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जमुई-लखीसराय बॉर्डर पर भीषण हादसा, इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन छात्रों की दर्दनाक मौत

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बिहार के जमुई और लखीसराय जिले की सीमा पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब छात्र एक CNG ऑटो से लखीसराय स्टेशन की ओर परीक्षा देने के लिए जा रहे थे। रास्ते में ऑटो सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गया। हादसा इतना भयानक था कि तीनों छात्रों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य छात्र और चालक किसी तरह खाई में गिरकर जान बचाने में सफल रहे।

परीक्षा देने जा रहे थे छात्र, अचानक हो गया हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवसोना गांव स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन छात्र और गांव के दो अन्य युवक लखीसराय से सुबह 6 बजे ट्रेन पकड़ने वाले थे। इसी कारण वे सभी छात्र सुबह जल्दी सीएनजी ऑटो से गांव से लखीसराय के लिए रवाना हुए। ऑटो में कुल छह लोग सवार थे।

यात्रा के दौरान ऑटो अचानक सड़क के किनारे खड़े एक भारी ट्रक से टकरा गया। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि तीन छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त ट्रक सड़क किनारे बिना किसी चेतावनी चिन्ह के खड़ा था। वहीं, हादसे में बचे दो छात्र और ऑटो चालक खाई में गिरने के कारण किसी तरह बच गए।

दो जिलों की सीमा पर अटका कार्रवाई का पहिया

हादसे की खबर मिलते ही तेतरहाट थाना के प्रभारी मृत्युंजय कुमार अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। लेकिन चूंकि यह स्थान जमुई और लखीसराय जिले की सीमा पर आता है, इसलिए कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई। दोनों जिलों की पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन सीमा विवाद के कारण मृतकों के शव को उठाने में देरी होती रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में त्वरित कार्रवाई आवश्यक होती है, लेकिन सीमा विवाद की वजह से अक्सर समय पर राहत और बचाव कार्य प्रभावित होता है। पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों ने पुलिस की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई है।

ऑटो चालक घायलों को लेकर हुआ फरार

घटना के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑटो चालक दो घायलों को लेकर मौके से फरार हो गया। कुछ लोगों का मानना है कि वह घबराहट में भागा, जबकि कुछ का कहना है कि वह शायद घायलों को अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहा हो। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है ताकि घटना की सही जानकारी मिल सके और घायलों की स्थिति का भी पता चल सके।

चालक के भागने से जांच में मुश्किलें आ रही हैं। उसकी गवाही हादसे की पूरी तस्वीर को स्पष्ट कर सकती है। पुलिस CCTV फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर चालक को ट्रेस करने की कोशिश में जुटी है।

गांव में पसरा मातम, छात्रों की असमय मौत से गमगीन माहौल

हादसे में जिन तीन छात्रों की जान गई है, वे सभी होनहार और परिश्रमी माने जाते थे। परिवार के लोगों और गांववालों को इस बात का विश्वास नहीं हो पा रहा है कि जिन बच्चों को उन्होंने अपने सपनों के साथ बाहर भेजा था, वे अब कभी वापस नहीं आएंगे। पूरा शिवसोना गांव शोक की लहर में डूबा है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के किनारे इस तरह ट्रक खड़ा करना आम बात हो गई है। कई बार प्रशासन को इस बारे में शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने हादसे के लिए ट्रक चालक की लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रशासनिक लापरवाही और सड़क सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा एक बार फिर से सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर गया है। दो जिलों की सीमा पर इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं, जहां पुलिस और प्रशासन की असमंजसपूर्ण भूमिका के कारण पीड़ितों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती।

सड़क किनारे भारी वाहनों का बिना संकेत खड़ा होना कानून का सीधा उल्लंघन है, लेकिन इसकी निगरानी के लिए कोई ठोस व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई है। रात और सुबह के समय जब दृश्यता कम होती है, ऐसे में बिना किसी संकेत के खड़े ट्रक जानलेवा साबित होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग को मिलकर काम करने की जरूरत है। साथ ही, बॉर्डर एरिया में jurisdiction को लेकर स्पष्ट नियम लागू करने होंगे ताकि रेस्क्यू और जांच में समय की बर्बादी न हो।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। ट्रक मालिक और चालक की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पर दबाव है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ट्रक वहां कब से खड़ा था और क्या उसे खड़ा करने की अनुमति ली गई थी या नहीं। वहीं, छात्रों के परिवार वालों ने प्रशासन से मुआवजा और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

शिवसोना गांव के तीन होनहार छात्रों की एक ही सुबह में मौत ने न केवल तीन परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि एक बार फिर से यह दिखा दिया कि कैसे सिस्टम की एक चूक पूरे समाज पर भारी पड़ सकती है।

सड़क सुरक्षा, पुलिस की जिम्मेदारी और प्रशासनिक समन्वय—इन सभी पहलुओं पर अब गंभीरता से काम करने की जरूरत है। हादसा हो चुका है, लेकिन अगर इससे सबक लिया जाए तो भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं।

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि सड़क सुरक्षा नियमों को और सख्ती से लागू करें और सीमा क्षेत्रों में एकीकृत रेस्क्यू सिस्टम विकसित करें, जिससे कोई हादसा राहत के अभाव में और बड़ा न बन जाए।

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