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बिहार चुनाव एग्जिट पोल : अबकी बार किसकी सरकार

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बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है, और सभी की निगाहें अब 14 नवंबर पर टिकी हुई हैं, जब वोटों की गिनती शुरू होगी। राज्य के 46 मतगणना केंद्रों पर सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी। मतदान के बाद विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आ चुके हैं, जो चुनाव के नतीजों का अनुमान लगा रहे हैं। कुछ एग्जिट पोलों में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को बहुमत मिलता दिख रहा है, तो कुछ में मुकाबला कड़ा नजर आ रहा है। इस बीच, देश की प्रमुख एजेंसी, Axis My India ने अपने एग्जिट पोल के जरिए बड़ा अनुमान जताया है। इस अनुमान ने तेजस्वी यादव को झटका तो दिया है, वहीं एनडीए को एक बार फिर सत्ता में लौटता हुआ दिखाया है।

एनडीए बनाम महागठबंधन: कौन मारेगा बाजी?

Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, बिहार में एनडीए को 43% वोट शेयर, महागठबंधन (MGB) को 41% वोट शेयर, जन सुराज पार्टी (JSP) को 4% वोट शेयर और अन्य दलों को 12% वोट मिलने का अनुमान है। सीटों की बात करें तो एग्जिट पोल में एनडीए को 121 से 141 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, वहीं महागठबंधन को 98 से 118 सीटें मिल सकती हैं। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है, और एग्जिट पोल में एनडीए को यह आंकड़ा पार करते हुए आसानी से बहुमत प्राप्त होते दिखाई दे रहा है।

एनडीए को बहुमत का रास्ता

एग्जिट पोल में अगर एनडीए को 121 सीटें मिलती हैं, तो वह बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे। हालांकि, यदि एनडीए को 121 से अधिक सीटें मिलती हैं, तो बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन सकती है। Axis My India के एग्जिट पोल के मुताबिक, 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी को 50 से 60 सीटें, 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही जदयू को 56 से 62 सीटें, 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही लोजपा(रा) को 11 से 16 सीटें, 6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हम को 2-3 सीटें, और 6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे आरएलएम को 2-4 सीटें मिलने का अनुमान है।

महागठबंधन की स्थिति

महागठबंधन के लिए एग्जिट पोल में 98 से 118 सीटों का अनुमान जताया गया है। इसमें राजद को 67 से 76 सीटें, कांग्रेस को 17 से 21 सीटें, लेफ्ट को 10 से 14 सीटें और वीआईपी को 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं। इस एग्जिट पोल को देखकर यह कहा जा सकता है कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद एक बार फिर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। वहीं, जदयू भी अपनी खोई हुई लोकप्रियता को वापस हासिल करती हुई दिख रही है। Axis My India के एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 0-2 सीटें, ओवैसी की AIMIM को 0-2 सीटें और अन्य छोटे दलों को 0-5 सीटें मिलने का अनुमान है।

क्षेत्रीय प्रभाव और वोटों का बंटवारा

एग्जिट पोल के अनुसार, चंपारण क्षेत्र की 21 सीटों में से 12 पर एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि महागठबंधन 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। सीमांचल क्षेत्र में महागठबंधन को 15 सीटें, एनडीए को 8 और जन सुराज को 1 सीट मिलती दिख रही है। इस क्षेत्र में एनडीए को 37% और महागठबंधन को 52% वोट मिलने का अनुमान है। कोसी क्षेत्र में मुकाबला कड़ा होने की संभावना है, जहां एनडीए को 16 और महागठबंधन को 15 सीटें मिल सकती हैं। इस क्षेत्र में एनडीए को 43% और महागठबंधन को 42% वोट मिलने का अनुमान है।

जातीय समीकरण और वोटिंग पैटर्न

Axis My India के एग्जिट पोल में महागठबंधन को यादव समुदाय से 90% और मुस्लिम समुदाय से 79% वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, एनडीए को ऊपरी और मध्यम वर्ग के साथ-साथ शहरी मतदाताओं का समर्थन मिलता हुआ दिख रहा है। पहली बार वोट डालने वाले (18-19 वर्ष आयु वर्ग) मतदाताओं में महागठबंधन को 46% वोट मिल रहे हैं, जबकि एनडीए को 37% वोट मिल रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे आयु वर्ग बढ़ता है, एनडीए की स्थिति मजबूत होती जाती है। 30-39 वर्ष के मतदाताओं में एनडीए को 43% और महागठबंधन को 42% वोट मिल रहे हैं। 50 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में एनडीए को 49-51% वोट मिलने का अनुमान है।

जन सुराज पार्टी का प्रभाव

जन सुराज पार्टी का 4% वोट शेयर भले ही छोटा दिखे, लेकिन कई सीटों पर यह निर्णायक भूमिका निभा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज के समर्थक मुख्य रूप से पूर्व एनडीए वोटर हैं, और उनकी शिफ्ट से एनडीए को लगभग 3% तक का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान कई करीबी सीटों पर परिणाम बदल सकता है। ग्रामीण और सीमांचल क्षेत्रों में महागठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि शहरी और मध्य आय वर्ग के मतदाता एनडीए के पक्ष में झुके हुए हैं। जन सुराज का प्रभाव विशेष रूप से इन तबकों में ज्यादा देखा जा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। हालांकि, एनडीए को बहुमत मिलने का अनुमान है, लेकिन महागठबंधन भी अपनी सीटों में वृद्धि कर सकता है। क्षेत्रीय वोटों, जातीय समीकरणों और छोटे दलों जैसे जन सुराज पार्टी के प्रभाव को देखते हुए यह चुनाव परिणाम काफी रोचक होगा। अब सभी की निगाहें 14 नवंबर 2025 को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि बिहार में कौन सा गठबंधन सरकार बनाएगा।

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