1858… ग्वालियर का कोटा-सराय मैदान… और इतिहास की वो सुबह जब एक स्त्री ने मौत से भी मोलभाव कर लिया!
यह कहानी केवल एक रानी की नहीं, बल्कि उस वीरांगना की है जिसने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
इस वीडियो में जानिए —
⚔️ मणिकर्णिका से झांसी की रानी बनने तक का सफर
? 1857 की क्रांति में रानी की निर्णायक भूमिका
? ग्वालियर के युद्ध में आख़िरी सांस तक की लड़ाई
? वो आख़िरी शब्द — “मेरा शरीर अंग्रेज़ों के हाथ नहीं लगना चाहिए”
? यह सिर्फ़ इतिहास नहीं… बल्कि भारत की आत्मा की आवाज़ है!
https://youtu.be/EJKY5_rqTc4
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