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छठ पूजा के बाद यात्रियों की भीड़ से पटना स्टेशन पर अफरातफरी

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छठ पूजा समाप्त होने के बाद बिहार से बाहर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ ने राजधानी पटना के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर अफरातफरी मचा दी। शुक्रवार को पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर टर्मिनल और दानापुर स्टेशन यात्रियों से पूरी तरह भर गए। हज़ारों लोग दिल्ली, पंजाब, मुंबई और अन्य राज्यों के लिए निकलने वाली ट्रेनों में किसी तरह जगह पाने की कोशिश कर रहे थे।

भीड़ इतनी अधिक थी कि अधिकांश ट्रेनें अपनी क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों के साथ रवाना हुईं। स्थिति बिगड़ने पर रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ को नियंत्रण संभालना पड़ा। सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, पटना-कोटा एक्सप्रेस और पंजाब मेल जैसी ट्रेनों से पचास से अधिक यात्रियों को सुरक्षा कारणों से उतारा गया। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की कि वे भीड़ को संभालने के लिए चलाई गई विशेष ट्रेनों का उपयोग करें।

खिड़कियों से चढ़े यात्री, प्लेटफॉर्म पर भगदड़

भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोग खिड़कियों से कोचों में चढ़ने लगे। कई यात्री दरवाजों पर लटकते हुए नजर आए। दिल्ली और पंजाब की ओर जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई। जैसे ही पंजाब मेल और ब्रह्मपुत्र मेल प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंचीं, दोनों ओर से लोग दौड़ पड़े।

जनरल डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं थी। कुछ यात्री भीड़ से बचने के लिए खिड़कियों से बाहर निकलने लगे। अंदर बैठे लोगों ने आपात खिड़कियां खोलकर बाहर फंसे यात्रियों को खींचकर अंदर लिया। पूरा प्लेटफॉर्म अफरातफरी और शोरगुल से भर गया।

सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में तकनीकी खराबी ने बढ़ाई परेशानी

भीड़ के बीच सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में लगातार चौथे दिन तकनीकी समस्या सामने आई। ट्रेन के एक कोच का दरवाजा नहीं खुलने से यात्री प्लेटफॉर्म पर फंसे रहे। गुस्से में यात्रियों ने दरवाजे पर थपथपाना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद आरपीएफ और रेलवे कर्मचारियों ने दरवाजा खोलकर यात्रियों को अंदर जाने दिया।

इस दौरान लगातार हो रही बारिश ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। पटना जंक्शन और राजेंद्र नगर टर्मिनल के सभी चार प्रतीक्षालयों में पानी भर गया। यात्रियों को गीले फर्श पर बैठने को मजबूर होना पड़ा। कई परिवार छोटे बच्चों और सामान के साथ भीगते हुए प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते रहे।

अतिरिक्त ट्रेनों के बावजूद नहीं संभली भीड़

शुक्रवार को रेलवे ने पटना, राजेंद्र नगर और दानापुर से एक दर्जन से अधिक विशेष ट्रेनें चलाईं। इनमें हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, श्रमजीवी एक्सप्रेस, सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और पटना-कोटा एक्सप्रेस शामिल थीं। इसके बावजूद भीड़ पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की संख्या इस बार अनुमान से कहीं अधिक रही। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई, लेकिन भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था अपर्याप्त साबित हुई। कई यात्रियों ने शिकायत की कि प्लेटफॉर्म पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं थे और ट्रेनों की घोषणा भी समय पर नहीं की जा रही थी।

यात्रियों की शिकायतें और अव्यवस्था

दिल्ली जाने वाले यात्री प्रदीप कुमार ने कहा, “आरपीएफ के जवान मेहनत कर रहे थे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग इधर-उधर भाग रहे थे, किसी को पता नहीं था कि कौन सी ट्रेन किस प्लेटफॉर्म से जाएगी।”

रेलवे प्रशासन ने दावा किया कि स्थिति को संभालने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। टिकट काउंटर, प्रवेश द्वार और पूछताछ केंद्र पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि इस बार छठ पूजा के बाद यात्रियों की भीड़ अपेक्षा से कहीं अधिक रही।

बारिश ने और बढ़ाई मुश्किलें

लगातार हो रही बारिश के कारण स्टेशन परिसर और वेटिंग एरिया में पानी भर गया। यात्री सूखी जगह की तलाश में प्लेटफॉर्म की ओर आने लगे, जिससे भीड़ और बढ़ गई। बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई ट्रेनें देर से चलीं, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

आरपीएफ ने संभाली स्थिति

आरपीएफ ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर गश्त बढ़ा दी। सुरक्षाकर्मियों ने बिना टिकट यात्रियों को बाहर निकाला और भीड़ को विशेष ट्रेनों की ओर भेजा। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शाम तक कुछ ट्रेनों के रवाना होने के बाद स्थिति थोड़ी सामान्य हुई, लेकिन रेलवे प्रशासन का कहना है कि आने वाले दो दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है।

हर साल दोहराई जाती है यह स्थिति

हर साल छठ पूजा के बाद बिहार से लाखों लोग देश के अन्य हिस्सों में लौटते हैं। यह देश की सबसे बड़ी वार्षिक यात्रा में से एक मानी जाती है। दिल्ली, मुंबई, सूरत और पंजाब जैसे शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर छठ मनाने घर आते हैं और फिर काम पर लौट जाते हैं।

इस साल भी वही दृश्य दोहराया गया। पटना के भीड़भरे रेलवे स्टेशनों पर हजारों लोगों के लिए घर लौटने का यह सफर बेहद कठिन और थकाने वाला साबित हुआ।

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