौल का राजनीतिक लाभ उठा सकता है

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार पर खास ध्यान देना शुरू कर दिया है।

  • कई रैलियां और योजनाओं के उद्घाटन संभावित हैं।

हालांकि, अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर को लेकर विपक्ष केंद्र पर हमला बोल सकता है, और जनता की भावनाओं से इतर फैसले की आलोचना कर सकता है।

विधानसभा सीट बंटवारे का संभावित प्रारूप

दल / गठबंधन 2020 में लड़ी गई सीटें 2025 में संभावित सीटें
राजद 144 150
कांग्रेस 70 <50
CPI(ML) 19 25–30
VIP पहली बार 12–15
भाजपा 121 ~121–122
जेडीयू 122 ~121–122
लोजपा (चिराग) जेडीयू के खिलाफ सभी 10–15
HAM, RLSP <20 10-10

बिहार में इस बार का चुनाव केवल सीटों का ही नहीं, बल्कि गठबंधनों के अस्तित्व और दबदबे का भी इम्तिहान होगा। जहां एनडीए में सीटों का तालमेल बनता दिख रहा है, वहीं महागठबंधन में वर्चस्व की लड़ाई और अंदरूनी असहमति का असर देखने को मिल सकता है।

अब देखना यह है कि अंतिम रूप से सीट बंटवारे की घोषणा के बाद कौन गठबंधन अधिक संगठित होकर मैदान में उतरता है। बिहार की जनता एक बार फिर से तय करेगी कि सत्ता की कुर्सी किसे मिलेगी।

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