ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते में क्या कोई ऐसा खतरा तैयार हो रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में भारत तक पहुंच सकता है?
तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन दुनिया की सबसे विशाल जलविद्युत परियोजनाओं में से एक का निर्माण कर रहा है। हिमालय की बेहद संवेदनशील भूगर्भीय पट्टी में बन रही इस परियोजना को लेकर सक्रिय भ्रंश, भूस्खलन, ग्लेशियर, अचानक बाढ़ और नदी के प्रवाह से जुड़े कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
लेकिन असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चीन कितना पानी रोक सकता है। बड़ा सवाल यह है कि अगर तिब्बत में नदी के ऊपरी हिस्से में कोई प्राकृतिक या मानवीय घटना होती है, तो उसका असर भारत तक कितनी तेजी से पहुंच सकता है? और उससे भी बड़ा सवाल—क्या भारत के पास उस खतरे को समय रहते समझने और उसका सामना करने के लिए पर्याप्त जानकारी और चेतावनी तंत्र है?
यारलुंग त्सांगपो, भारत में सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र—नदी एक है, लेकिन इसके नाम बदलते जाते हैं। इसी तरह इस नदी से जुड़े खतरे भी सीमा पार करते हुए अपना रूप बदल सकते हैं।
इस रिपोर्ट में हम चीन के महाडैम, हिमालय की भूगर्भीय संवेदनशीलता, भूस्खलन और अचानक बाढ़ के संभावित जोखिम, ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव तथा भारत के सामने मौजूद जल-सुरक्षा और डेटा-साझाकरण से जुड़े सवालों को समझेंगे।
खबरों की खबर और लीक से हटकर खबर के इस विशेष सेगमेंट में देखिए पूरी पड़ताल।
https://youtu.be/F5X0EsXUB40
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