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बिहार के 32 जिलों में Yellow Alert, गरज-चमक के साथ भारी बारिश का खतरा

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बिहार का मौसम अभी भी मानसून के प्रभाव में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को राज्य के 32 जिलों में Yellow Alert जारी किया है। विभाग के अनुसार कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होगी जबकि कुछ जिलों में भारी वर्षा, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना है। लगातार हो रही बारिश से जहां किसानों को राहत मिल सकती है वहीं बाढ़ और जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

32 जिलों में जारी हुआ Yellow Alert

मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार बिहार के 32 जिले अलर्ट पर हैं। इनमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास, कैमूर, भोजपुर और बक्सर शामिल हैं।

उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। इन इलाकों में रुक-रुक कर बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है।

भारी बारिश की सबसे अधिक संभावना किन जिलों में

IMD Alert के अनुसार किशनगंज, अररिया, पश्चिम चंपारण और गोपालगंज जैसे जिले भारी वर्षा से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में नदी का जलस्तर पहले से ही ऊँचा है और नए दौर की बारिश स्थिति को और जटिल बना सकती है।

दक्षिण बिहार जैसे पटना और गया में हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि यहां उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। अधिकतम तापमान दो से तीन डिग्री घटकर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस तक रहने की उम्मीद है जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों

बारिश से धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों को फायदा होगा क्योंकि इन्हें पानी की ज़रूरत है। लेकिन जिन जिलों में पहले से ही जलभराव है वहां किसान मुश्किल में हैं। खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का डर है।

बिहार का कृषि क्षेत्र पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। ऐसे में संतुलित बारिश किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है जबकि ज़्यादा पानी उनके लिए संकट भी बन सकता है।

बाढ़ की चुनौती और जनजीवन पर असर

कई जिलों जैसे दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल और मधुबनी पहले से ही बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। गांवों में लोग घुटनों तक पानी में रहने को मजबूर हैं। राहत शिविर बनाए गए हैं लेकिन बहुत से परिवार अभी भी सुरक्षित जगह की तलाश में हैं।

ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकान लगातार बारिश से कमजोर हो रहे हैं। साथ ही जलभराव से जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया और डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है।

लोगों के लिए IMD की अपील

IMD ने लोगों से अपील की है कि गरज-चमक के समय बिना ज़रूरत बाहर न निकलें। खुले मैदानों और बड़े पेड़ों के नीचे जाने से बचें। बिहार में हर साल बिजली गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है इसलिए सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है।

अगले कुछ दिनों तक सक्रिय रहेगा मानसून

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों तक बिहार में मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश देखने को मिलेगी। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और मानसूनी ट्रफ लाइन की वजह से सितंबर के अंत तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

शहरी इलाकों में जलभराव और मुश्किलें

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में लगातार हो रही बारिश से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। यातायात बाधित है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट लगाए गए हैं लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं।

सरकार और प्रशासन की तैयारी

बिहार सरकार ने कहा है कि सभी जिलों में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री जैसे सूखा राशन, दवा और पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल मेडिकल यूनिट भेजने के आदेश दिए हैं ताकि ग्रामीण इलाकों में तुरंत इलाज मिल सके।

जलवायु परिवर्तन और बिहार का संकट

विशेषज्ञ मानते हैं कि हर साल बढ़ते बाढ़ संकट और अनियमित बारिश का संबंध जलवायु परिवर्तन से है। हाल के वर्षों में बारिश पहले से अधिक तीव्र और असमान हो गई है। बिहार जैसे राज्य में जहां नदियों का जाल फैला हुआ है, यह बदलाव और खतरनाक साबित हो रहा है।

लंबे समय के लिए मजबूत तटबंध, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और आधुनिक खेती की तकनीकें अपनाना बेहद ज़रूरी माना जा रहा है।

IMD का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित रह सकते हैं।

किसानों के लिए यह समय अहम है। संतुलित बारिश उनकी फसलों को बचाएगी जबकि अधिक वर्षा से नुकसान हो सकता है। शहरी लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि हल्की बारिश उमस से राहत दे लेकिन जलभराव की समस्या न बढ़ाए।

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